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कम नहीं हुईं डॉ. कफील की मुश्किलें, चार मामलों में से सिर्फ एक में मिली क्लीन चिट

Sat, 28 Sep 2019 02:29 PM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Amulya Rastogi Updated Sat, 28 Sep 2019 02:29 PM IST
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trouble not ended for dr kafeel, gets clean chit in one of four cases
Dr Kafeel Khan
बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर में अगस्त 2017 में ऑक्सीजन की कमी से हुई 70 बच्चों की मौत के मामले में आरोपी डॉ. कफील को चार मामलों में से सिर्फ एक में ही क्लीन चिट मिली है। आरोप है कि घटना के वक्त 100 बेड के एईएस वार्ड के नोडल प्रभारी डॉ. कफील ही थे, जबकि जांच में यह आरोप निराधार पाया गया है। 
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उधर,  शुक्रवार दिनभर उन्हें पूरे मामले में क्लीन चिट मिलने की खबरें आती रहीं, जबकि शासन के अनुुसार उनके खिलाफ अभी विभागीय जांच चल रही है और अंतिम कार्रवाई बाकी है।
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बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज गोरखपुर के बाल रोग विभाग के तत्कालीन प्रवक्ता डॉ. कफील खान की मुश्किलें अभी कम नहीं हुई हैं। इस मामले में शासन का कहना है कि डॉ. कफील अहमद खान के खिलाफ तत्कालीन प्रमुख सचिव एफएसडीए को 11 सितंबर 2017 को जांच अधिकारी नामित किया गया था। 
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डॉ. कफील ने चार बार उनके समक्ष अपने बयान दिए, जिसमें उन्होंने निजी प्रैक्टिस करने के आरोपों को नकारा था, जबकि मेडिस्प्रिंग हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर रुस्तमपुर के पंजीयन में उनका नाम दर्ज था। 

इसी तरह उनपर निजी नर्सिंग होम का संचालन करने और राजकीय चिकित्सक होने के बावजूद निजी प्रैक्टिस करने का आरोप भी था। इसमें उन्होंने वर्ष 2017 में मेडिस्प्रिंग से कोई सरोकार न होने का शपथ पत्र दिया था, जबकि 2016 में ही प्रवक्ता रूप में मेडिकल कॉलेज में योगदान दे रहे थे। इस मामले में भी जांच के बाद कार्रवाई लंबित है।

अनुशासनहीनता की विभागीय जांच भी है लंबित

शासन से जारी जांच रिपोर्ट के अनुसार, निलंबन के दौरान डॉ. कफील ने बहराइच जिला चिकित्सालय के बाल रोग विभाग में 22 सितंबर 2018 को जबरदस्ती घुसकर मरीजों का इलाज करने का प्रयास किया। इससे वहां अफरा-तफरी मच गई और पीआईसीयू में भी बाल रोगियों के जीवन पर संकट आ गया।

इसी तरह निलंबन के दौरान उन्हें महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा कार्यालय पर अपना योगदान देना था, लेकिन उन्होंने ऐसा न करके सरकार विरोधी राजनीतिक टिप्पणियां की। इसी आधार पर 31 जुलाई 2019 को उनके खिलाफ उप्र सरकारी सेवा नियमावली के तहत विभागीय कार्रवाई का आदेश देते हुए निलंबित किया गया। वर्तमान में प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को जांच अधिकारी नामित किया गया है।

डॉ. कफील को सिर्फ एक मामले में मिली क्लीन चिट

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के ऑक्सीजन कांड में आरोपी बनाए गए बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. कफील खान को सिर्फ एक मामले में ही क्लीनचिट मिली है। तत्कालीन प्रमुख सचिव स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन हिमांशु कुमार ने लगभग छह महीने पहले शासन को सौंपी अपनी जांच रिपोर्ट में उन्हें 100 बेड के एईएस वार्ड के नोडल ऑफिसर मामले में क्लीनचिट दी थी। हालांकि इस रिपोर्ट के आने के बाद भी डॉ. कफील को बहाल नहीं किया गया है।

शासन ने हिमांशु कुमार से पूरे मामले की जांच कराई थी। प्रमुख सचिव की जांच में डॉ. कफील के खिलाफ लापरवाही के साक्ष्य नहीं मिले। इसी आधार पर प्रमुख सचिव ने 18 अप्रैल 2019 को शासन को रिपोर्ट भेजी थी, जिसमें कहा गया था कि डॉ. कफील के पास 100 बेड वार्ड के नोडल अधिकारी का चार्ज नहीं था और न ही वह ऑक्सीजन की आपूर्ति के मामले में किसी कमेटी में थे। 

छह महीने बाद सामने आई इस रिपोर्ट को डॉ. कफील की ओर से मेडिकल कॉलेज प्रशासन से लेकर अन्य जिम्मेदारों के पास भेजा गया। डॉ. कफील ने निलंबन वापसी की गुहार भी लगाई लेकिन कुछ हुआ नहीं। इस संबंध में जांच अधिकारी हिमांशु कुमार से पक्ष जानने की कोशिश की गई, मगर उन्होंने फोन नहीं उठाया।

डॉ. कफील अहमद खान के खिलाफ विभागीय जांच अभी जारी है। उन्हें 100 बेड के एईएस वार्ड के नोडल ऑफिसर मामले में क्लीनचिट मिली है, उनके खिलाफ अन्य कई गंभीर मामले हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. राजनीश दुबे, प्रमुख सचिव, चिकित्सा शिक्षा
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