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Lucknow News: अति गंभीर मरीजों के लिए आफत अस्पतालों में एंबुलेंस तक नहीं
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
लखनऊ। राजधानी की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खुल गई है। लखनऊ के चार प्रमुख संयुक्त चिकित्सालयों में खुद की एंबुलेंस न होने या खराब होने के कारण गंभीर मरीजों को दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट करने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। अस्पताल प्रशासन पूरी तरह सरकारी 102 और 108 सेवा के भरोसे है, जिसके समय पर न पहुंचने से मरीजों की जान जोखिम में रहती है।
100 बेड के बीआरडी महानगर अस्पताल में रोजाना 20-30 मरीज भर्ती होते हैं। हायर सेंटर रेफर करने के लिए अस्पताल के पास एक भी एंबुलेंस नहीं है। सीएमएस डॉ. रंजीत दीक्षित के अनुसार, मरीज पूरी तरह सरकारी एंबुलेंस सेवा पर आश्रित हैं। 50 बेड के आलमबाग संयुक्त चिकित्सालय के पास भी अपनी कोई एंबुलेंस नहीं है। सीएमएस डॉ. आनंद त्रिपाठी ने बताया कि अस्पताल के पास अपनी एंबुलेंस नहीं हैं। परिसर में सरकारी एंबुलेंस खड़ी रहती हैं। इन्हीं से मरीजों को दूसरे अस्पताल भेजा जाता है।
100 बेड के रानी लक्ष्मीबाई अस्पताल के पास एंबुलेंस तो है, लेकिन वह लंबे समय से खराब पड़ी है। सीएमएस डॉ. नीलिमा सोनकर का कहना है कि वर्तमान में इसकी मरम्मत कराई जा रही है। वहीं, 176 बेड वाले ठाकुरगंज अस्पताल में एंबुलेंस और चालक की समस्या लंबे समय से थी। हाल ही में अपर निदेशक की ओर से चालक को संबद्ध करने के बाद कुछ महीनों से संचालन शुरू हो सका है, जिससे राहत मिली है।
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मरीजों की मजबूरी
रेफर किए गए गंभीर मरीजों के परिजनों को खुद 102 या 108 नंबर पर कॉल कर घंटों प्रतीक्षा करनी पड़ती है। एंबुलेंस आने तक मरीज अस्पताल के स्ट्रेचर पर ही पड़ा रहता है, जिससे इलाज में कीमती समय बर्बाद हो रहा है। अस्पताल प्रभारियों का दावा है कि शासन से नई एंबुलेंस की मांग की गई है।
पांच अस्पतालों में शव वाहन तक नहीं
जिले के पांच प्रमुख सरकारी अस्पतालों बीआरडी महानगर, रानी लक्ष्मीबाई, आलमबाग 50 बेड अस्पताल, ठाकुरगंज संयुक्त चिकित्सालय और बीकेटी स्थित राम सागर मिश्रा संयुक्त चिकित्सालय के पास शव वाहन भी नहीं है। अपनों को खोने के बाद गमगीन तीमारदारों को निजी एंबुलेंस संचालकों की मनमानी का शिकार होना पड़ रहा है। अस्पताल प्रभारियों का कहना है कि किसी गरीब मरीज की मृत्यु के बाद सीएमओ कार्यालय से संपर्क कर शव वाहन मंगवाने की कोशिश की जाती है। हालांकि, इस प्रक्रिया में काफी समय लगता है।
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100 बेड के बीआरडी महानगर अस्पताल में रोजाना 20-30 मरीज भर्ती होते हैं। हायर सेंटर रेफर करने के लिए अस्पताल के पास एक भी एंबुलेंस नहीं है। सीएमएस डॉ. रंजीत दीक्षित के अनुसार, मरीज पूरी तरह सरकारी एंबुलेंस सेवा पर आश्रित हैं। 50 बेड के आलमबाग संयुक्त चिकित्सालय के पास भी अपनी कोई एंबुलेंस नहीं है। सीएमएस डॉ. आनंद त्रिपाठी ने बताया कि अस्पताल के पास अपनी एंबुलेंस नहीं हैं। परिसर में सरकारी एंबुलेंस खड़ी रहती हैं। इन्हीं से मरीजों को दूसरे अस्पताल भेजा जाता है।
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100 बेड के रानी लक्ष्मीबाई अस्पताल के पास एंबुलेंस तो है, लेकिन वह लंबे समय से खराब पड़ी है। सीएमएस डॉ. नीलिमा सोनकर का कहना है कि वर्तमान में इसकी मरम्मत कराई जा रही है। वहीं, 176 बेड वाले ठाकुरगंज अस्पताल में एंबुलेंस और चालक की समस्या लंबे समय से थी। हाल ही में अपर निदेशक की ओर से चालक को संबद्ध करने के बाद कुछ महीनों से संचालन शुरू हो सका है, जिससे राहत मिली है।
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मरीजों की मजबूरी
रेफर किए गए गंभीर मरीजों के परिजनों को खुद 102 या 108 नंबर पर कॉल कर घंटों प्रतीक्षा करनी पड़ती है। एंबुलेंस आने तक मरीज अस्पताल के स्ट्रेचर पर ही पड़ा रहता है, जिससे इलाज में कीमती समय बर्बाद हो रहा है। अस्पताल प्रभारियों का दावा है कि शासन से नई एंबुलेंस की मांग की गई है।
पांच अस्पतालों में शव वाहन तक नहीं
जिले के पांच प्रमुख सरकारी अस्पतालों बीआरडी महानगर, रानी लक्ष्मीबाई, आलमबाग 50 बेड अस्पताल, ठाकुरगंज संयुक्त चिकित्सालय और बीकेटी स्थित राम सागर मिश्रा संयुक्त चिकित्सालय के पास शव वाहन भी नहीं है। अपनों को खोने के बाद गमगीन तीमारदारों को निजी एंबुलेंस संचालकों की मनमानी का शिकार होना पड़ रहा है। अस्पताल प्रभारियों का कहना है कि किसी गरीब मरीज की मृत्यु के बाद सीएमओ कार्यालय से संपर्क कर शव वाहन मंगवाने की कोशिश की जाती है। हालांकि, इस प्रक्रिया में काफी समय लगता है।