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‘तीन तलाक कानून से राहत की जगह बढ़ेंगी मुश्किलें’
Fri, 28 Dec 2018 04:07 AM IST
vivek shukla
ब्यूरो, अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: vivek shukla
Updated Fri, 28 Dec 2018 04:07 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
केंद्र सरकार ने तीन तलाक पर पाबंदी लगाने वाले मुस्लिम महिला बिल 2017 को पारित किया है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड तीन तलाक पर पाबंदी लगाने वाले बिल को पहले ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश की मूलभावना के खिलाफ बता चुका है। बोर्ड का मानना है कि जब सुप्रीम कोर्ट ने एक साथ तीन तलाक को अवैध घोषित कर दिया है तो आरोपी को जेल कैसे भेजा जा सकता है। कानून को बोर्ड ने लोकतंत्र के खिलाफ बताते हुए माना है कि बिल के प्राविधान महिलाओं को राहत देने की जगह उनकी तकलीफ बढ़ाने की वजह बनेंगे। वहीं बिल को लेकर अमर उजाला ने उलमा और एक साथ तीन तलाक के खिलाफ संघर्ष कर रही मुस्लिम महिलाओं से उनकी राय जानी।
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तीन तलाक को अपराध बनाने वाला बिल महिलाओं के खिलाफ : मौलाना फरंगी महली
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली का कहना है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में तीन तलाक बिल के विरोध में लाखों मुस्लिम महिलाओं ने सड़क पर उतर कर विरोध प्रदर्शन किया। तीन तलाक पर बिल को विपक्षी पार्टियों और मुस्लिम संगठनों ने सलेक्ट कमेटी में भेजने और वहां से फैसला आने के बाद उसके मुताबिक कानून बनाने की मांग की थी। सरकार ने उनकी मांगों और विरोध को नजरअंदाज कर बिल पास किया जो लोकतंत्र के लिए सही नही है। सवाल ये है कि सरकार को बिल पास करवाने की इतनी जल्दी क्यों है।
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करोड़ों मुस्लिम महिलाओं के विरोध को किया नजरअंदाज : जफरयाब जिलानी
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सचिव जफरयाब जिलानी का कहना है कि उम्मीद है कि राज्यसभा में बिल का बड़ा विरोध होगा। सरकार का रवैया मुसलमानों के खिलाफ है। यही वजह है कि सरकार उन तीन तलाक का विरोध करने वाली चंद महिलाओं की बात तो कर रही है लेकिन तीन तलाक कानून के विरोध में देश के बड़े शहरों में सड़क पर उतरीं करोड़ों महिलाओं की भावनाओं को नजरअंदाज कर दिया। सरकार का ये फैसला पूरी तरह से राजनीतिक फायदा लेने के लिये किया गया है।
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महिलाओं के गुजारे की नही की व्यवस्था: नाईश हसन
मुस्लिम वीमेन लीग की महासचिव नाईश हसन का कहना है कि तीन तलाक के खिलाफ कानून बनना जरूरी है लेकिन उसकी खामियां दूर करना उससे भी ज्यादा जरूरी है। बिल में तीन तलाक को अपराध बनाया गया। सजा का प्रावधान रख दिया लेकिन महिलाओं के गुजारे की व्यवस्था नही रखी। हमारी मांग बिल में सुधार की थी लेकिन उसे नजरअंदाज किया गया है। खलीफा के जमाने में भी एक साथ तीन तलाक अपराध था। तलाक के बाद महिलाएं आर्थिक तौर पर सबसे ज्यादा परेशान होती है। पति के जेल में रहने के दौरान पीड़ित महिला और उसके बच्चे के गुजारे की जिम्मेदारी तय नही है। बिल को लेकर पुनर्विचार होना चाहिए।
कानून बनने से तीन तलाक के मामलों में आएगी कमी: बेगम शहनाज सिदरत
बज्म-ए-ख्वातीन की अध्यक्ष बेगम शहनाज सिदरत ने कहा कि तलाक के बाद महिलाओं को गुजारे के लिए सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है। हमारी लड़ाई तलाकशुदा महिलाओं की आर्थिक मदद की भी है। महिला व उसके बच्चों के गुजारे की व्यवस्था प्राथमिकता पर होनी चाहिये। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने तीन तलाक को लेकर संजीदगी से काम नही किया। यही वजह है सरकार को इस मामले में कानून बनाने का मौका मिला। हम सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हैं।