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Lucknow News: रंग-बिरंगे परिधानों में उतरी जनजाति संस्कृति
Tue, 19 Nov 2024 03:15 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Tue, 19 Nov 2024 03:15 AM IST
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लखनऊ। अंतरराष्ट्रीय जनजाति भागीदारी उत्सव में सोमवार को देश के कई राज्यों की जनजातीय पारंपरिक वेशभूषा के साथ राजधानीवासी लोकनृत्य से भी रूबरू हुए। कार्यक्रम के चौथे दिन मंच पर वियतनाम के कलाकारों की प्रस्तुतियां हुईं। वहीं विभिन्न अंचलों से आए कलाकारों की पारंपरिक वेशभूषा का शो आकर्षण का केंद्र रहा।
संगीत नाटक अकादमी परिसर में भागीदारी उत्सव में उत्तराखंड, असम, छत्तीसगढ़, केरल, गोवा, बिहार आदि राज्यों के कलाकारों ने मंच पर पारंपरिक वेशभूषाओं का प्रदर्शन किया। जनजातीय परिधानों से सजे कलाकार मंच पर पहुंचे तो दर्शक देखते ही रह गए। अनिल कुमार त्रिपाठी के संचालन में हुए सांस्कृतिक कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के गैंडी नृत्य में पुरुष कलाकारों ने लकड़ी के डंडों पर चढ़कर डांस किया। यह नृत्य उन्नत फसल की कामना के लिए किया जाता है। गुजरात के सिद्धि धमाल नृत्य में मुंह से आग का फव्वारा निकालते और सिर से नारियल फोड़ते कलाकारों के हैरतअंगेज करतबों ने दर्शकों में रोमांच भर दिया।
पश्चिम बंगाल के पुरुष कलाकारों ने नटुआ नृत्य से दर्शकों में जोश भर दिया। कलाकारों ने शरीर पर मिट्टी से विभिन्न पारंपरिक अल्पनाएं बनायी हुई थीं। असम के कलाकारों में महिलाओं ने लाल पीले रंग की वेशभूषा पहन कर समूह नृत्य किया। महिला कलाकारों ने अपने हाथ में एक तरह के झुनझुने की तरह के वाद्य जाबखिन को लेकर नृत्य किया। गोवा के दल ने चंद्रेश के निर्देशन में लाल रंग की साड़ी पर सफेद रंग के दुपट्टे को नचाते हुए नृत्य किया। यह नृत्य चावल की अच्छी फसल की कामना के साथ किया जाता है। उत्तराखंड के कलाकारों ने दशहरा व दीपावली पर होने वाले नृत्य जौनसारी का प्रदर्शन किया। बिहार का उरांव, केरल के इरुला, हिमाचल प्रदेश के सिरमौरी नाटी-मास्क नृत्य ने भी दर्शकों को लुभाया। उत्सव में मेराज आलम और प्रजापति के दल के पुतुल प्रदर्शन, वेदानंद का बीन वादन और सुगनाराम के रावण हस्तवीणा वादन ने प्रशंसा हासिल की।
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लखनऊ की सरजमीं पर उतरी वियतनाम की तहजीब
नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ आर्ट्स एजुकेशन, वियतनाम से डाॅ. दाओ डांग की अगुवाई में आए 12 सदस्यीय कलाकारों की प्रस्तुतियों ने वियतनाम की तहजीब से दर्शकों की पहचान कराई। पुरुषों ने छाते और स्त्रियों ने बांस से तैयार बड़ी सी हैट के साथ नृत्य के जरिये विवाह से पूर्व परस्पर सम्मान और प्रेम का प्रदर्शन किया।
सरकारी योजनाओं का उठा सकते हैं लाभ
उत्सव में जनजाति शिल्प एवं उत्पाद संभावनाएं विषय पर संगोष्ठी हुई। उद्यान व रेशम विभाग के प्रमुख सचिव बीएल मीना की अध्यक्षता में हुई संगोष्ठी में संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव मुकेश कुमार मेश्राम और समाज कल्याण विभाग उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम ने प्रतिभागियों को खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में सरकारी योजनाओं से लाभ की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह मदद खाद्य प्रसंस्करण में तकनीक के प्रयोग के अलावा पैकेजिंग के क्षेत्र में भी दी जा रही है। उप्र. लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान के निदेशक अतुल द्विवेदी और जनजाति विकास विभाग की उप निदेशक डॉ. प्रियंका वर्मा मौजूद रहे।
बाइस्कोप के जरिये करा रहे भारत दर्शन
मेले में शिवम पारंपरिक रूप से बाइस्कोप के जरिये लोगों को भारत दर्शन और वाइल्ड लाइफ से परिचित करा रहे हैं। बाइस्कोप से जहां बच्चे परिचित हो रहे हैं तो वहीं, उम्रदराज लोगों को उनका बचपन याद आ रहा है। नजदीक ही रिक्शा सेल्फी प्वाइंट भी लोगों को लुभा रहा है। फूड जोन के माध्यम से महाकुंभ का भी प्रचार प्रसार किया जा रहा है।
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संगीत नाटक अकादमी परिसर में भागीदारी उत्सव में उत्तराखंड, असम, छत्तीसगढ़, केरल, गोवा, बिहार आदि राज्यों के कलाकारों ने मंच पर पारंपरिक वेशभूषाओं का प्रदर्शन किया। जनजातीय परिधानों से सजे कलाकार मंच पर पहुंचे तो दर्शक देखते ही रह गए। अनिल कुमार त्रिपाठी के संचालन में हुए सांस्कृतिक कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के गैंडी नृत्य में पुरुष कलाकारों ने लकड़ी के डंडों पर चढ़कर डांस किया। यह नृत्य उन्नत फसल की कामना के लिए किया जाता है। गुजरात के सिद्धि धमाल नृत्य में मुंह से आग का फव्वारा निकालते और सिर से नारियल फोड़ते कलाकारों के हैरतअंगेज करतबों ने दर्शकों में रोमांच भर दिया।
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पश्चिम बंगाल के पुरुष कलाकारों ने नटुआ नृत्य से दर्शकों में जोश भर दिया। कलाकारों ने शरीर पर मिट्टी से विभिन्न पारंपरिक अल्पनाएं बनायी हुई थीं। असम के कलाकारों में महिलाओं ने लाल पीले रंग की वेशभूषा पहन कर समूह नृत्य किया। महिला कलाकारों ने अपने हाथ में एक तरह के झुनझुने की तरह के वाद्य जाबखिन को लेकर नृत्य किया। गोवा के दल ने चंद्रेश के निर्देशन में लाल रंग की साड़ी पर सफेद रंग के दुपट्टे को नचाते हुए नृत्य किया। यह नृत्य चावल की अच्छी फसल की कामना के साथ किया जाता है। उत्तराखंड के कलाकारों ने दशहरा व दीपावली पर होने वाले नृत्य जौनसारी का प्रदर्शन किया। बिहार का उरांव, केरल के इरुला, हिमाचल प्रदेश के सिरमौरी नाटी-मास्क नृत्य ने भी दर्शकों को लुभाया। उत्सव में मेराज आलम और प्रजापति के दल के पुतुल प्रदर्शन, वेदानंद का बीन वादन और सुगनाराम के रावण हस्तवीणा वादन ने प्रशंसा हासिल की।
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लखनऊ की सरजमीं पर उतरी वियतनाम की तहजीब
नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ आर्ट्स एजुकेशन, वियतनाम से डाॅ. दाओ डांग की अगुवाई में आए 12 सदस्यीय कलाकारों की प्रस्तुतियों ने वियतनाम की तहजीब से दर्शकों की पहचान कराई। पुरुषों ने छाते और स्त्रियों ने बांस से तैयार बड़ी सी हैट के साथ नृत्य के जरिये विवाह से पूर्व परस्पर सम्मान और प्रेम का प्रदर्शन किया।
सरकारी योजनाओं का उठा सकते हैं लाभ
उत्सव में जनजाति शिल्प एवं उत्पाद संभावनाएं विषय पर संगोष्ठी हुई। उद्यान व रेशम विभाग के प्रमुख सचिव बीएल मीना की अध्यक्षता में हुई संगोष्ठी में संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव मुकेश कुमार मेश्राम और समाज कल्याण विभाग उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम ने प्रतिभागियों को खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में सरकारी योजनाओं से लाभ की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह मदद खाद्य प्रसंस्करण में तकनीक के प्रयोग के अलावा पैकेजिंग के क्षेत्र में भी दी जा रही है। उप्र. लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान के निदेशक अतुल द्विवेदी और जनजाति विकास विभाग की उप निदेशक डॉ. प्रियंका वर्मा मौजूद रहे।
बाइस्कोप के जरिये करा रहे भारत दर्शन
मेले में शिवम पारंपरिक रूप से बाइस्कोप के जरिये लोगों को भारत दर्शन और वाइल्ड लाइफ से परिचित करा रहे हैं। बाइस्कोप से जहां बच्चे परिचित हो रहे हैं तो वहीं, उम्रदराज लोगों को उनका बचपन याद आ रहा है। नजदीक ही रिक्शा सेल्फी प्वाइंट भी लोगों को लुभा रहा है। फूड जोन के माध्यम से महाकुंभ का भी प्रचार प्रसार किया जा रहा है।