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बिना ऑपरेशन हो सकता है ब्रेस्ट की गांठ का इलाज, बस रखें इन बातों का ध्यान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Wed, 05 Sep 2018 02:57 PM IST
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- फोटो : डेमो
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पद्मश्री और डॉ. बीसी राय अवॉर्ड से सम्मानित कैंसर सर्जन डॉ. पी. रघुराम ने कहा कि किसी किशोरी के स्तन में गांठ है तो उसका ऑपरेशन नहीं कराना चाहिए। यह बिना ऑपरेशन के ठीक हो सकता है। इसके लिए पहले मेमोग्राफी कराई जानी चाहिए।
आमतौर पर चिकित्सक इसे कैंसर का नाम देते हैं, जिससे मरीज पर मानसिक दबाव बनता है। जबकि इसका इलाज अब काफी आसान हो गया है। वह केजीएमयू में लखनऊ कॉलेज ऑफ सर्जन के सहयोग से ब्रेस्ट डिजीज पर आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।
डॉ. पी रघुराम ने विभिन्न उदाहरणों के जरिए यह बताया कि ब्रेस्ट संबंधी हर बीमारी को कैंसर से जोड़ना गलत है। उन्होंने बताया कि स्तन में गांठ होना कैंसर नहीं है बल्कि उसे फाइब्रोएडेनोमा कहते हैं। यह रेशेदार और ग्रंथिमय ऊतक से बनी, छोटी गांठ हैं। यह किशोरियों में अक्सर पाया जाता है।
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कई बार महिलाओं में भी हो जाती है। आम तौर पर तीस साल की उम्र से पहले इसका असर देखने को मिलता है। यह हार्मोनल बदलाव की वजह से होता है। मेमोग्राफी से इसकी जांच करनी चाहिए और फिर इसे दवाओं से ठीक किया जा सकता है।
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आमतौर पर चिकित्सक इसे कैंसर का नाम देते हैं, जिससे मरीज पर मानसिक दबाव बनता है। जबकि इसका इलाज अब काफी आसान हो गया है। वह केजीएमयू में लखनऊ कॉलेज ऑफ सर्जन के सहयोग से ब्रेस्ट डिजीज पर आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।
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डॉ. पी रघुराम ने विभिन्न उदाहरणों के जरिए यह बताया कि ब्रेस्ट संबंधी हर बीमारी को कैंसर से जोड़ना गलत है। उन्होंने बताया कि स्तन में गांठ होना कैंसर नहीं है बल्कि उसे फाइब्रोएडेनोमा कहते हैं। यह रेशेदार और ग्रंथिमय ऊतक से बनी, छोटी गांठ हैं। यह किशोरियों में अक्सर पाया जाता है।
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कई बार महिलाओं में भी हो जाती है। आम तौर पर तीस साल की उम्र से पहले इसका असर देखने को मिलता है। यह हार्मोनल बदलाव की वजह से होता है। मेमोग्राफी से इसकी जांच करनी चाहिए और फिर इसे दवाओं से ठीक किया जा सकता है।
लाल रंग का द्रव्य निकले तो कराएं जांच
डॉ पी.रघुराम को सम्मानित करते केजीएमयू शिक्षक
- फोटो : amar ujala
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि केतौर पर मौजूद एम्स निदेशक डॉ. संदीप कुमार ने स्तर कैंसर से जुड़ी अन्य बीमारियों केबारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्तन कैंसर होने पर मरीज की काउंसलिंग की खासतौर से जरूरत पड़ती है। इस दौरान केजीएमयू के सर्जिकल आंकोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर अरुण चतुर्वेदी, डॉ. गीतिका नंदा आदि मौजूद रहे।
'यदि स्तन से सफेद रंग का द्रव्य निकले तो चिंता की बात नहीं है। लेकिन लाल रंग का द्रव्य निकलने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए और जांच करानी चाहिेए। इसी तरह किसी को ब्रेस्ट में फोड़ा हो जाए तो उसमें घबराना नहीं चाहिए। कई बार कुछ डॉक्टर दूध बंद होने की दवाएं देने लगते हैं। इससे दिक्कत और बढ़ जाती है। फोड़ा होने पर दूध निकलने की प्रक्रिया जारी रखना चाहिेए। ठंडे पानी केबजाय गरम पानी से सेंकाई करनी चाहिए। यदि अंदर पस हो तो उसमें चीरा लगाने के बजाय निडिल से निकालना चाहिए। इस बीमारी को आसानी से दवा से ठीक किया जा सकता है।' - डॉ. पी. रघुराम
'आमतौर पर ब्रेस्ट में जरा सी गांठ होने पर उसे कैंसर मान लिया जाता है, लेकिन ऐसा नहीं है। हर गांठ कैंसर नहीं होती है। इसकी जांच कराई जानी चाहिए। आमतौर पर मेमोग्राफी कराने को लेकर भी लोगों में भय रहता है, लेकिन मेमोग्राफी में दर्द नहीं होता है।' - डॉ. राजीव जैन, केजीएमयू
'यदि स्तन से सफेद रंग का द्रव्य निकले तो चिंता की बात नहीं है। लेकिन लाल रंग का द्रव्य निकलने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए और जांच करानी चाहिेए। इसी तरह किसी को ब्रेस्ट में फोड़ा हो जाए तो उसमें घबराना नहीं चाहिए। कई बार कुछ डॉक्टर दूध बंद होने की दवाएं देने लगते हैं। इससे दिक्कत और बढ़ जाती है। फोड़ा होने पर दूध निकलने की प्रक्रिया जारी रखना चाहिेए। ठंडे पानी केबजाय गरम पानी से सेंकाई करनी चाहिए। यदि अंदर पस हो तो उसमें चीरा लगाने के बजाय निडिल से निकालना चाहिए। इस बीमारी को आसानी से दवा से ठीक किया जा सकता है।' - डॉ. पी. रघुराम
'आमतौर पर ब्रेस्ट में जरा सी गांठ होने पर उसे कैंसर मान लिया जाता है, लेकिन ऐसा नहीं है। हर गांठ कैंसर नहीं होती है। इसकी जांच कराई जानी चाहिए। आमतौर पर मेमोग्राफी कराने को लेकर भी लोगों में भय रहता है, लेकिन मेमोग्राफी में दर्द नहीं होता है।' - डॉ. राजीव जैन, केजीएमयू