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एलडीए में सुनवाई के दौरान ट्रासपोर्टरों का हंगामा, फायर स्टेशन के लिए छोड़े गए भूखंड का भू-उपयोग बदलकर पेट्रोल पंप किए जाने का मामला
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एलडीए में बृहस्पतिवार को ट्रांसपोर्टनगर योजना में फायर स्टेशन के लिए छोड़ी गई जमीन का भू-उपयोग बदलकर पेट्रोल पंप किए जाने की सुनवाई में हंगामा खड़ा हो गया। आपत्तियों की सुनवाई कर रहे सचिव पवन गंगवार के सामने ही दोनों पक्ष विरोध में आ गए। सचिव ने इसके बाद सभी पक्षों का आकलन करने के बाद ही फैसला करने का आश्वासन दिया है।
भू-उपयोग बदलने का विरोध कर रहे ट्रांसपोर्टर नेता हरप्रीत सिंह भाटिया ने कहा कि अगर वहां फायर स्टेशन नहीं बन पा रहा है तो वहां ट्रांसपोर्टर्स के लिए भूखंड काट दिए जाएं। कई ट्रांसपोर्टर लंबे समय से एलडीए से इसकी मांग कर रहे हैं। उनकी मांग पूरी करने की जगह किसी बाहरी व्यक्ति को पेट्रोल पंप दिए जाने का क्या औचित्य है। उनके तर्क पर पेट्रोल पंप के समर्थकों ने हंगामा खड़ा कर दिया। मौखिक रूप से चल रही बातचीत हाथापाई में बदलने की स्थिति बन गई। किसी तरह एलडीए सचिव ने दोनों पक्षों को शांत कराया।
भू-उपयोग बदलने पर आपत्ति लखनऊ जनकल्याण महासमिति के अध्यक्ष उमाशंकर दुबे ने भी दर्ज कराई। उनका कहना है कि आपत्ति करने वाले भी सुनवाई में समर्थन में दिख रहे थे। ऐसा लग रहा था कि जैसे दबाव में उनकी सहमति कराई गई हो। यह महत्वपूर्ण तथ्य है कि जहां पहले ही चार पेट्रोल पंप हों, वहां एक और पेट्रोल पंप की आवश्यकता नहीं है। अगर इनको पेट्रोल पंप ही खोलना है तो एलडीए दूसरी योजना जैसे गोमतीनगर विस्तार में खोल लें। एलडीए सचिव से कहा गया है कि इस प्रस्ताव को तुरंत वापस लें।
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भू-उपयोग बदलने का विरोध कर रहे ट्रांसपोर्टर नेता हरप्रीत सिंह भाटिया ने कहा कि अगर वहां फायर स्टेशन नहीं बन पा रहा है तो वहां ट्रांसपोर्टर्स के लिए भूखंड काट दिए जाएं। कई ट्रांसपोर्टर लंबे समय से एलडीए से इसकी मांग कर रहे हैं। उनकी मांग पूरी करने की जगह किसी बाहरी व्यक्ति को पेट्रोल पंप दिए जाने का क्या औचित्य है। उनके तर्क पर पेट्रोल पंप के समर्थकों ने हंगामा खड़ा कर दिया। मौखिक रूप से चल रही बातचीत हाथापाई में बदलने की स्थिति बन गई। किसी तरह एलडीए सचिव ने दोनों पक्षों को शांत कराया।
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भू-उपयोग बदलने पर आपत्ति लखनऊ जनकल्याण महासमिति के अध्यक्ष उमाशंकर दुबे ने भी दर्ज कराई। उनका कहना है कि आपत्ति करने वाले भी सुनवाई में समर्थन में दिख रहे थे। ऐसा लग रहा था कि जैसे दबाव में उनकी सहमति कराई गई हो। यह महत्वपूर्ण तथ्य है कि जहां पहले ही चार पेट्रोल पंप हों, वहां एक और पेट्रोल पंप की आवश्यकता नहीं है। अगर इनको पेट्रोल पंप ही खोलना है तो एलडीए दूसरी योजना जैसे गोमतीनगर विस्तार में खोल लें। एलडीए सचिव से कहा गया है कि इस प्रस्ताव को तुरंत वापस लें।
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