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अब UP में भी हाथों का प्रत्यारोपण: ब्रेन डेड मरीजों से हाथ दान में लेकर जरुरतमंदों को लगेंगे, इनको मिलेगा लाभ
Mon, 31 Jul 2023 08:03 AM IST
शाहरुख खान
चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ
चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 31 Jul 2023 08:03 AM IST
सार
उत्तर प्रदेश में अब हाथों का प्रत्यारोपण शुरू होगा। ब्रेन डेड मरीजों से हाथ दान में लेकर दूसरे मरीजों में प्रत्यारोपण किया जाएगा। महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडु समेत कई राज्यों में प्रत्यारोपण प्रक्रिया चल रही है। प्लास्टिक सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर विजय कुमार प्रत्यारोपण का प्रशिक्षण लेने के बाद लाइसेंस लेने की तैयारी में हैं।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
प्रदेश में जल्द ही हाथों का प्रत्यारोपण (कैडवर हैंड ट्रांसप्लांट) शुरू होगा। ब्रेन डेड मरीजों से दान में लेकर जरूरतमंद मरीजों में प्रत्यारोपित किया जाएगा। इसकी शुरुआत केजीएमयू से करने की तैयारी है। यहां के प्लास्टिक सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर विजय कुमार प्रत्यारोपण का प्रशिक्षण लेने के बाद लाइसेंस लेने की तैयारी में हैं।
प्रदेश के सरकारी एवं निजी चिकित्सा संस्थानों में लिवर, किडनी, कार्निया का प्रत्यारोपण चल रहा है। हार्ट प्रत्यारोपण की तैयारी पूरी हो चुकी है। अब हाथों के प्रत्यारोपण की शुरुआत होने जा रही है। रविवार को मुंबई से हाथों के प्रत्यारोपण का प्रशिक्षण लेकर लौटे प्रो विजय कुमार ने बताया कि प्रदेश में इसकी शुरुआत होने से हर माह करीब पांच से 10 मरीजों को फायदा मिलेगा।
प्लास्टिक सर्जरी विभाग में सभी सुविधाएं मौजूद हैं। यहां बर्न यूनिट, माइक्रो सर्जरी यूनिट चल रही है। स्किन बैंक स्थापना का कार्य चल रहा है। इसके लिए जैव सुरक्षा कैबिनेट, कोल्ड रूम सहित अन्य उपकरणों को स्थापित किया जा रहा है।
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अब हाथों के प्रत्यारोपण के लिए आवेदन किया जाएगा। स्टेट आर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (सोटो) से अनुमति मिलते ही इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। जरूरत पड़ी तो जहां पहले से प्रत्यारोपण चल रहा है, वहां के विशेषज्ञों को भी बुलाया जाएगा। इससे यहां की पूरी टीम पारंगत हो सकेगी।
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प्रदेश के सरकारी एवं निजी चिकित्सा संस्थानों में लिवर, किडनी, कार्निया का प्रत्यारोपण चल रहा है। हार्ट प्रत्यारोपण की तैयारी पूरी हो चुकी है। अब हाथों के प्रत्यारोपण की शुरुआत होने जा रही है। रविवार को मुंबई से हाथों के प्रत्यारोपण का प्रशिक्षण लेकर लौटे प्रो विजय कुमार ने बताया कि प्रदेश में इसकी शुरुआत होने से हर माह करीब पांच से 10 मरीजों को फायदा मिलेगा।
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प्लास्टिक सर्जरी विभाग में सभी सुविधाएं मौजूद हैं। यहां बर्न यूनिट, माइक्रो सर्जरी यूनिट चल रही है। स्किन बैंक स्थापना का कार्य चल रहा है। इसके लिए जैव सुरक्षा कैबिनेट, कोल्ड रूम सहित अन्य उपकरणों को स्थापित किया जा रहा है।
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अब हाथों के प्रत्यारोपण के लिए आवेदन किया जाएगा। स्टेट आर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (सोटो) से अनुमति मिलते ही इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। जरूरत पड़ी तो जहां पहले से प्रत्यारोपण चल रहा है, वहां के विशेषज्ञों को भी बुलाया जाएगा। इससे यहां की पूरी टीम पारंगत हो सकेगी।
चुनौतीपूर्ण है हाथों का प्रत्यारोपण
प्रो विजय कुमार ने बताया कि मुंबई में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में देशभर के हैंड प्रत्यारोपण करने वाले विशेषत्र जुटे। सभी ने अपना अनुभव साझा किया। हाथ प्रत्यारोपण जटिल सर्जरी है। ब्रेन डेड होने वाले मरीज के परिजन अन्य अंगों की तरह हाथ दान करने के लिए जब राजी हो जाते हैं तो उसे निकाला जाता है। फिर संबंधित मरीज के उस हिस्से में कृत्रिम हैंड लगा दिए जाते हैं ताकि परिजनों को भावनात्मक रूप से तकलीफ न हो।
प्रो विजय कुमार ने बताया कि मुंबई में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में देशभर के हैंड प्रत्यारोपण करने वाले विशेषत्र जुटे। सभी ने अपना अनुभव साझा किया। हाथ प्रत्यारोपण जटिल सर्जरी है। ब्रेन डेड होने वाले मरीज के परिजन अन्य अंगों की तरह हाथ दान करने के लिए जब राजी हो जाते हैं तो उसे निकाला जाता है। फिर संबंधित मरीज के उस हिस्से में कृत्रिम हैंड लगा दिए जाते हैं ताकि परिजनों को भावनात्मक रूप से तकलीफ न हो।
ब्रेन डेड से हाथ निकालने के बाद जरूरतमंद मरीज के हाथ की ग्राफ्टिंग की जाती है। मुख्य धमनियों, हड्डियों, नसों, मांसपेशियों सहित सभी आंतरिक हिस्से की माइक्रो प्लास्टिक सर्जरी की जाती है। ताकि खून का प्रवाह शुरू हो जाए।
सर्जरी के बाद मरीज को रिहैबिलिटेशन की जरूरत होती है। उसे फिजियोथेरेपी व आक्युपेशनल थेरेपी करानी होती है। मरीज को कुछ दवाएं ताउम्र लेनी पड़ती है। इसी तरह इम्यूनोलॉजिल दवाएं भी दी जाती हैं। ताकि लगाए गए कृत्रिम हाथ को शरीर स्वीकार कर ले। हाथ प्रत्यारोपण में करीब 10 से 15 लाख रुपया खर्च होता है।
किन लोगों को पड़ती है जरूरत
युद्ध अथवा किसी हादसे की वजह से हाथ गंवाने वाले सैनिकों एवं अन्य सुरक्षाकर्मियों, करंट लगने, थ्रेसर चलाने अथवा अन्य हादसे में हाथ गंवाने वालों को इसकी जरूरत पड़ती है। हाथों का प्रत्यारोपण शुरू होने से पीड़ित फिर से पहले की तरह जीवन यापन कर सकेंगे।
युद्ध अथवा किसी हादसे की वजह से हाथ गंवाने वाले सैनिकों एवं अन्य सुरक्षाकर्मियों, करंट लगने, थ्रेसर चलाने अथवा अन्य हादसे में हाथ गंवाने वालों को इसकी जरूरत पड़ती है। हाथों का प्रत्यारोपण शुरू होने से पीड़ित फिर से पहले की तरह जीवन यापन कर सकेंगे।
तैयार की जाती है टीम
हाथों के प्रत्यारोपण के लिए प्लास्टिक सर्जन, वैस्कुलर सर्जन, ऑर्थोपेडिक सर्जन और एनेस्थेसियोलॉजिस्ट सहित विभिन्न विभागों के डॉक्टरों की टीम बनाई जाती है। प्रत्यारोपण के बाद लंबे समय तक फिजियोथेपी भी चलती है।
हाथों के प्रत्यारोपण के लिए प्लास्टिक सर्जन, वैस्कुलर सर्जन, ऑर्थोपेडिक सर्जन और एनेस्थेसियोलॉजिस्ट सहित विभिन्न विभागों के डॉक्टरों की टीम बनाई जाती है। प्रत्यारोपण के बाद लंबे समय तक फिजियोथेपी भी चलती है।
कब कब हुआ प्रत्यारोपण
दुनिया में पहला कैडवर हैंड ट्रांसप्लांट (हाथ प्रत्यारोपण) 1999 में हुआ था। भारत में पहला हाथ प्रत्यारोपण केरल के कोच्चि और फिर अगस्त 2020 में मुंबई में हुआ। इसके अलावा तमिलनाडू, दिल्ली, चंडीगढ़ में भी यह सुविधा शुरू हो गई है। पूरे भारत में अब तक करीब 45 मरीजों का हाथ प्रत्यारोपण हुआ है।
दुनिया में पहला कैडवर हैंड ट्रांसप्लांट (हाथ प्रत्यारोपण) 1999 में हुआ था। भारत में पहला हाथ प्रत्यारोपण केरल के कोच्चि और फिर अगस्त 2020 में मुंबई में हुआ। इसके अलावा तमिलनाडू, दिल्ली, चंडीगढ़ में भी यह सुविधा शुरू हो गई है। पूरे भारत में अब तक करीब 45 मरीजों का हाथ प्रत्यारोपण हुआ है।