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रेलवेः ‘ज्वाइनिंग से पहले ही कर दिया कॅरिअर से खिलवाड़’

Sat, 04 Jan 2020 03:20 PM IST
ishwar ashish नीरज ‘अम्बुज’, अमर उजाला, लखनऊ
नीरज ‘अम्बुज’, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sat, 04 Jan 2020 03:20 PM IST
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Trainee railway officials expressed resentment against cadre merger
प्रतीकात्मक तस्वीर

‘सिविल सर्विस में मेरी रैंक अच्छी थी। मैं चाहता तो विदेश सेवा चुन सकता था, पर मैंने रेलवे चुना। मेरी रुचि रेलवे ट्रैफिक में है। ज्वाइनिंग से पहले ही कॅरिअर के साथ खिलवाड़ कर दिया गया।’ मानकनगर स्थित भारतीय रेलवे यातायात एवं प्रबंधन संस्थान (इरिटम) के एक प्रशिक्षु रेलवे अधिकारी ने काडर विलय के खिलाफ अपनी नाराजगी कुछ इस तरह जाहिर की।

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रेलवे की तीन नॉन टेक्निकल व पांच टेक्निकल सेवाओं का विलय कर इंडियन रेलवे मैनेंजमेंट सर्विस (आईआरएमएस) बनाए जाने को लेकर जहां सभी रेलवे जोनों के अधिकारियों में नाराजगी है, वहीं सिविल सेवा से चुनकर आए प्रशिक्षु रेलवे अधिकारियों में भी गुस्सा भरा हुआ है। इरिटम में अलग-अलग बैचों में करीब 45 अधिकारियों को ट्रैफिक मैनेजमेंट से लेकर एकाउंट, कार्मिक व अन्य विभागों में कामकाज की जानकारियां दी जा रही हैं। ‘अमर उजाला’ से फोन पर हुई बातचीत में इन प्रशिक्षु अधिकारियों ने कहा कि काडर विलय के खतरनाक दूरगामी परिणाम होंगे।
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एक प्रोबेशनर अधिकारी ने बताया कि टेक्निकल व नॉन टेक्निकल दो अलग ग्रुप हैं, जिनके विलय से सारा कामकाज चौपट हो जाएगा। ट्रैफिक सर्विस, अकेली ऐसी सेवा है, जहां प्रोबेशन पीरियड तीन साल का होता है, जबकि बाकी का दो साल का ही रहता है। माना जाता है कि इनकी भूमिका मुखिया की तरह होती है, जो सभी विभागों से सामंजस्य बनाकर रेलवे को प्रगति पथ पर ले जाते हैं।
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एक अन्य प्रशिक्षु अधिकारी ने बताया कि डेब्रॉय कमेटी की रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि  रेलवे में अलग-अलग बैकग्राउंड से अधिकारी आते हैं, इसलिए सिंगल सर्विस सिस्टम व्यावहारिक नहीं है। दिल्ली के एक प्रोबेशनरी रेलवे अधिकारी ने कहा कि दो पूरी तरह से भिन्न सेवाओं का विलय कैसे किया जा सकता है जबकि उनका कामकाज भी अलग है। इससे युवा अफसरों का मनोबल व कॅरिअर प्रभावित होगा। रेल मंत्रालय को प्रोबेशनरी अधिकारियों को लेकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

लखनऊ के एक प्रशिक्षु अधिकारी ने कहा कि हमें यूपीएससी की अन्य सेवाओं में जाने का मौका दिया जाना चाहिए ताकि अपनी कार्यक्षमताओं का हम बेहतर इस्तेमाल कर सकें।

इधर भी ‘खेल’ की आशंका

चेयरमैन रेलवे बोर्ड (सीआरबी) वीके यादव को हाल ही एक साल का एक्सटेंशन मिला है। सूत्रों ने बताया कि इससे रेलवे बोर्ड के सबसे वरिष्ठ अधिकारी सदस्य यातायात पीएस मिश्र के सीआरबी बनने की संभावनाओं पर पानी फिर गया है। जबकि उनसे जूनियर अधिकारी मेंबर इलेक्ट्रिकल (ट्रैक्शन) राजेश तिवारी को सीआरबी बनने का मौका मिल जाएगा। मिश्र सिविल सेवाओं से आए हैं, जबकि तिवारी इंजीनियरिंग सेवाओं से हैं। इससे भी सिविल सेवाओं से रेलवे में आए अधिकारियों में नाराजगी है।

एयर इंडिया जैसा होगा रेलवे का हाल
आईआरएमएस के खिलाफ रेलवे अधिकारियों का गुस्सा सोशल मीडिया पर भी सामने आ रहा है। राजकोट की मंडल परिचालन प्रबंधक जीविषा जोशी ने ट्वीट किया, काडरों के विलय से विनाशकारी स्थितियां पैदा होंगी और घृणा का माहौल पैदा होगा। मार्शल ए. सिल्वा ने लिखा कि एयर इंडिया व इंडियन एयरलाइंस के विलय से जो बर्बादी हुई है, वही रेलवे के साथ होगा। इन अधिकारियों ने चेयरमैन रेलवे बोर्ड को ट्विटर पर टैग कर अपना पक्ष रखा, लेकिन सीआरबी के ट्विटर पर सक्रिय नहीं रहने से जवाब नहीं दिए गए।

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