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लखनऊ: इन 17 चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल बंद, ये रही वजह

Thu, 19 Nov 2020 12:28 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Thu, 19 Nov 2020 12:28 PM IST
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traffic signals stopped at 17 intersections of lucknow due to non-submission of bills
प्रतीकात्मक तस्वीर
लखनऊ में बुधवार को बिजली बिल न जमा होेने के चलते 17 चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल बंद रहे। इसके चलते कुछ वाहन सवारों ने मनमानी की। एडीसीपी ट्रैफिक पूर्णेंदु सिंह ने बताया कि इन चौराहों पर ट्रैफिक पुलिसकर्मियों ने यातायात व्यवस्था संभाली।
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वहीं, संबधित विभाग स्मार्ट सिटी का कहना था कि एक से दो दिन में भुगतान हो जायेगा। वहीं, बिजली विभाग की माने तो इन चौराहों पर स्मार्ट मीटर लगे हैं तो बिना रिचार्ज सिग्नल नहीं चल सकता है। 
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मालूम हो कि मंगलवार को भी 13 चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल बंद रहा था। बुधवार को आईटी, लालबत्ती, केकेसी और बंदरिया बाग चौराहों के सिग्नल भी बंद हो गए। मेफेयर चौराहे के सिग्नल भी बंद रहे थे, लेकिन शाम को चालू हो गए थे।
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स्मार्ट सिटी में कार्यरत अशोक कुमार के मुताबिक, सिग्नल लगवाने का ठेका निजी कंपनी को दिया गया था। हर दो महीने में बिल जमा करने के बाद फाइल को स्मार्ट सिटी में भुगतान के लिए लगवाते हैं। वहीं, निजी कंपनी के मुताबिक, दो महीने में भुगतान किया जाता है, लेकिन चार महीने हो गए स्मार्ट सिटी कंपनी ने भुगतान नहीं किया है।

 

इन चौराहों पर रही परेशानी

हजरतगंज, आईजीपी, सिकंदर बाग, सीएमएस चौराहा, हैनीमैन, कठौता, ग्वारी, मनोज पांडेय, नीलम फॉर्मेसी, एलडीए मोड़, अब्दुल हमीद, कटाई पुल, रामराम बैंक चौराहा, आईटी, लालबत्ती, केकेसी और बंदरिया बाग 

दो महीने में आता है पांच से छह लाख रुपये बिल
बिजली विभाग के अधिकारी की माने तो शहर में 70-80 प्रतिशत चौराहों पर स्मार्ट मीटर लगे हैं। अगर इन चौराहों पर रिचार्ज न कराया जाए तो अपने आप लाइट कट जायेगी। हर महीने ढाई से तीन लाख रुपये बिजली बिल आता है।

अशोक कुमार का कहना था कि निजी कंपनी हर महीने बिल भरती है, अगस्त में भी भुगतान किया गया था। इस बार जो फाइल आई थी, उसमें सभी जिम्मेदारों के हस्ताक्षर हो गए थे। एक से दो दिन में बिल का भुगतान हो जायेगा।

वहीं, निजी कंपनी का कहना है कि स्मार्ट सिटी वाले हैंडओवर नहीं ले रहें हैं और भुगतान में समय लगाते हैं। ऐसे में कंपनी को बिल भरना पड़ता है। इस बार चार महीने से भुगतान नहीं किया गया है। कंपनी के पास पैसे नहीं है बिल चुकाने के।
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