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सीडीआरआई की न्युट्रास्युटिकल देगी प्रोस्टेट की समस्या में राहत

Sat, 28 Sep 2019 01:33 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 28 Sep 2019 01:33 AM IST
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to get rid of prostat cdri nutrasutical
सीडीआरआई की न्युट्रास्युटिकल देगी प्रोस्टेट की समस्या में राहत
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खाद्य पदार्थ की तरह उपयोग की जा सकती है न्युट्रास्युटिकल
चेन्नई की फार्मा कंपनी को दी गई तकनीक
50 साल से अधिक की उम्र में प्रमुख 10 बीमारियों में शामिल प्रोस्टेट बढ़ने की बीमारी बिनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लेसिया की दिक्कत को दूर करने केलिए सेंट्रल ड्रग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीडीआरआई) ने न्युट्रास्युटिकल का विकास किया है। चेन्नई की फार्मा कंपनी इस न्युट्रास्युटिकल को मार्केट में लाएगी।
इसके लिए तकनीक ट्रांसफर शुक्रवार को सीएसआईआर स्थापना दिवस कार्यक्रम के दौरान हुई। फार्मा कंपनी के प्रतिनिधियों और सीडीआरआई के निदेशक डॉ. तापस कुंडू की मौजूदगी में तकनीकी ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी की गई। डॉ. कुंडू का कहना है कि सीडीआरआई के वैज्ञानिकों की टीम ने बिनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लेसिया का विकास इसलिए किया है क्योंकि मौजूदा दवाएं फार्मास्युटिकल्स के रूप में मौजूद हैं। न्युट्रास्युटिकल खाद्य पदार्थ की तरह उपयोग की जा सकती है।
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80 साल से अधिक आयु वालों में से 90 फीसदी को समस्या
डॉ. कुंडू ने कहा कि प्रोस्टेट ग्रंथि के बढ़ने से पेशाब करने में दिक्कत होने लगती है। मरीज को बार बार पेशाब करने जाना पड़ता है। उसका मूत्र त्याग पर नियंत्रण भी नहीं रहता है। उम्र बढ़ने के साथ दिक्कत भी बढ़ने लगती है। 80 साल से अधिक आयु के लोगों में 90 प्रतिशत में इस बीमारी के लक्षण देखे गए हैं।
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मेधावी बच्चों व 25 साल की सेवा पूरी कर चुके कर्मियों का सम्मान
इस दौरान संस्थान की वार्षिक रिपोर्ट भी पेश की गई और सीडीआरआई की वार्षिक रिपोर्ट और न्यूज लेटर का विमोचन भी हुआ। वहीं, सीडीआरआई स्टाफ के मेधावी बच्चों में गरिमा सिंह, कृष्णा गुप्ता, श्रेया शुक्ला और आयुष शर्मा को पुरस्कृत किए गए। 25 साल पूरे कर चुके कर्मचारियों को भी उनकी सेवा के लिए सम्मानित किया गया।
कंप्यूटर की तरह दिमाग में भी सर्किट
सीएसआईआर दिवस में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च मुंबई की प्रो. शुभा टोले ने अपने व्याख्यान में बताया कि इंसान का ब्रेन भी कंप्यूटर की तरह है जिसके सर्किट बने हुए हैं। मस्तिष्क में बिछे संवेदनाओं के सर्किट हमें अपने आसपास की चीजों को जानने में मदद करते हैं।

इनको मिले सीडीआरआई अवॉर्ड
- आईआईएससी बंगलूरू से डॉ. अमित सिंह
- आईआईसीबी कोलकाता से डॉ. दीप्यमान गांगुली
- आईआईएसईआर पुणे के डॉ. एसजी श्रीवत्सन
- जेएनसीएएसआर बंगलूरू के डॉ. टी गोविंदराजू
आईआईटीआर में हर्बल उत्पादों पर सेमिनार
लखनऊ। शुक्रवार को भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान (आईआईटीआर) में भारत में हर्बल उत्पादों की सुरक्षा के लिए सुरक्षा एवं नियामक कार्य प्रणालियों से संबंधित मुद्दों पर सेमिनार का आयोजन किया गया। इसमें आईआईटीआर के निदेशक डॉ. आलोक धवन, बीएचयू के इंस्टीट्यूट ऑफ साइंसेज के निदेशक डॉ. अनिल कुमार त्रिपाठी ने फाइटोमेडिसिन, एरोमा मिशन की जानकारी दी।
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