फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   tiger and tigress become ill in itawa lion safari

लॉयन सफारी में शेर बीमार, शेरनी ने छोड़ा खाना

Wed, 13 Jan 2016 02:36 PM IST
Updated Wed, 13 Jan 2016 02:36 PM IST
विज्ञापन
tiger and tigress become ill in itawa lion safari

इटावा के लॉयन सफारी में अब शेरनी ‘जेसिका’ और शेर ‘पटौदी’ बीमार है। जेसिका ने सोमवार से कुछ नहीं खाया है। इसलिए उसे खाली पेट दवा देने में भी दिक्कत आ रही है। सात साल की ‘जेसिका’ और तीन साल के ‘पटौदी’ खून की जांच में बेबेसिया प्रोटोजोन का संक्रमण पाया गया है।

विज्ञापन


दोनों पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है। ब्रिटेन के लौंगलीट सफारी से भी मेडिकल सलाह ली गई है। ‘जेसिका’ और ‘पटौदी’ को 29 दिसंबर को शेरनी ‘तपस्या’ के साथ ही गुजरात के जूनागढ़ चिड़ियाघर से लाया गया। बीमार पड़ी तपस्या ने 9 जनवरी को दम तोड़ दिया था।
विज्ञापन


आईवीआरआई के वैज्ञानिकों ने ‘जेसिका’ और ‘पटौदी’ के ब्लड सैंपल की जांच की। रिपोर्ट के मुताबिक, इन दोनों को भी बैबेसिया नाम के ब्लड प्रोटोजोआ का संक्रमण पाया गया है। वन विभाग के सूत्रों के मुताबिक ‘जेसिका’ के बाड़े के आसपास तरह-तरह का मीट रखा गया है, मगर वह कोई रुचि नहीं दिखा रही।
विज्ञापन
विज्ञापन


खाना न खाने के चलते उसे पूरी दवा भी नहीं दे पा रहे हैं। बरेली के भारतीय पशु-चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के वैज्ञानिकों के सुझावों के आधार पर दोनों बब्बर शेरों का इलाज चल रहा है।

शेरों को गुजरात वापस भेजने का कोई इरादा नहीं

tiger and tigress become ill in itawa lion safari

पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय मथुरा के विशेषज्ञ और कानपुर प्राणि उद्यान के पशु चिकित्सक दोनों का इलाज कर रहे हैं। वन विभाग के कई अन्य अधिकारी भी लॉयन सफारी में मौजूद हैं।

प्रमुख सचिव वन संजीव सरन ने मौके पर जाकर इलाज की व्यवस्था देखी। उन्होंने माना कि ‘जेसिका’ ने दो दिन से कुछ नहीं खाया है। हालांकि उन्होंने कहा कि ‘पटौदी’ की हालत थोड़ी बेहतर है। कहा कि लॉयन सफारी में लाए गए किसी भी शेर को गुजरात वापस भेजने की कोई योजना नहीं है।

वन्य प्राणि उद्यान, दिल्ली के सेवानिवृत्त निदेशक और वन्य जीव विशेषज्ञ डॉ. बीएम अरोरा ने बताया कि बेबेसिया प्रोटोजोआ चिचड़ी (एक तरह के जूं) से फैलता है। इसे रक्त मंह ज्वर भी कहते हैं।

1904 में सबसे पहले यह शिकायत गीदड़ में रिपोर्ट हुई थी। उन्होंने बताया कि वन्य जीव को तेज बुखार, पीलिया और भूख न लगना इस संक्रमण के लक्षण हैं। समय से बीमारी का पता चलने पर शत-प्रतिशत इलाज संभव है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed