इतिहासकार डॉ. योगेश प्रवीन सहित लखनऊ की तीन विभूतियों को मिला पद्मश्री सम्मान, शहर का बढ़ा मान
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शहर के इतिहास को लोगों तक पहुंचाने वाले इतिहासकार डॉ. योगेश प्रवीन, लंबे समय तक लखनऊ में रहकर प्रदेश की संस्कृति और सांस्कृतिक आयोजनों को शृंखला देने वाले पूर्व प्रशासनिक अधिकारी डीपी सिन्हा और लखनऊ में रहकर शूटिंग में शहर का नाम रोशन करने वाले जीतू राई को पद्मश्री सम्मान से नवाजा जाएगा। शहर का मान बढ़ाने वाली इन विभूतियों को मिले सम्मान ने शहर का मान बढ़ाया है।
लखनवी इतिहास के पर्याय योगेश प्रवीन
आज के समय में लखनऊ के इतिहास को जानने-समझने का सबसे बड़ा माध्यम बन चुके इतिहासकार योगेश प्रवीन की नजरों में पद्म पुरस्कार मिलना उनके लिये देर से ही सही मगर बहुत खुशी की बात है। उन्होंने कहा कि अक्सर इंसान को सब कुछ समय पर नहीं मिलता। सूची में नाम होने की सबसे पहली सूचना ‘अमर उजाला’ से पाकर भावुक हुए इतिहासकार का कहना है कि अब सुकून से अगली यात्रा पर चल सकूंगा।
लखनऊ और अवध पर अब तक ढेरों किताबें लिख चुके योगेश प्रवीन ने कहा कि पुरस्कार तो इसके पहले भी तमाम मिले, पर पद्मश्री सम्मान एक गौरव की बात है। लखनऊ के लिए गर्व की बात है। सिग्नेचर शेर ‘लखनऊ है तो महज गुंबद-ओ-मीनार नहीं, सिर्फ एक शहर नहीं, कूचा-ए-बाजार नहीं, इसके आंचल में मुहब्बत के फूल खिलते हैं, इसकी गलियों में फरिश्तों के पते मिलते हैं...’ से कहा कि इस शहर से मेरी मोहब्बत किसी से छुपी नहीं है।
'मेरा कोई भी काम, शोध सिर्फ लखनऊ के लिए ही होता है'
उन्होंने कहा कि मेरा कोई भी काम, शोध सिर्फ लखनऊ के लिए ही होता है। कहानी, उपन्यास, नाटक, कविता समेत तमाम विधाओं में लिखने वाले डॉ. योगेश प्रवीन विद्यांत हिन्दू डिग्री कॉलेज से बतौर प्रवक्ता वर्ष 2002 में सेवानिवृत्त हुए। पिछले चार दशक से पुस्तक लेखन के अलावा समाचार पत्र-पत्रिकाओं में लेखन किया।
अवध और लखनऊ का इतिहास खंगालती कई महत्वपूर्ण किताबों के लिए उन्हें कई पुरस्कार व सम्मान भी मिल चुके हैं। उनकी अब तक 30 से अधिक किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जो अवध की संस्कृति और लखनऊ की सांस्कृतिक विरासत पर आधारित हैं।
रामकथा महाकाव्य अपराजिता, उर्दू में कृष्ण पर आधारित विरह बांसुरी के अलावा दास्ताने अवध, ताजेदार अवध, गुलिस्ताने अवध, लखनऊ मॉन्युमेंट्स, लक्ष्मणपुर की आत्मकथा, हिस्ट्री ऑफ लखनऊ कैंट, पत्थर के स्वप्न, अंक विलास, लखनऊनामा, दास्ताने लखनऊ, लखनऊ के मोहल्ले और उन की शान, किताबों के माध्यम से गुजरे लखनऊ के नजारों से रूबरू किताबें खासी चर्चित हैं।
मंच पर बातचीत में छोटी सी छोटी चीज को भी बड़ी औकात का दर्जा देना लखनऊ का मिजाज है, यहां लखौरियों से महल बन जाता है। कच्चे सूत का कमाल है चिकन, जादू सरसों पे पढ़े जाते हैं तरबूज पर नहीं.. बोलते सुनाई देने वाले योगेश प्रवीन को पद्म अवार्ड दिए जाने पर उनके प्रशंसकों की बधाइयां देर रात तक नहीं रुकीं।
डीपी सिन्हा ने दी संस्कृति को पहचान
लंबे समय तक प्रदेश में सांस्कृतिक गतिविधियों के कई जिम्मेदार पदों पर रहकर एक खुशनुमा सूरत देने वाले पूर्व प्रशासनिक अधिकारी डीपी सिन्हा (रिटा. आईएएस) ने पद्मश्री मिलने पर कहा कि ये सम्मान उनकी कला-साधना का सम्मान है। लंबे समय से नोएडा में रह रहे डीपी सिन्हा कई सांस्कृतिक संस्थाओं के प्रशासक रहे।
वे उप्र संगीत नाटक अकादमी के अध्यक्ष, उप्र ललित कला अकादमी के अध्यक्ष, निदेशक सांस्कृतिक कार्य उप्र लखनऊ, निदेशक उप्र हिंदी संस्थान, निदेशक उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र इलाहाबाद, वाइस प्रेसिडेंट आईसीसीआर दिल्ली समेत 13 संस्थानों के शीर्ष पदों पर रहे। राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह को कलाकारों का हब बनाने में उनकी मेहनत रही।
प्रदेश में आज भी सांस्कृतिक गतिविधियों को शृंखला का रूप देने का श्रेय उन्हीं को जाता है। कई प्रकाशित नाटक, नाटकों का दूसरी भाषाओं में अनुवाद, नाटकों की समीक्षा के अलावा पुस्तकें लिखीं।
पिछले पांच-छह दशकों से संस्कृति क्षेत्र में सक्रिय रहे डीपी सिन्हा को संगीत नाटक अकादमी नई दिल्ली से अकादमी अवार्ड, हिंदी संस्थान का लोहिया साहित्य सम्मान, साहित्य भूषण सम्मान, उप्र संगीत नाटक अकादमी लखनऊ का अकादमी अवार्ड, हिंदी अकादमी दिल्ली का साहित्य सम्मान, संस्कार भारती दिल्ली का विष्णु श्रीधर वाकंकण पुरस्कार समेत दर्जनों नामचीन पुरस्कार मिल चुके हैं।
एक बार फिर करूंगा वापसी : जीतू राई
‘बीता साल मेरे कॅरिअर के लिहाज से बेहद खराब रहा। कुछ भी मेरे पक्ष में नहीं गया। बता नहीं सकता क्या कारण था, लेकिन इस साल ऐसा नहीं होने वाला। मेरा पहला लक्ष्य फार्म वापसी होगी, ताकि एक बार फिर अपने कॅरिअर को शीर्ष पर पहुंचा सकूं। इस कड़ी में पद्मश्री अवॉर्ड प्रेरणा का काम करेगा और मेरा कॅरिअर एक बार फिर बुलंदियों पर पहुंचेगा।’
यह कहना है स्टार शूटर जीतू राई का, जिन्होंने पद्मश्री अवार्ड मिलने के बाद कुछ इस तरह अपनी प्रतिक्रिया दी। अमर उजाला से फोन पर हुई बातचीत में स्टार निशानेबाज ने कहा कि टोक्यो ओलंपिक के लिए प्रत्येक इवेंट में देश को दो कोटे मिलते हैं। सौरभ चौधरी और अभिषेक वर्मा पहले ही 10 मीटर एयर पिस्टल में ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर चुके हैं। ऐसे में उनकी संभावना ज्यादा है, लेकिन मैं अप्रैल-मई तक इंतजार करूंगा और अपने प्रदर्शन में सुधार लाने का प्रयास करूंगा। हो सकता है कि मुझे टोक्यो में भाग लेने का मौका मिल जाए।
वर्तमान में मणिपुर 5/11 जीआर यूनिट से जुडे़ सूबेदार जीतू राई ने कहा कि लखनऊ में बिताए दिन आज भी मुझे याद हैं, जब कोच जीआर राई ने मेरी प्रतिभा को पहचाना और निशानेबाजी में हाथ आजमाने को बोला और परिणाम आज सबके सामने है। आज भी समय मिलते ही लखनऊ में गोरखा रेजीमेंटल जाकर कोच सर और पुराने साथियों से मिलता हूं।
प्रदर्शन पर एक नजर
- 2014 ग्रेनाडा (स्पेन) वर्ल्ड चैंपियनशिप की 50 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा का रजत।
- 2014 इच्योन एशियन गेम्स की 50 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा का स्वर्ण।
- 2014 ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स की 50 एयर पिस्टल स्पर्धा का स्वर्ण।
- 2018 गोल्डकोस्ट कॉमनवेल्थ गेम्स की 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा का स्वर्ण।