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रायबरेली में संक्रामक रोगों का कहर : एईएस से चार मासूमों समेत पांच की मौत
Sat, 14 Sep 2019 09:30 PM IST
Amulya Rastogi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायबरेली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायबरेली
Published by: Amulya Rastogi
Updated Sat, 14 Sep 2019 09:30 PM IST
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भर्ती बच्चे
- फोटो : amar ujala
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एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम (एईएस) का कहर जिले में बढ़ता जा रहा है। इसकी चपेट में आने से तीन मासूमों ने पिछले 24 घंटे में दम तोड़ दिया। इसके अलावा बुखार से नवजात व डायरिया की चपेट में आने से वृद्ध की मौत हो गई।
इसमें चार मौतें जिला अस्पताल में और एक मौत डलमऊ सीएचसी में इलाज के दौरान हुई। लगातार मौतों के बाद भी स्वास्थ्य विभाग बच्चों व अन्य लोगों को संक्रामक रोगों से बचाने में नाकाम है। अधूरी व लापरवाह तैयारियों के कारण ही कहर थमने का नाम ही नहीं ले रहा है।
मौसम में बदलाव के साथ ही संक्रामक रोगों का कहर बढ़ गया है। जिले के सगरा गांव के दिनेश कुमार ने आठ माह की बच्ची दीपांशी को एईएस की चपेट में आने के बाद जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में भर्ती कराया था। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
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इसके अलावा फुरसतगंज थाना क्षेत्र के पूरे धर्मशाह निवासी बबलू ने अपने आठ साल के बेटे को एईएस की चपेट में आने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। उसने भी इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। फुरसतगंज क्षेत्र के ही पूरे बैसन गांव की गुड़िया के नवजात की भी इलाज के दौरान जिला अस्पताल में मौत हो गई। प्रतापगढ़ जिले के पेंडारी उदयपुर निवासी मो. अली (70) की डायरिया की चपेट में आने के बाद जिला अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई।
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इसमें चार मौतें जिला अस्पताल में और एक मौत डलमऊ सीएचसी में इलाज के दौरान हुई। लगातार मौतों के बाद भी स्वास्थ्य विभाग बच्चों व अन्य लोगों को संक्रामक रोगों से बचाने में नाकाम है। अधूरी व लापरवाह तैयारियों के कारण ही कहर थमने का नाम ही नहीं ले रहा है।
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मौसम में बदलाव के साथ ही संक्रामक रोगों का कहर बढ़ गया है। जिले के सगरा गांव के दिनेश कुमार ने आठ माह की बच्ची दीपांशी को एईएस की चपेट में आने के बाद जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में भर्ती कराया था। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
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इसके अलावा फुरसतगंज थाना क्षेत्र के पूरे धर्मशाह निवासी बबलू ने अपने आठ साल के बेटे को एईएस की चपेट में आने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। उसने भी इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। फुरसतगंज क्षेत्र के ही पूरे बैसन गांव की गुड़िया के नवजात की भी इलाज के दौरान जिला अस्पताल में मौत हो गई। प्रतापगढ़ जिले के पेंडारी उदयपुर निवासी मो. अली (70) की डायरिया की चपेट में आने के बाद जिला अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई।
डलमऊ प्रतिनिधि के अनुसार, उल्टी-दस्त की चपेट में आने के बाद एक मासूम बालिका की सीएचसी में तड़प-तड़प कर मौत हो गई। क्षेत्र के पूरे नान्ही मजरे करकसा निवासी संतोष कुमार की डेढ़ माह की पुत्री नेहा बीते दो दिनों से उल्टी दस्त की चपेट में थी।
उसका इलाज झोलाछाप कर रहे थे, लेकिन जब मासूम बालिका की हालत नाजुक होने लगी तो परिजन उसे शुक्रवार को सीएचसी ले आए। प्राथमिक उपचार करने के बाद बच्ची को घर भेज दिया गया। शनिवार की दोपहर सीएचसी लाया गया। हालत ज्यादा खराब होने पर बच्ची को जिला अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन बच्ची ने दम तोड़ दिया।
जिला अस्पताल के सभी बेड फुल
संक्रामक रोगों के बढ़ने के बाद जिला अस्पताल के सभी बेड फुल हो गए हैं। सीएमएस डॉ. एनके श्रीवास्तव ने बताया कि अस्पताल में दवाओं की कमी नहीं है। जो भी रोगी भर्ती हो रहे हैं, उसका पूरा ख्याल रखा जाता है। सारी दवाएं अस्पताल से ही दी जा रही है। मौसम खराब होने के कारण संक्रामक रोगी बढ़ गए हैं। ओपीडी में भी रोगियों की संख्या बढ़ गई है।
उसका इलाज झोलाछाप कर रहे थे, लेकिन जब मासूम बालिका की हालत नाजुक होने लगी तो परिजन उसे शुक्रवार को सीएचसी ले आए। प्राथमिक उपचार करने के बाद बच्ची को घर भेज दिया गया। शनिवार की दोपहर सीएचसी लाया गया। हालत ज्यादा खराब होने पर बच्ची को जिला अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन बच्ची ने दम तोड़ दिया।
जिला अस्पताल के सभी बेड फुल
संक्रामक रोगों के बढ़ने के बाद जिला अस्पताल के सभी बेड फुल हो गए हैं। सीएमएस डॉ. एनके श्रीवास्तव ने बताया कि अस्पताल में दवाओं की कमी नहीं है। जो भी रोगी भर्ती हो रहे हैं, उसका पूरा ख्याल रखा जाता है। सारी दवाएं अस्पताल से ही दी जा रही है। मौसम खराब होने के कारण संक्रामक रोगी बढ़ गए हैं। ओपीडी में भी रोगियों की संख्या बढ़ गई है।