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दो साल में तीन करोड़ से अधिक लोगों ने की मेट्रो की सवारी, कोरोना काल में छह माह तक सेवा बंद रहने के बाद इसे उपलब्धि मान रहा यूपीएमआरसी

Mon, 08 Mar 2021 01:58 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 08 Mar 2021 01:58 AM IST
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Three crore people travel in lucknow metro
लखनऊ मेट्रो के रेडलाइन पर एयरपोर्ट से मुंशीपुलिया के बीच कॉमर्शियल रन शुरू होने की यूपीएमआरसी आठ मार्च को दूसरी सालगिरह मना रहा है। दो साल में मेट्रो सेवाओं का उपयोग तीन करोड़ से अधिक यात्रियों ने किया। कोरोना की वजह से करीब छह महीने तक मेट्रो सेवा बंद रहने के बाद भी इस राइडरशिप को मेट्रो अपनी सफलता मान रहा है। कॉमर्शियल रन के दो साल पूरा होने के बाद अब ब्ल्यू लाइन पर चारबाग से बसंतकुंज के बीच काम शुरू होने का इंतजार है।
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दो साल के बीच मेट्रो का संचालन शहर में चुनौतियां भरा रहा है। चाइनीज मांझा का उपयोग कर जहां ट्रेनों के संचालन पर ब्रेक लगते रहे। वहीं सबसे बड़ी मुश्किल कोरोना वायरस ने खड़ी की। इसकी वजह से मेट्रो अभी भी कोविड पूर्व की अपनी राइडरशिप का करीब 70 प्रतिशत ही मेट्रो वापस पा सकी है। लेकिन, इस दौरान यूपीएमआरसी ने पब्लिक ट्रांसपोर्ट होने के बाद भी कोरोना से बचाव के लिए अपने प्रयासों से एक मॉडल व्यवस्था लागू कर दूसरे संस्थाओं के लिए मिसाल खड़ी की। इसके बाद दूसरे पब्लिक पहुंच वाले विभागों को भी अपने यहां इंतजामों को बेहतर बनाने पर काम करना पड़ा। यही वजह रही कि लखनऊ मेट्रो देश में सबसे अधिक तेजी से अपनी राइडरशिप वापस पाने का रिकॉर्ड भी बनाने में सफल रही है।
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मेट्रो के एमडी कुमार केशव का कहना है कि रेडलाइन का काम अपने तयशुदा समय से पहले ही केवल साढ़े चार साल में पूरा करने में सफलता मिली। प्राथमिकता सेक्शन पर ट्रेन चलने के तीन साल के अंदर पूरे रूट पर कॉमर्शियल रन शुरू कर रिकॉर्ड बनाया गया। सबसे अहम यह है कि महिलाओं और विशेष यात्रियों की सुरक्षा और सुविधाओं का ध्यान रखते हुए मेट्रो रोजाना करीब 343 फेरे रेडलाइन पर लगाकर अपनी सेवाएं दे रही है।
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59 सेकंड से अधिक देरी, तो लेट
मेट्रो ने अपनी सेवाओं को समयबद्ध करने के लिए एक नियम बना रखा है। एमडी कुमार केशव के मुताबिक अगर मेट्रो सेवा अपने समय से 59 सेकंड से अधिक पीछे हो तो उसे देरी से माना जाना है। इससे संचालन से जुड़े स्टाफ की जिम्मेदारी तय होती है। यही वजह है कि लखनऊ मेट्रो ने अपनी सेवा के दौरान 99.99 फीसदी की दर से यात्रियों को समयबद्ध सेवा दी है। लखनऊ मेट्रो द्वारा यह उपलब्धि ऑटोमेटिक ट्रेन सुपरविजन (एटीएस) तकनीक के माध्यम से हासिल की जा सकी है। यह संचार आधारित ट्रेन नियंत्रण प्रणाली या कम्यूनिकेशन बेस्ड ट्रेन कंट्रोल सिस्टम (सीबीटीसी) का महत्वपूर्ण हिस्सा है जिसकी वजह से एक भी हादसा नहीं हुआ।
लगातार जीते अवार्ड
- लखनऊ मेट्रो को रेल इंफ्रा और मोबिलिटी बिजनेस डिजिटल अवार्ड्स, 2020 में वर्ष का ‘ग्रीन मोबिलिटी प्रोजेक्ट अवार्ड
- 12वें अर्बन मोबिलिटी इंडिया कांफ्रेंस, 2019 में ‘बेस्ट मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम‘ का पुरस्कार
- ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई), ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा ‘राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार, 2019
- इंटरनेशनल ‘रॉयल सोसाइटी फॉर द प्रिवेंशन ऑफ एक्सीडेंट्स (रोस्पा)‘ गोल्ड अवार्ड, 2019
- उत्कृष्ट ठोस संरचना के लिए आईसीआई (लखनऊ) अल्ट्राटेक पुरस्कार, 2019
- टेक्नोलॉजी सभा अवॉर्ड, 2019
- रेल एनालिसिस इनोवेशन एवं एक्सीलेंस समिट, 2019 में ‘भारत में मेट्रो परियोजनाओं के लिए हरित समाधान‘ अपनाने के लिए पुरस्कृत
- ब्रिटिश सेफ्टी काउंसिल द्वारा बुनियादी ढांचा परियोजना श्रेणी में ‘इंटरनेशनल सेफ्टी अवॉर्ड, 2019‘ पुरस्कार
- रेडलाइन के सभी 21 मेट्रो स्टेशनों के लिए इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल (आईजीबीसी) ग्रीन एमआरटीएस प्लेटिनम रेटिंग
- आईएसओ 9001:2015, आईएसओ 14001:2015, ओएचएसएएस 18001:2007 प्रमाणित संगठन
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