गेट पर झूल रहे बच्चों पर भर-भराकर गिरा छज्जा, मलबा हटाया तो निकली तीन की लाशें
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सुल्तानपुर शहर से सटे खेतहरा गांव में तीन मासूम बच्चों की गेट का छज्जा गिरने से मौत हो गई। बच्चे स्कूल से आने के बाद दरवाजे पर लगे लोहे का गेट पकड़कर झूल रहे थे, तभी यह हादसा हो गया। बच्चों की मौत की सूचना ग्रामीणों ने पुलिस को दी। बावजूद इसके दो घंटे तक एक भी पुलिस कर्मी घटना स्थल पर नहीं पहुंचा। गांव में हुई एक साथ तीन बच्चों की मौत से मातम पसरा है।
कोतवाली नगर क्षेत्र के खेतहरा गांव निवासी अच्छेलाल निषाद का मकान है। मकान के बाहर स्थित मुख्य गेट पर छोटेलाल निषाद ने लोहे का गेट लगवाया है। गेट के ठीक ऊपर एक सीमेंट का छज्जा छांव के लिए लगवाया था। छोटेलाल की पुत्री अंशू (9) और पड़ोसी बंशीलाल निषाद की पुत्री महिमा (10) ढकवा गांव में स्थित प्राथमिक विद्यालय में कक्षा चार की छात्राएं थीं जबकि छोटेलाल निषाद के घर के सामने स्थित नीरज कुमार गौढ़ का बेटा युवराज (10) खैंचिला में स्थित कमला देवी विद्यालय में कक्षा पांच में पढ़ता था।
तीनों बच्चे सोमवार की सुबह अपने-अपने विद्यालय गए थे। दोपहर बाद छुट्टी हुई तो तीनों बच्चे स्कूल से घर पहुंचे और बस्ता घर में फेंक कर छोटेलाल निषाद के मुख्य गेट के सामने खेलने लगे। तीनों बच्चे लोहे के गेट पर झूल रहे थे तभी अचानक छज्जा भर-भराकर तीनों बच्चों पर गिर पड़ा। तेज आवाज होते ही घर में मौजूद लोग और आस-पास के लोग दौड़कर वहां पहुंचे और आनन-फानन में मलबा हटाकर बच्चों को बाहर निकाला, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
मां का रो-रोकर बुरा हाल
खेतहरा गांव निवासी नीरज कुमार गौड़ के परिवार में पत्नी रंजना देवी के साथ ही बड़ा बेटा युवराज और छोटा बेटा शिवराज हैं। युवराज की मौत से मां रंजना देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं, पिता को अब भी बेटे की मौत पर यकीन नहीं हो रहा है।
...अच्छा होता कि भगवान मुझे उठा लेता
अच्छेलाल निषाद के परिवार में पत्नी पुष्पा देवी के साथ ही दो बेटी और दो बेटे हैं। अच्छेलाल मजदूरी करते हैं। बेटा सुभाष (15), लवकुश (12) के बाद बेटी अंशू (9) वर्ष की थी, जबकि दुर्गावती (10) हैं। अंशू की मौत पर दादी श्रीमती के मुंह से बार-बार यहीं निकल रहा था कि इससे अच्छा होता कि भगवान मुझे उठा लेता। अच्छेलाल घर पहुंचने वाले हर किसी के सामने हाथ जोड़कर बस यहीं कहते दिखे कि हे भगवान यह क्या हो गया।