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‘साइबर योद्धाओं’ के लिए भी चुनौती बना 22 विधायकों को धमकी देने वाला, जांच एजेंसियां परेशान

Fri, 25 May 2018 09:07 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 25 May 2018 09:07 AM IST
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threat to MLA's becomes a challenge for investigative agencies.
अब तक 22 विधायकों को दी जा चुकी है धमकी। - फोटो : amar ujala

यूपी के 22 विधायकों को धमकी देने के मामले में अभी तक एक नंबर को पता कर पाना सुरक्षा एजेंसियों के लिए मुश्किल हो रहा था, अब हैकर अलग-अलग नंबरों से विधायकों को मैसेज भेज सुरक्षा एजेंसियों को छका रहा है। प्रदेश के साथ ही चार अन्य राज्यों के ‘साइबर योद्धाओं’ के लिए भी ये नंबर चुनौती साबित हो रहे हैं।

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डीजीपी ने एडवाइजरी जारी की है कि किसी को घबराने की जरूरत नहीं है। वहीं एडीजी कानून व्यवस्था आनंद कुमार भी लोगों से अपील कर रहे हैं कि यह सिर्फ एक शरारत है। केंद्रीय एजेंसियों की मदद से शरारत करने वाले की तलाश की जा रही है।
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आनंद कुमार का कहना है कि जो भी है वह पूरी तरह से साइबर का जानकार है और अपनी आईपी व नंबर को बार-बार बदलकर मेसेज कर रहा है। यह काम किसी हैकर का भी हो सकता है। उत्तर प्रदेश के अलावा दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड पुलिस भी इस तरह के मेसेज से परेशान है और उनके एक्सपर्ट भी हैकर की तलाश कर रहे हैं।
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शुरुआती जांच में जो तथ्य सामने आए उसके मुताबिक अमेरिका के जिस नंबर का इस्तेमाल किया गया वह वर्चुअल नंबर है। ऐसे नंबर इंटर नेट पर 2 डालर से 10 डॉलर की कीमत में उपलब्ध कराए जाते हैं। वर्चुअल नंबर प्रोवाइडर की संख्या हजारों में है इसलिए प्रोवाइडर तक पहुंचना भी एजेंसियों के लिए मुश्किल हो रहा है।

पाकिस्तान से वास्तविक आईपी और उसका ईमेल एड्रेस मिलना मुश्किल

threat to MLA's becomes a challenge for investigative agencies.
एडीजी लॉ एंड ऑर्डर आनंद कुमार - फोटो : amar ujala

यूपी पुलिस ने व्हाट्स एप से भी सूचनाएं मांगी थी। व्हाट्स एप की ओर से बताया गया कि इस्तेमाल किया गया नंबर अमेरिका के टेक्सास प्रांत का है और जो प्रॉक्सी आईपी प्रोवाइडर है वह पाकिस्तान का है। ऐसे में पाकिस्तान से वास्तविक आईपी और उसका ईमेल एड्रेस मिलना मुश्किल हो रहा है।

आईपीसीसी को करना होगा हस्तक्षेप
प्रदेश पुलिस में साइबर के एक्सपर्ट एक अधिकारी ने बताया कि इस मामले में प्रदेश पुलिस को सीबीआई में स्थापित ‘इंटरनेशनल पुलिस कोऑपरेशन सेल’ (आईपीसीसी) को हस्तक्षेप करना होगा। यह इंटरपोल की विंग है। यह अन्य देशों में वर्चुअल नंबर सर्विस प्रोवाइडर और आईपी प्रोवाइडर से सूचनाएं अपने स्तर से हासिल कर सकती है।

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