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Lucknow News: जिम्मेदारों की नींद टूटी, 20 साल बाद स्कूल में पहुंची बिजली
Sun, 31 Aug 2025 02:46 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Sun, 31 Aug 2025 02:46 AM IST
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उच्च प्राथमिक विद्यालय घैला में लगा ट्रंसफार्मर। स्रोत ः जागरुक पाठक
लखनऊ। राजधानी के नगर क्षेत्र में स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय घैला में आखिरकार 20 साल बाद उजाला हो गया। 2005 में बने इस विद्यालय में अब तक बिजली नहीं थी, और छात्र-छात्राएं अंधेरे में पढ़ाई करने को मजबूर थे। बुधवार के अंक में अमर उजाला ने ''20 साल बाद भी उच्च प्राथमिक विद्यालय घैला में अंधेरा'' शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। खबर का असर यह हुआ कि अधिकारियों ने तुरंत संज्ञान लेते हुए 48 घंटे के भीतर विद्यालय में ट्रांसफार्मर लगवा दिया।
अब विद्यालय को बिजली विभाग का निर्धारित शुल्क जमा करना होगा, जिसके बाद कनेक्शन चालू हो जाएगा। विद्यालय में बिजली पहुंचने पर प्रधानाचार्य उमा सिंह, शिक्षकों और बच्चों ने अमर उजाला को धन्यवाद दिया। प्रधानाचार्य ने कहा कि जिस काम को हम पिछले 10 सालों में नहीं करवा पाए, वह अमर उजाला की खबर से महज दो दिनों में हो गया। बिजली पहुंचने पर बच्चों के चेहरे खिल उठे। उन्होंने कहा कि अब वे स्मार्ट बोर्ड पर पढ़ाई कर सकेंगे और चिलचिलाती गर्मी में पंखों की हवा का आनंद ले पाएंगे।
बिजली तो मिली, पर बाउंड्रीवाॅल का इंतजार
हालांकि विद्यालय में बिजली आ गई है, लेकिन चारदीवारी न होने से शिक्षक और बच्चे अभी भी चिंतित हैं। चारों ओर खेतों और जंगलों से घिरे इस विद्यालय में अक्सर विषैले और जंगली जानवर कक्षाओं में घुस जाते हैं, जिससे बच्चों की सुरक्षा खतरे में रहती है। शाम होते ही विद्यालय में अराजक तत्व भी प्रवेश कर जाते हैं और उत्पात मचाते हैं। प्रधानाचार्य उमा सिंह ने बताया कि वह उच्चाधिकारियों से बाउंड्रीवाॅल बनवाने की मांग कर रही हैं। उनका कहना है कि अगर चारदीवारी बन जाए, तो विद्यालय पूरी तरह सुरक्षित हो जाएगा।
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अब विद्यालय को बिजली विभाग का निर्धारित शुल्क जमा करना होगा, जिसके बाद कनेक्शन चालू हो जाएगा। विद्यालय में बिजली पहुंचने पर प्रधानाचार्य उमा सिंह, शिक्षकों और बच्चों ने अमर उजाला को धन्यवाद दिया। प्रधानाचार्य ने कहा कि जिस काम को हम पिछले 10 सालों में नहीं करवा पाए, वह अमर उजाला की खबर से महज दो दिनों में हो गया। बिजली पहुंचने पर बच्चों के चेहरे खिल उठे। उन्होंने कहा कि अब वे स्मार्ट बोर्ड पर पढ़ाई कर सकेंगे और चिलचिलाती गर्मी में पंखों की हवा का आनंद ले पाएंगे।
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बिजली तो मिली, पर बाउंड्रीवाॅल का इंतजार
हालांकि विद्यालय में बिजली आ गई है, लेकिन चारदीवारी न होने से शिक्षक और बच्चे अभी भी चिंतित हैं। चारों ओर खेतों और जंगलों से घिरे इस विद्यालय में अक्सर विषैले और जंगली जानवर कक्षाओं में घुस जाते हैं, जिससे बच्चों की सुरक्षा खतरे में रहती है। शाम होते ही विद्यालय में अराजक तत्व भी प्रवेश कर जाते हैं और उत्पात मचाते हैं। प्रधानाचार्य उमा सिंह ने बताया कि वह उच्चाधिकारियों से बाउंड्रीवाॅल बनवाने की मांग कर रही हैं। उनका कहना है कि अगर चारदीवारी बन जाए, तो विद्यालय पूरी तरह सुरक्षित हो जाएगा।
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