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अखिलेश के राज में किसानों के साथ नाइंसाफी
राजेन्द्र सिंह/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Thu, 20 Feb 2014 09:26 AM IST
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भले ही अखिलेश सरकार यह कहती हो कि उनके प्रदेश में गन्ना किसानों के साथ कोई नाइंसाफी नहीं हो रही है लेकिन असलियत कुछ और है।
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गन्ना किसान चीनी मिलों को गन्ना बेचने के बावजूद भी भुगतान को तरस रहे हैं। चालू सीजन में किसानों ने प्रदेश की 119 चीनी मिलों को अब तक 11532.20 करोड़ रुपये मूल्य का गन्ना दिया।
लेकिन उन्हें भुगतान मिला है सिर्फ 3096.82 करोड़। यानी केवल 26.85 फीसदी। प्रति क्विंटल बीस रुपये जो बाद में दिए जाने हैं उस हिसाब से भी देखें तो किसानों का 71.84 फीसदी गन्ना मूल्य बकाया है।
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प्रदेश की सबसे बड़ी कैश क्रॉप गन्ने के किसान परेशानी से तो पिछले साल से ही हैं। पिछले साल के गन्ना मूल्य का अभी तक पूरा भुगतान नहीं हो पाया है। चालू सीजन में स्थिति में और विकट होती जा रही है।
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पहले चीनी मिलें देरी से चलने से कारण गेहूं की बोवाई पिछड़ गई। मिलें चलीं तो भुगतान अटक गया। करीब डेढ़ माह से चालू पेराई सत्र में गन्ना मूल्य बकाया हर रोज बढ़ता जा रहा है।
दो किस्तों में गन्ना मूल्य अदा करने की सुविधा देते वक्त मुख्य सचिव जावेद उस्मानी ने दावा किया था कि चीनी मिलें 260 रुपये प्रति क्विंटल की दर से तत्काल भुगतान करेंगी।
शेष 20 रुपये क्विंटल का भुगतान पेराई सीजन के अंत में कर दिया जाएगा। उनका दावा सीजन शुरू होने के साथ ही ढेर हो गया।
260 रुपये क्विटंल की दर से देखें तो किसानों ने चीनी मिलों को 10996 करोड़ का गन्ना आपूर्ति किया है। इसके विपरीत उन्हें भुगतान मिला है मात्र 3096 करोड़।
नियमानुसार गन्ना विभाग 14 दिन पहले खरीदे गए गन्ने का मूल्य ही देय मानता है। 14 दिन पहले तक किसान 8683.13 करोड़ रुपये मूल्य का गन्ना चीनी मिलों को दे चुकेथे।
यह भुगतान 35.66 प्रतिशत बैठता है। इसमें निजी चीनी क्षेत्र की 95 मिलों ने 32.46 फीसदी, 23 सहकारी मिलों ने 60.31 प्रतिशत और चीनी निगम की एकमात्र मिल ने 74.30 फीसदी गन्ना मूल्य भुगतान किया है।
सरकार नहीं चेती तो बिगड़ेंगे हालात
गन्ना सहकारी समिति के पूर्व चेयरमैन डॉ. अरविंद कुमार सिंह और संपूर्णानगर गन्ना समिति लखीमपुर खीरी के अध्यक्ष विजय कुमार मिश्र और सहकारी गन्ना समिति देवबंद के डायरेक्टर सुशील चौधरी कहते हैं कि गन्ना किसान बेहद नाजुक स्थिति में है।
बच्चों की पढ़ाई से शादी-ब्याह तक के काम रुक रहे हैं। अभी तक गन्ना किसानों को लेकर सरकार का रुख गंभीर नहीं दिखा। सरकार नहीं चेती तो आने वाले समय में हालात विस्फोटक होने से नहीं रोकेजा सकेंगे।
हालात यह है कि किसानों को कर्ज चुकाने के लिए कर्ज लेना पड़ रहा है। शायद ही कोई किसान हो जो कर्ज से बोझ से न दबा हुआ हो।
सरकार किसानों की या पूंजीपतियों की
अदालत में गन्ना मूल्य की लड़ाई लड़ने वाले राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के संयोजक वीएम सिंह का कहना है कि गन्ना मूल्य न मिलने पर किसान आत्महत्याएं कर रहे हैं।
राष्ट्रपति से इच्छा मृत्यु मांग रहे हैं। सरकार किसानों के हक में होने वाले कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं करा रही। सरकार को खुद चिंतन करना चाहिए कि वह किसानों की है या पूंजीपतियों की।
प्राथमिकता से भुगतान के निर्देश
प्रमुख सचिव चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास राहुल भटनागर का कहना है कि किसानों को चालू सीजन में 36 प्रतिशत गन्ना मूल्य का भुगतान कर दिया गया है।
पिछले पेराई सत्र का 97.80 फीसदी गन्ना मूल्य किसानों को दे दिया गया है। पिछले साल का केवल 455 करोड़ बकाया है।
उन्होंने सभी चीनी मिलों को निर्देश दिए हैं कि किसानों को बकाया गन्ना मूल्य का प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र भुगतान किया जाए।