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Flash Back: इंदिरा के उतरते ही रायबरेली वीआईपी हो गई, आखिर क्यों उन्होंने यहां से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया
Tue, 19 Mar 2024 04:14 PM IST
ishwar ashish
इंदिरा गांधी के उतरते ही रायबरेली वीआईपी हो गई, आखिर क्यों उन्होंने यहां से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया
इंदिरा गांधी के उतरते ही रायबरेली वीआईपी हो गई, आखिर क्यों उन्होंने यहां से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया
Published by: ishwar ashish
Updated Tue, 19 Mar 2024 04:14 PM IST
सार
आखिर कैसे रायबरेली सीट वीआईपी सीट हो गई। कांग्रेस की बागडोर संभालने के बाद जब इंदिरा ऊहापोह में थीं तो उनके करीबी पीएन हक्सर ने उनकी मदद की।
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पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी।
- फोटो : facebook
विस्तार
पहले आम चुनाव में फिरोज गांधी जब रायबरेली से मैदान में उतरे तब इस सीट की न पहचान थी और न ही विशेष कद। इसका वाजिब कारण भी था। असल में फिरोज गांधी के लिए रायबरेली राजनीतिक जमीन से अधिक उनकी कर्मस्थली थी। वहीं, जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गांधी का पूरा ध्यान इलाहाबाद और फूलपुर लोकसभा सीट पर रहता था। लेकिन फिरोज गांधी के निधन के बाद 1967 के आम चुनाव में इंदिरा गांधी यहां से मैदान में उतरीं और फिर देखते ही देखते रायबरेली देश की प्रतिष्ठित लोकसभा सीटों में शामिल हो गई। यहां के चुनावी नतीजे के साथ मुकाबले पर भी पूरे देश और दुनिया की नजर रहने लगी।
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फिरोज गांधी के निधन के बाद 1962 के चुनाव में कांग्रेस के ब्रजलाल कुरील जीते और सांसद बने। जनसंघ की तारावती महज 14268 वोटों से हारी थीं। इससे साफ था कि रायबरेली सीट पर कांग्रेस का असर उतार पर आ गया था। इस चुनाव के बाद कांग्रेस के भीतर भी कुछ हलचल नहीं हुई। कारण इलाहाबाद और फूलपुर लोकसभा सीट जवाहरलाल नेहरू की खुद की सीट थी और नेहरू-गांधी परिवार की उसी पर निगाह थी। समय गुजरा और देश के प्रथम प्रधानमंत्री के जवाहर लाल नेहरू का 27 मई 1964 को निधन हो गया।
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इसके बाद इंदिरा गांधी पर कांग्रेस के साथ नेहरू गांधी परिवार की विरासत संभालने की जिम्मेदारी आ गई। समय बीता और 1967 की जनवरी में आम चुनावों की घोषणा हुई। इंदिरा गांधी तब राज्यसभा सदस्य होने के साथ केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री थीं और कांग्रेस की बागडोर भी उन्हीं के हाथ में थी। अब सवाल यह था कि इंदिरा गांधी किस सीट से उतरेंगी। इलाहाबाद व फूलपुर को लेकर संशय था। बताते हैं कि इस असमंजस के दौर में इंदिरा गांधी की मदद एक ऐसे शख्स ने की जो बाद में देश के सबसे ताकतवर नौकरशाह बने और वह थे परमेश्वर नारायण हक्सर (पीएन हक्सर)।
हक्सर फिरोज गांधी के अभिन्न मित्र थे। इंदिरा को भी बेहतर जानते थे। असल में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जब फिरोज व इंदिरा गांधी इंग्लैंड गए तो वहां पीएन हक्सर के साथ ही रहे। ऐसे में जब 1967 में लोकसभा चुनाव के दौरान इंदिरा गांधी सीट को लेकर ऊहापोह में थीं तो उन्होंने पीएन हक्सर से बात की। बताते हैं कि पीएन ने उन्हें पिता की जगह पति की परंपरागत सीट से चुनाव लड़ने की सलाह दी। इस सलाह का नतीजा रहा कि इंदिरा गांधी रायबरेली से चुनाव में उतरीं और जीतकर सांसद बनने के साथ देश की पहली महिला प्रधानमंत्री भी बनीं।