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मानसून की समय पूर्व दस्तक से चुनौती बढ़ी: अरहर, सब्जी, मक्का, मेंथा व सब्जी किसानों को नुकसान

Wed, 16 Jun 2021 05:08 PM IST
ishwar ashish महेंद्र तिवारी, अमर उजाला, लखनऊ
महेंद्र तिवारी, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Wed, 16 Jun 2021 05:08 PM IST
सार

समय पूर्व मानसून ने किसानों के सामने मुश्किल खड़ी कर दी है। इससे कुछ फसलों को तो लाभ मिल रहा है पर कुछ के लिए यह बारिश हानिकारक है। यहां पढ़ें किन फसलों के किसान हैं परेशान?

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This is how pre monsson rain is effecting crops.
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश में समय पूर्व मानसून की दस्तक व पिछले कुछ समय से रह रहकर हो रही बारिश केवल उन्हीं किसानों के लिए फायदेमंद है जिनके धान के बेड़न तैयार हैं। गन्ना किसानों को भी फायदा है। इनके अलावा दलहन, सब्जी, मेंथा व मक्के आदि की खेती करने वाले  किसानों को इस बारिश ने बड़ा नुकसान पहुंचाया है।

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आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या के निदेशक प्रसार डॉक्टर एपी. राव बताते हैं कि ज्यादातर जिलों में मई-जून के बीच 45 से 48 डिग्री तक तापमान पहुंच जाता था। पिछले 48 वर्ष का रिकॉर्ड टूट गया। इस बार नहीं पहुंचा। मई-जून में कई तरह के तूफान व अन्य कारणों से प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में कई बार बारिश हुई।
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पिछले 7-8 दिनों से पूर्वी यूपी के ज्यादातर हिस्सों में व कई जगह पश्चिमी यूपी में भी बारिश हो रही है। इसका फायदा रोपाई के लिए धान का बेड़न तैयार कर लेने वाले किसानों को मिला है। सब्जी, दलहन आदि की फसल पर इस बारिश का खराब असर हो रहा है।
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कृषि विज्ञान केंद्र संत कबीर नगर के वरिष्ठ वैज्ञानिक व अध्यक्ष अरविंद सिंह बताते हैं कि धान की सीधी बुवाई करने वाले व गन्ना की खेती करने वाले किसानों को भी बारिश का फायदा हुआ है। लेकिन इस बारिश से बड़ी संख्या में किसानों को नुकसान ही हो रहा है।

इस तरह समझिए फसलों का फायदा व नुकसान

दलहन: ज्यादातर हिस्से में अभी अरहर की बुवाई नहीं हो पाई है। जिन्होंने जल्दी बो दिया, तेज बारिश से उनके अंखुए टूट रहे हैं। मौसम खुलने में अभी तीन-चार दिन लग सकता है। ऐसे में 7-8 दिन तक अरहर की बुवाई संभव नहीं है। देर से बुवाई का उत्पादन पर असर पड़ेगा। जिन लोगों ने उड़द व मूंग की बुआई में देरी की उन्हें मड़ाई का समय नहीं मिल पा रहा है। इससे उड़द व मूंग खेत में जमने लगे हैं। बारिश से दलहनी फसलों को बड़ा नुकसान हो रहा है।  किसानों को सलाह है कि जिन्हें अरहर की बुवाई करनी है, वह मेढ़ पर बोएं, जिससे गिरने की संभावना कम रहे।

धान: मई के अंतिम सप्ताह तक जिन्होंने बेड़न डाल दिया उन्हें ही फायदा है। ऐसे किसानों को बारिश में धान की रोपाई कर देनी चाहिए। लेकिन ज्यादातर किसान जून के प्रथम व द्वितीय सप्ताह में बेड़न डालते हैं। वे बेड़न नहीं डाल पाए। उन्हें खेत की तैयारी का समय ही नहीं मिल पाया। जिन्होंने जून में बेड़न डाला, उनकी नर्सरी के पत्ते बार-बार बारिश से मिट्टी में दब जा रहे हैं। पीले पड़ जा रहे हैं। उनके गलने की संभावना है। जिन लोगों ने धान की सीधी बुवाई की उनके खेतों में खरपतवार तेजी से बढ़ रहे हैं इन्हें निकालने पर ध्यान देना होगा। लेकिन, जो किसान अब तक बेड़न नहीं कर पाए हैं, उन्हें धान की सीधी बुवाई पर ध्यान देना चाहिए। यह पुरानी विधा तेजी से लोकप्रिय हो रही है और नर्सरी से ज्यादा फायदेमंद भी होगी।

इन फसलों पर पड़ रहा ये असर

सब्जी व मेंथा: फैलने वाली सब्जियों में लौकी, खीरा, ककड़ी, खरबूज, तरबूज, तोरई व नेनुआ की फसल खेत में है। लगातार बारिश से गल रही हैं। सब्जी किसानों को बारिश से बड़ा नुकसान हो रहा है। जिन सब्जियों की रोपाई जून में होती है उनके लिए खेत नहीं तैयार हो पा रहा है। ऐसे किसानों को सलाह है कि वह फिलहाल थैले में पौध उगाने व मौसम सामान्य होते ही खेत में लगा दें। इसी तरह प्रदेश के बाराबंकी, फैजाबाद, सीतापुर व लखनऊ सहित प्रदेश के तमाम क्षेत्रों में मेंथा की खेती होती है। जिन्होंने मेंथा देरी में लगाया उनको भारी नुकसान है। वह अभी तक तेल नहीं निकाल पाए हैं। अब खेत में सड़ने की नौबत आ रही है।

मक्का: पूर्वी यूपी के बड़े हिस्से में मक्का बोया जाता है। 8-10 दिन से मक्के में फूल आ रहे थे। बाल निकलने लगे हैं। लगातार बारिश से परागण नहीं हो पाएगा। इससे दानों की संख्या कम हो जाएगी।

गन्ना: गन्ने के जो जो पौधे छोटे हैं या खरपतवार निकालने के लिए अभी गोड़ाई नहीं हो पाई है, उनकी गोड़ाई का समय नहीं मिल पा रहा है। इससे खरपतवार बढ़ रहे हैं। इससे उत्पादन घट सकता है। जिनकी गोड़ाई हो गई है, उनको इस बारिश से अच्छा लाभ है। उनमें उत्पादन बढ़ेगा।

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