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लखनऊ में चौक के कारोबारी सुरक्षा को लेकर सतर्क, यूं कर रहे बचाव
Wed, 03 Jun 2020 03:50 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Wed, 03 Jun 2020 03:50 PM IST
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सैनिटइजेशन मशीन
- फोटो : अमर उजाला
लखनऊ में चौक गोल दरवाजा बाजार में लगभग 500 सराफा और चिकन कपड़े के शोरूम और दुकानें हैं। यहां के कारोबारियों ने खुद और ग्राहकों को कोरोना के संक्रमण से बचाने के लिए सेंसरयुक्त सैनिटाइजेशन मशीन का इंतजाम किया है।
सराफा कारोबारी अजय रस्तोगी ने अपने शोरूम में ऐसी सैनिटाइजेशन मशीन लगाई है जो ऑन होते ही शोरूम में आने वाले ग्राहकों का कई तरफ से घूमकर सैनिटाइजेशन करती है। मशीन से निकल रही फुहार से शरीर से लेकर कपड़े तक सैनिटाइज हो जाते हैं। इसका ग्राहकों और कारोबारियों के शरीर पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता है।
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सराफा कारोबारी अजय रस्तोगी ने अपने शोरूम में ऐसी सैनिटाइजेशन मशीन लगाई है जो ऑन होते ही शोरूम में आने वाले ग्राहकों का कई तरफ से घूमकर सैनिटाइजेशन करती है। मशीन से निकल रही फुहार से शरीर से लेकर कपड़े तक सैनिटाइज हो जाते हैं। इसका ग्राहकों और कारोबारियों के शरीर पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता है।
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नोट को प्रेस करता कारोबारी
- फोटो : अमर उजाला
दस्ताने पहनाकर दिखाते हैं कपड़े
चिकन कपड़े के होलसेल कारोबारी सचिन बताते हैं कि खुद और कर्मियों की वायरस से सुरक्षा के लिए जो भी ग्राहक आते, उनको सबसे पहले हाथों में दस्ताने पहनाते हैं। इसके बाद ही उन्हें कपड़े दिखाते हैं। हर आने वाले ग्राहक को नए दस्ताने दिए जाते हैं।
नोटों को कर रहे सैनिटाइज और प्रेस
चौक चिकन व्यापार मंडल के अध्यक्ष दीपक खत्री ने बताया कि खरीद-फरोख्त के बाद ग्राहकों से जो रुपये उनको मिलते हैं, उसे वह एक किनारे प्लास्टिक की थैली में डाल देते हैं। इन नोटों पर सैनिटाइजर का छिड़काव करने के 24 से 48 घंटे के बाद उनको दोबारा आयरन प्रेस से संक्रामक मुक्त करके लेनदेन करते हैं। इससे करेंसी से संक्रमण की आशंका नहीं रहती।
चिकन कपड़े के होलसेल कारोबारी सचिन बताते हैं कि खुद और कर्मियों की वायरस से सुरक्षा के लिए जो भी ग्राहक आते, उनको सबसे पहले हाथों में दस्ताने पहनाते हैं। इसके बाद ही उन्हें कपड़े दिखाते हैं। हर आने वाले ग्राहक को नए दस्ताने दिए जाते हैं।
नोटों को कर रहे सैनिटाइज और प्रेस
चौक चिकन व्यापार मंडल के अध्यक्ष दीपक खत्री ने बताया कि खरीद-फरोख्त के बाद ग्राहकों से जो रुपये उनको मिलते हैं, उसे वह एक किनारे प्लास्टिक की थैली में डाल देते हैं। इन नोटों पर सैनिटाइजर का छिड़काव करने के 24 से 48 घंटे के बाद उनको दोबारा आयरन प्रेस से संक्रामक मुक्त करके लेनदेन करते हैं। इससे करेंसी से संक्रमण की आशंका नहीं रहती।