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तीसरी जलकल की बढ़ेगी क्षमता, एक और झील बनेगी, 05 लाख आबादी का दूर होगा पानी का संकट
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लखनऊ। शारदा सहायक नहर बंद होने पर तीसरे जलकल से जुड़ी करीब पांच लाख आबादी को साल में दो बार पेयजल संकट से जूझना पड़ता है। इसे देखते हुए अब तीसरे जलकल की क्षमता बढ़ाने की तैयारी हो रही है। इसके लिए कठौता, भरवारा के बाद एक और झील बनाने की योजना है। इसके लिए मत्स्य विभाग से जमीन मांगी गई है। सिंचाई विभाग ने भी पानी जमा करने की क्षमता बढ़ाने के लिए जलकल से कहा है।
इंदिरानगर और गोमती नगर की करीब पांच लाख आबादी को पेयजल आपूर्ति करने वाले तीसरे जलकल को कच्चा पानी शारदा सहायक नहर से मिलता है। इससे पानी कठौता झील में आता है और फिर वह जलकल तक जाता है। जलकल के पास पानी का इसके अलावा कोई और विकल्प नहीं है। सिंचाई विभाग जब नहर बंद करता है तो उस समय कठौता झील में जमा पानी से काम चलाया जाता है। हालांकि, झील की क्षमता कम होने और नहर के अधिक समय तक बंद होने से पानी का संकट होता है।
अभी जरूरत से कम पानी स्टोर करने की क्षमता
नहर बंद होने के बाद कठौता झील से 22 दिन तक पानी की आपूर्ति इंदिरानगर और गोमती नगर को की जा सकती है, जबकि नहर हर बार एक महीने के लिए बंद की जाती है। कई बार मरम्मत के काम में देरी से यह और समय के लिए बंद रहती है, जिससे संकट गहरा जाता है। ऐसे में अब एक और झील बनाने की जरूरत हुई है। जलकल सचिव राम कैलाश बताते हैं कि झील में जब पानी कम होता है तो सिंचाई विभाग से जल्द पानी छोड़ने के लिए कहा जाता है। इसे लेकर अब विभाग कह रहा है कि जलकल विभाग पानी जमा करने के लिए और झील बनाए, ताकि नहर बंद होने के दौरान संकट न हो। जल निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर जीसी श्रीवास्तव का कहना है कि मत्स्य विभाग से जमीन मांगी गई है। इसके मिलने के बाद झील बनाने का काम शुरू होगा। मांग को देखते हुए पानी स्टोर की क्षमता बढ़ाया जाना आवश्यक है। सिंचाई विभाग भी पत्र लिख चुका है।
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इंदिरानगर और गोमती नगर की करीब पांच लाख आबादी को पेयजल आपूर्ति करने वाले तीसरे जलकल को कच्चा पानी शारदा सहायक नहर से मिलता है। इससे पानी कठौता झील में आता है और फिर वह जलकल तक जाता है। जलकल के पास पानी का इसके अलावा कोई और विकल्प नहीं है। सिंचाई विभाग जब नहर बंद करता है तो उस समय कठौता झील में जमा पानी से काम चलाया जाता है। हालांकि, झील की क्षमता कम होने और नहर के अधिक समय तक बंद होने से पानी का संकट होता है।
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अभी जरूरत से कम पानी स्टोर करने की क्षमता
नहर बंद होने के बाद कठौता झील से 22 दिन तक पानी की आपूर्ति इंदिरानगर और गोमती नगर को की जा सकती है, जबकि नहर हर बार एक महीने के लिए बंद की जाती है। कई बार मरम्मत के काम में देरी से यह और समय के लिए बंद रहती है, जिससे संकट गहरा जाता है। ऐसे में अब एक और झील बनाने की जरूरत हुई है। जलकल सचिव राम कैलाश बताते हैं कि झील में जब पानी कम होता है तो सिंचाई विभाग से जल्द पानी छोड़ने के लिए कहा जाता है। इसे लेकर अब विभाग कह रहा है कि जलकल विभाग पानी जमा करने के लिए और झील बनाए, ताकि नहर बंद होने के दौरान संकट न हो। जल निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर जीसी श्रीवास्तव का कहना है कि मत्स्य विभाग से जमीन मांगी गई है। इसके मिलने के बाद झील बनाने का काम शुरू होगा। मांग को देखते हुए पानी स्टोर की क्षमता बढ़ाया जाना आवश्यक है। सिंचाई विभाग भी पत्र लिख चुका है।
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