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यूपी में बिजली दरों के स्लैब में होंगे व्यापक बदलाव, बढ़ेगा जेब पर बोझ
Sat, 01 Aug 2020 07:22 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अनिल श्रीवास्तव, लखनऊ
अनिल श्रीवास्तव, लखनऊ
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 01 Aug 2020 07:22 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
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प्रदेश में बिजली दरों के स्लैब का ढांचा बदलने की तैयारी की जा रही है। मौजूदा समय में सभी श्रेणियों के कुल 80 स्लैब हैं। इसे 40-50 करने पर विचार किया जा रहा है। इससे परोक्ष रूप से उपभोक्ताओं की जेब पर बोझ बढ़ सकता है। हालांकि सरकार शिक्षण संस्थाओं और रामलीला, दुर्गापूजा, कांवड यात्रा, देवी जागरण जैसे धार्मिक आयोजनों को सस्ती बिजली देने जा रही है।
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सरकार के निर्देश के बाद पावर कॉर्पोरेशन इस कवायद में जुटा है। जल्द नए स्लैब का ढांचा तैयार करके मंजूरी के लिए राज्य विद्युत नियामक आयोग को भेजा जाएगा। अगर आयोग कॉर्पोरेशन के प्रस्ताव को स्वीकार कर लेता है तो 2020-21 के टैरिफ ऑर्डर में इसका एलान हो सकता है। हालांकि आयोग वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) व बिजली दरों के निर्धारण की प्रक्रिया शुरू कर चुका है। सूत्रों का कहना है कि भारत सरकार ने प्रदेश में स्लैब कम करने का सुझाव दिया है। इस पर ही स्लैब में कमी करके दरों के मौजूदा ढांचे का सरलीकरण करने की कवायद चल रही है।
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घरेलू उपभोक्ताओं के होंगे दो स्लैब
घरेलू श्रेणी में लाइफ लाइन (गरीबी की रेखा के नीचे) उपभोक्ताओं को छोड़कर इस समय दरों के चार स्लैब है। अब इन्हें दो करने की तैयारी है। एक स्लैब 200 यूनिट तथा दूसरा 200 से ज्यादा खपत का बनाने का प्रस्ताव है। 200 यूनिट से ज्यादा इस्तेमाल करने वालों की एक ही दर रखने पर विचार चल रहा है। इसी तरह कामर्शियल, कृषि, औद्योगिक व अन्य श्रेणियों के स्लैब भी कम किए जाएंगे। जानकारों का कहना है कि स्लैब कम होने से परोक्ष रूप से उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ सकता है। पहले के बाद दूसरे स्लैब में जाने पर बिजली की ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है।
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सरकारी व निजी दोनों शिक्षण संस्थानों को राहत
सरकार सरकारी व निजी दोनों शिक्षण संस्थाओं को राहत देने की तैयारी कर रही है। शिक्षण संस्थाएं मौजूदा समय में सार्वजनिक व निजी संस्थाओं की श्रेणी में रखी गई हैं। इस श्रेणी में अस्पताल, नर्सिंग होम, कोचिंग सेंटर भी शामिल हैं। इनके लिए मौजूदा समय में 3 किलोवाट तक 350 रुपये तथा उससे ऊपर 400 रुपये प्रति किलोवाट फिक्स चार्ज है। पहले 1000 यूनिट तक 9 रुपये प्रति यूनिट व इससे ज्यादा पर 9.30 रुपये प्रति यूनिट की दर निर्धारित है। सूत्रों का कहना है कि शिक्षण संस्थाओं के फिक्स चार्ज व विद्युत मूल्य में भी कमी की कवायद चल रही है।
धार्मिक आयोजनों के लिए बनेगी नई उपश्रेणी
प्रदेश में धार्मिक आयोजनों के लिए मौजूदा समय में अस्थायी कनेक्शन की व्यवस्था है। इस श्रेणी में भवन निर्माण, शादी-विवाह, त्यौहारों के मौके पर लगने वाली दुकानों के लिए कनेक्शन जारी होते हैं। धार्मिक आयोजनों में न्यूनतम 20 किलोवाट का कनेक्शन दिया जाता है जिसमें 4750 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से विद्युत मूल्य जमा कराया जाता है। इस पर 20 प्रतिशत इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी लगती है। 20 किलोवाट के बाद 100 रुपये प्रति किलोवाट के हिसाब से अतिरिक्त राशि जमा होती है। कुल मिलाकर धार्मिक आयोजनों के लिए 20 किलोवाट के लोड पर प्रतिदिन 5200-5500 रुपये का खर्च आता है। सरकार ने अस्थायी कनेक्शन में धार्मिक आयोजनों के लिए नई उपश्रेणी बनाकर उसकी दरें कम करने को कहा है। इसके लिए दो दिन या उससे ज्यादा के लिए अस्थायी कनेक्शन की दरें कम करने पर सहमति बन गई है। सूत्रों का कहना है कि धार्मिक आयोजनों के लिए कनेक्शन 50 फीसदी तक सस्ता हो सकता है।