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Lucknow: मुसलमानों में बहुविवाह का अनुपात अन्य से कम... शरीयत में एक विवाह असल और गुंजाइश चार की
Sat, 29 Jul 2023 03:47 PM IST
ishwar ashish
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Sat, 29 Jul 2023 03:47 PM IST
सार
शरीयत के खिलाफ फैलाई जा रही गलतफहमियों को दूर करने के लिए हर महीने होने वाली नदवा की शरिया अकादमी में दावा किया गया कि मुसलमानों में बहुविवाह अन्य से काफी कम है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
निकाह की कानूनी व शरई हैसियत शीर्षक से आयोजित संगोष्ठी में मौलाना अतीक अहमद बस्तवी ने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि मुसलमानों में बहुविवाह का अनुपात अन्य समाज व वर्गों की तुलना में काफी कम है। वो नदवा की शरिया अकादमी फॉर रिसर्च एंड स्टडीज की ओर से आयोजित संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।
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दरअसल, अकादमी की ओर से महीने में एक बार अधिवक्ताओं के लिए कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है, जिसमें शरीयत के खिलाफ फैलाई जा रही गलतफहमियों को दूर करने की कोशिश होती है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मौलाना बस्तवी ने बताया कि इस्लामी शरीयत में असल एक विवाह है और चार की गुंजाइश है। कुछ स्थितियों में एक से अधिक विवाह की आवश्यकता होती है, इसलिए यह गुंजाइश रखी गई है।
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उन्होंने बताया कि एक से अधिक विवाह के लिए न्याय की शर्त है। मौलाना ने कहा कि ये झूठा प्रचार किया जाता है कि मुसलमान एक से ज्यादा विवाह करते हैं। जबकि इस संबंध में कई रिपोर्ट बताती हैं कि मुसलमानों में बहुविवाह की औसत दर अन्य धर्मों की तुलना में कम है।
लविवि लॉ डॉ. कमाल अहमद खान ने देश के संविधान में विवाह की स्थिति पर रोशनी डाली। उन्होंने अदालतों के फैसलों के हवाले से कहा कि निकाह एक अनुबंध माना जाता है लेकिन यह अनुबंध के साथ-साथ इबादत भी है। इस तरह विवाह शरीयत का एक अनिवार्य हिस्सा है।
दारुल उलूम नदवतुल उलमा के प्रोफेसर डॉ. मुहम्मद अली नदवी ने शरिया में शादी की स्थिति पर अपना रिसर्च प्रस्तुत किया। सेवानिवृत्त न्यायाधीश एसएम हसीब ने कहा कि जब उलमा शरीयत के साथ कानून की बुनियादी बातों से अवगत होंगे तभी वो समाज में फैली गलतफहमियों को सही तरीके से दूर कर सकेंगे।