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Lucknow News: ...तो एआर कोऑपरेटिव की चूक पड़ गई जिला कृषि अधिकारी पर भारी
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सीतापुर। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही के औचक निरीक्षण के बाद मंगलवार को उनकी सख्त कार्रवाई चर्चा में रही। जिला कृषि अधिकारी मंजीत कुमार के निलंबन के साथ दोषी खाद प्रतिष्ठानों जैन इंटरप्राइजेज व मेसर्स बालाजी एग्रो ट्रेडर्स का लाइसेंस सस्पेंड करने के साथ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, दुकान छोड़कर भागे दुकानदारों के प्रतिष्ठान के लाइसेंस भी निलंबित कर दिए गए हैं। हालांकि चर्चा रही कि फोन पर मंत्री को एआर कोऑपरेटिव नवीन चंद्र शुक्ला भी सही ढंग से उत्तर नहीं दे पाए थे। मंत्री ने उन्हें फटकारा भी था। इस दौरान मंत्री ने एआर कोऑपरेटिव से पूछा था कि सोमवार को रैक लगी है या नहीं, तो उन्होंने सारी जिम्मेदारी जिला कृषि अधिकारी मंजीत कुमार पर ही डाल दी थी। अधिकारियों के बीच समन्वय की कमी के कारण खाद की अनुपलब्धता की बात मंत्री ने डीएम से भी कही थी। विभागीय चर्चा है कि एआर कोऑपरेटिव का यह उत्तर ही कार्रवाई की असली वजह बना।
गौरतलब है कि खरीफ का सीजन चल रहा है। किसानों को खाद की आवश्यकता के साथ खेतों की तैयारी करनी होती है, इससे वह व्यस्त रहते हैं। इस सबके बावजूद उन्हें खाद मिलने दिक्कतें हो रही हैं। साधन सहकारी समितियों पर खाद नहीं मिलने से वह प्राइवेट दुकानों का रुख करते हैं। यहां उन्हें कई तरह की दिक्कतें हो रही हैं। अधिक मूल्य पर खाद मिलती है। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने सोमवार को खाद लेने वाले किसानों से संवाद भी किया था। इस दौरान उन्हें किसानों को खाद मिलने में हो रही दिक्कतों से रूबरू होना पड़ा। सहकारी समितियों में खाद की उपलब्धता न होने के साथ ही सहकारिता विभाग की लापरवाह कार्यशैली उजागर हुई थी।
खाद बाबू की कार्यशैली चर्चा में
विभागीय सूत्रों के अनुसार कृषि विभाग में खाद बाबू कई वर्षों से जमे हैं। इनकी साठगांठ थोक और फुटकर खाद विक्रेताओं से है। उन्हें संरक्षण देने के कारण खाद की कालाबाजारी हो रही है। किसान से प्रति बोरी अधिक मूल्य लिया जाता है। इसका बंटवारा जिम्मेदारों में होता है। अधिक मूल्य पर खाद बेची जा रही है।
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नकली खाद के कारोबार की भी चर्चा
सूत्रों के अनुसार जिले में गांजरी इलाकों में कई नकली खाद की फैक्टरियां संचालित हैं। सिधौली क्षेत्र में भी कुछ गांवों में युवा नकली खाद के कारोबार में शामिल हैं। विभागीय सांठगांठ से यह खेल चल रहा है। खैराबाद स्थित एक खाद फैक्टरी पर कृषि विभाग व एसटीएफ ने छापा भी मारा था, हालांकि जांच ठंडे बस्ते में चली गई। हर बार नकली खाद के कारोबारी बच निकलते हैं। मंत्री के एक्शन से विभाग में हड़कंप है।
.........
204 में मात्र 88 समितियां ही संचालित
विभागीय आंकड़ों के अनुसार जिले में 204 साधन सहकारी समितियां पंजीकृत हैं। हैरानी की बात यह है कि इनमें से मात्र 88 समितियां ही क्रियाशील हैं। बता दें कि इन क्रियाशील समितियों पर भी खाद नदारद है। इस वजह से किसानों को महंगे दामों पर बाहर से खाद खरीदनी पड़ रही है। यही खाद की कालाबाजारी की असली वजह भी है।
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गौरतलब है कि खरीफ का सीजन चल रहा है। किसानों को खाद की आवश्यकता के साथ खेतों की तैयारी करनी होती है, इससे वह व्यस्त रहते हैं। इस सबके बावजूद उन्हें खाद मिलने दिक्कतें हो रही हैं। साधन सहकारी समितियों पर खाद नहीं मिलने से वह प्राइवेट दुकानों का रुख करते हैं। यहां उन्हें कई तरह की दिक्कतें हो रही हैं। अधिक मूल्य पर खाद मिलती है। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने सोमवार को खाद लेने वाले किसानों से संवाद भी किया था। इस दौरान उन्हें किसानों को खाद मिलने में हो रही दिक्कतों से रूबरू होना पड़ा। सहकारी समितियों में खाद की उपलब्धता न होने के साथ ही सहकारिता विभाग की लापरवाह कार्यशैली उजागर हुई थी।
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खाद बाबू की कार्यशैली चर्चा में
विभागीय सूत्रों के अनुसार कृषि विभाग में खाद बाबू कई वर्षों से जमे हैं। इनकी साठगांठ थोक और फुटकर खाद विक्रेताओं से है। उन्हें संरक्षण देने के कारण खाद की कालाबाजारी हो रही है। किसान से प्रति बोरी अधिक मूल्य लिया जाता है। इसका बंटवारा जिम्मेदारों में होता है। अधिक मूल्य पर खाद बेची जा रही है।
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नकली खाद के कारोबार की भी चर्चा
सूत्रों के अनुसार जिले में गांजरी इलाकों में कई नकली खाद की फैक्टरियां संचालित हैं। सिधौली क्षेत्र में भी कुछ गांवों में युवा नकली खाद के कारोबार में शामिल हैं। विभागीय सांठगांठ से यह खेल चल रहा है। खैराबाद स्थित एक खाद फैक्टरी पर कृषि विभाग व एसटीएफ ने छापा भी मारा था, हालांकि जांच ठंडे बस्ते में चली गई। हर बार नकली खाद के कारोबारी बच निकलते हैं। मंत्री के एक्शन से विभाग में हड़कंप है।
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204 में मात्र 88 समितियां ही संचालित
विभागीय आंकड़ों के अनुसार जिले में 204 साधन सहकारी समितियां पंजीकृत हैं। हैरानी की बात यह है कि इनमें से मात्र 88 समितियां ही क्रियाशील हैं। बता दें कि इन क्रियाशील समितियों पर भी खाद नदारद है। इस वजह से किसानों को महंगे दामों पर बाहर से खाद खरीदनी पड़ रही है। यही खाद की कालाबाजारी की असली वजह भी है।