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एमबीबीएस पास लेकिन नहीं चढ़ा पाते हैं ग्लूकोज तो...

Sun, 01 Nov 2015 04:03 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 01 Nov 2015 04:03 PM IST
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the vascular access workshop in lucknow

एमबीबीएस पास कर लिया लेकिन ग्लूकोज चढ़ाने के लिए मरीज की नस नहीं ढूंढ पा रहे। नर्सिंग का डिप्लोमा और डिग्री तो मिल गई लेकिन जब नस में कैनुला लगाने की नौबत आई तो हाथ कांपने लगे।

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ऐसी ही स्थितियों से रूबरू हो रहे मेडिकोज और पैरामेडिकल स्टाफ को केजीएमयू में प्रशिक्षण दिया गया। केजीएमयू कलाम सेंटर में शनिवार को आयोजित ‘द वैस्कुलर एक्सेस वर्कशॉप’ एनेस्थीसिया विभाग के प्रो. जीपी सिंह और कार्यशाला के आयोजन सचिव प्रो. हैदर अब्बास ने बताया कि दुर्घटना में अधिक खून बहने के कारण बेहोशी (शॉक) की स्थिति में जा चुके घायल व्यक्ति की जान बचाने के लिए उसे तुरंत फ्ल्यूड (ग्लूकोज) चढ़ाने की जरूरत होती है।
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लेकिन ऐसे मरीज को ग्लूकोज चढ़ाने के लिए उसकी नस नहीं मिलती है। ऐसी स्थिति में चिकित्सक के लिए सबसे बड़ी चुनौती नस ढूंढना और उसमें कैनुला लगाना होता है।
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प्रो. जीपी सिंह ने बताया कि अधिक खून बह जाने से हाथ या पैर की नसें सिकुड़ जाती हैं। इसलिए उन्हें ढूंढ़ना मुश्किल होता है। ऐसी स्थिति में गर्दन की जुगलर नस, फिमोरल नस और सब क्लेविकल नस से फ्ल्यूड चढ़ाना होता है।

शॉक में ब्लड प्रेशर 50 से भी नीचे चला जाता है। इसलिए सामान्य पेरीफेरल नसों (हाथ या पैर) से अधिक मात्रा में फ्ल्यूड चढ़ाना संभव नहीं होता है। बड़ी नस से फ्ल्यूड मात्र 5 से 10 मिनट में लगभग एक लीटर तक चढ़ाया जा सकता है।

डॉक्टर्स ने सुझाए ये तरीके

the vascular access workshop in lucknow

सर्जन डॉ. संदीप तिवारी ने नस में कट लगाकर पाइप (इंट्रा वेनस लाइन) डालने का तरीका बताया। शॉक के मरीजों के जीवन को बचाने के लिए सीधे नस में कट लगाकर पाइप लगाया जाता है।

आयोजन सचिव डॉ. हैदर अब्बास और एम्स जोधपुर से आए डॉ. निखिल कोठारी ने बताया कि वैस्कुलर एक्सेस वर्कशॉप उत्तर भारत में पहली बार आयोजित की गई है। मेडिकोज की स्किल को बढ़ाने का ये अच्छा प्रयास है।

उन्होंने बताया कि ऐसे समय जब मरीज की नस नहीं मिलती है तो अल्ट्रासाउंड का प्रयोग किया जाता है। इससे नस को खोजकर उसमें आईवी लाइन डाली जा सकती है। पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. जीडी रावत ने बच्चों की नस को ढूंढने और उसमें कैनुला लगाने का तरीका सिखाया।

इससे पहले कार्यशाला का उद्घाटन कुलपति प्रो.रविकांत ने किया। प्रॉक्टर प्रो.एसएन कुरील, एम्स दिल्ली से आए डॉ. मनीष सिंह और डॉ. पुनीत शर्मा ने भी मेडिकोज व प्रशिक्षु नर्सों को प्रशिक्षण दिया।

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