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अब सहारा शहर पर फिर कस रहा नगर निगम का शिकंजा

Mon, 04 Apr 2022 01:33 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 04 Apr 2022 01:33 AM IST
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the screws are tightening again on sahara city
गोमती नगर के विपुल खंड की जिस जमीन पर सहारा शहर बना है, इस जमीन के निजी उपयोग पर नगर निगम ने सहारा इंडिया हाउसिंग कंपनी को बीते दस मार्च को लीज निरस्त करने और एफआईआर दर्ज कराए जाने का नोटिस दिया था। इसके जवाब में कंपनी ने आरोपों को झुठलाते हुए नगर निगम को ही अब तक योजना न विकसित हो पाने के लिए जिम्मेदार ठहरा दिया है। कंपनी का अधिकृत प्राधिकारी कौन है यह खुलकर नहीं बताया गया है। जवाब देने वाले अधिकृत प्राधिकारी के रूप में हस्ताक्षर किए हैं। अपना नाम नहीं लिखा है।
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मालूम हो कि गोमती नगर विपुल खंड की जिस जमीन पर सहारा शहर है वह नगर निगम की ओर से आवासीय योजना विकसित करने के लिए सहारा इंडिया हाउसिंग लिमिटेड कंपनी को 1994 में लाइसेंस पर शर्तों के तहत दी गई थी। शर्तों के उल्लंघन पर नगर निगम के तत्कालीन नगर आयुक्त दिवाकर त्रिपाठी की ओर से 1997 में लाइसेंस निरस्त करने का नोटिस जारी किया। इसके बाद सिविल कोर्ट में यह मामला चल रहा है। इस बीच 2012 में सेबी और सहारा के विवाद में सहारा शहर की जमीन को भी सेबी ने कुर्की कर लिया। इसके अलावा आर्बीटेशन में भी यह मामला सहारा इंडिया हाउसिंग और नगर निगम के बीच 15 साल से अधिक समय तक चला। जिसका 2017 में फैसला आया। जिसमें सेबी की सहमति के बाद सहारा की ओर से दी गई सूची के आवंटियों को लीज करने की बात कही गई, लेकिन यह हो नहीं पाया, क्याेंकि अब तक सेबी की ओर से जमीन मुक्त ही नहीं की गई।
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जवाब में सहारा ने कहा 800 करोड़ कर चुका है खर्च
सेक्टर रोड न बनाने, शर्तों के तहत योजना न विकसित और सेबी से समझ सहारा के स्वामित्व की जमीन बताए जाने सहित नगर निगम के सभी आरोपों को सहारा कंपनी ने सिरे से खारिज कर दिया है। उल्टा नगर निगम को ही योजना में देरी सहित अन्य विधिक विवादों के लिए जिम्मेदार बता दिया है। कंपनी के अधिकृत प्राधिकारी की ओर से दिए जवाब में यह भी कहा कि गया है कि 28 साल में कंपनी सहारा शहर की जमीन के विकास, निर्माण व मेंटेनेंस पर करीब 800 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है। जिससे कंपनी को ही नुकसान हो रहा है न कि नगर निगम को। जवाब देने वाले ने सिर्फ अधिकृत प्राधिकारी के तौर हस्ताक्षर ही किए हैं।
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फैक्ट फाइल
-22 अक्टूबर 1994 को जमीन विकसित करने केलिए लाइसेंस दिया गया
-1997 में नगर निगम ने शर्तों के उल्लंघन पर लाइसेंस कैंसिल कर दिया
-इसके विरोध में सिविल कोर्ट में वाद दायर हुआ
-न्यायालय ने नगर निगम के आदेश पर रोक लगा दी
-130 एकड़ जमीन आवासीय योजना विकसित करने के लिए दी गई
-40 एकड़ जमीन ग्रीन बेल्ट विकसित करने के लिए दी गई
-6.57 करोड़ रुपए अनुबंध के तहत लिए गए
-31 अगस्त 2012 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत सेबी की ओर सहारा शहर की जमीन कुर्क करने की सूचना नगर निगम को दी गई
- इस पर 08 मई 2013 को तत्त्कालीन नगर आयुक्त की ओर सेबी अध्यक्ष को पत्र लिखा गया जिसमें यह कहा गया कि जमीन का मालिक नगर निगम है।
लीज की शर्तों के उल्लंघन पर नोटिस जारी की गई थी। जिसका जवाब आया है। उसका परीक्षण किया जा रहा है। उसके बाद आगे की विधिक कार्यवाही की जाएगी।
- यमुनाधर चौहान, सहायक नगर आयुक्त, डिप्टी कलेक्टर
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