{"_id":"65c2b3727ad52293f30db615","slug":"the-last-evening-of-sanatakda-mahotsav-was-the-hallmark-of-how-amrita-pritams-ishq-imroz-and-sahir-ludhianvis-stories-make-people-of-all-age-groups-crazy-about-them-lucknow-news-c-13-lko1012-603143-2024-02-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lucknow News: प्रेम कहानियों में ढली सनतकदा की आखिरी शाम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lucknow News: प्रेम कहानियों में ढली सनतकदा की आखिरी शाम
विज्ञापन
लखनऊ। अमृता प्रीतम का इश्क, इमरोज और साहिर लुधियानवी के किस्से, किस कदर हर उम्र के लोगों को अपना दीवाना बनाते हैं, इसकी बानगी थी सनतकदा महोत्सव की आखिरी शाम। एक तरफ इश्क के चर्चे थे, दूसरी तरफ कहानी सुनाने का लक्ष्य माहेश्वरी का दिलकश अंदाज। दास्तानगो अंकित चड्ढा की कहानी से शुरू हुए इस सफर ने अंत तक सबको बांधे रखा। इस बीच फिल्म तमाशा से लेकर लाल सिंह चड्ढा, फिर कभी-कभी और मेरी जोहाराजबीं तक के बजते गानों के बीच उन्होंने अपनी बातें कह दीं।
वहीं वरिष्ठ कवि नरेश सक्सेना की कविता सुनो चारूशीला के बहाने वरिष्ठ पत्रकार सौरभ श्रीवास्तव और अभिषेक के बीच हुई गुफ्तगू में गालिब और मीर के अंदाज पर बात हुई। समकालीन कविता का जिक्र आया। साथ ही यह निष्कर्ष निकला कि इश्क तो खेती में भी झलकता है।
कुछ करोगे क्या...ने कराया जिम्मेदारी का अहसास
एक सत्र में पूर्व आईएएस व बच्चों की कहानियों की लेखिका डॉ. अनिता भटनागर जैन ने कुछ करोगे क्या... कहानी सुनाई। इसके माध्यम से लेखिका ने अहसास कराया कि जिम्मेदारी अधिकार के साथ जुड़ी है। इसी कड़ी में कठपुतली शो लव इज और द हग का आयोजन भी हुआ। कठपुतलियों ने प्यार-दुलार के महत्व को समझाया।
विज्ञापन
आदिवासियों से मिले प्यार के लिए आभार
एक सत्र काव्या सक्सेना के नाम था, जिसमें उन्होंने आदिवासी समुदायों से मुलाकात उनसे मिले प्यार को समझाया और आभार जताया।
उमराव जान और इश्क के चर्चे
आशिकाना लखनऊ थीम पर आधारित सनतकदा महोत्सव के पहले दिन फिल्म अंजुमन दिखाई गई थी। समापन पर उमराव जान का प्रदर्शन हुआ। मुजफ्फर अली द्वारा निर्देशित व निर्मित फिल्म ने इश्क के अलग ही अंदाज की याद दिलाई।
वोक्ट्रोनिका बैंड की धुन पर झूमे सब
महोत्सव का समापन वोक्ट्रोनिका बैंड की प्रस्तुति से हुआ। आठ सदस्यीय दल ने हम्मा हम्मा... से लेकर इट्स द टाइम टू डिस्को पर खूब धमाल मचा। विगत पांच दिनों से क्राफ्ट बाजार, महोत्सव के प्रबंधन, चर्चाओं में व्यस्त रहे मेहमानों, आयोजकों ने मिलकर धूम मचाई।
विज्ञापन
वहीं वरिष्ठ कवि नरेश सक्सेना की कविता सुनो चारूशीला के बहाने वरिष्ठ पत्रकार सौरभ श्रीवास्तव और अभिषेक के बीच हुई गुफ्तगू में गालिब और मीर के अंदाज पर बात हुई। समकालीन कविता का जिक्र आया। साथ ही यह निष्कर्ष निकला कि इश्क तो खेती में भी झलकता है।
विज्ञापन
कुछ करोगे क्या...ने कराया जिम्मेदारी का अहसास
एक सत्र में पूर्व आईएएस व बच्चों की कहानियों की लेखिका डॉ. अनिता भटनागर जैन ने कुछ करोगे क्या... कहानी सुनाई। इसके माध्यम से लेखिका ने अहसास कराया कि जिम्मेदारी अधिकार के साथ जुड़ी है। इसी कड़ी में कठपुतली शो लव इज और द हग का आयोजन भी हुआ। कठपुतलियों ने प्यार-दुलार के महत्व को समझाया।
विज्ञापन
आदिवासियों से मिले प्यार के लिए आभार
एक सत्र काव्या सक्सेना के नाम था, जिसमें उन्होंने आदिवासी समुदायों से मुलाकात उनसे मिले प्यार को समझाया और आभार जताया।
उमराव जान और इश्क के चर्चे
आशिकाना लखनऊ थीम पर आधारित सनतकदा महोत्सव के पहले दिन फिल्म अंजुमन दिखाई गई थी। समापन पर उमराव जान का प्रदर्शन हुआ। मुजफ्फर अली द्वारा निर्देशित व निर्मित फिल्म ने इश्क के अलग ही अंदाज की याद दिलाई।
वोक्ट्रोनिका बैंड की धुन पर झूमे सब
महोत्सव का समापन वोक्ट्रोनिका बैंड की प्रस्तुति से हुआ। आठ सदस्यीय दल ने हम्मा हम्मा... से लेकर इट्स द टाइम टू डिस्को पर खूब धमाल मचा। विगत पांच दिनों से क्राफ्ट बाजार, महोत्सव के प्रबंधन, चर्चाओं में व्यस्त रहे मेहमानों, आयोजकों ने मिलकर धूम मचाई।