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Lucknow News: हाईकोर्ट ने डीआईओएस का आदेश रद्द किया
Sat, 22 Nov 2025 02:56 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Sat, 22 Nov 2025 02:56 AM IST
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लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने चुटकी भंडार गर्ल्स इंटर कॉलेज की कार्यवाहक प्रधानाचार्य के निलंबन प्रकरण में लखनऊ के जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) द्वितीय द्वारा पारित आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने मामले को पुनः डीआईओएस को भेजते हुए कॉलेज प्रबंध समिति और प्रधानाचार्य दोनों पक्षों को सुनवाई का पूरा अवसर देकर छह सप्ताह में नया आदेश पारित करने का फरमान दिया है।
न्यायमूर्ति श्रीप्रकाश सिंह की एकल पीठ ने यह निर्णय इंटर कॉलेज के प्रबंधक पवन वर्मा व एक अन्य की याचिका स्वीकार करते हुए दिया। याचिका में नौ जुलाई 2025 को प्रभारी डीआईओएस द्वितीय द्वारा पारित उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें कार्यवाहक प्रधानाचार्य डॉ. सुमन शुक्ला के निलंबन को नामंजूर कर दिया गया था।
मामले के अनुसार, डॉ. सुमन शुक्ला ने एक मार्च 2024 को कार्यवाहक प्रधानाचार्य का प्रभार संभाला था। कुछ शिकायतों की जांच के बाद कॉलेज की प्रबंध समिति ने उन्हें निलंबित कर आदेश डीआईओएस को अनुमोदन के लिए भेजा था, जिसे डीआईओएस ने बिना पर्याप्त सुनवाई के नामंजूर कर दिया। समिति की ओर से दलील दी गई कि उन्हें अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया।
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उधर, डॉ. सुमन शुक्ला की ओर से याचिका का विरोध किया गया। कोर्ट ने पाया कि आदेश प्रभारी डीआईओएस मनीषा द्विवेदी ने पारित किया, परंतु संबंधित पक्षों को विधिसम्मत सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया। अदालत ने टिप्पणी की कि सुनवाई से पहले आदेश पारित करने की जल्दबाजी समझ से परे है, जिससे प्रक्रिया संदेह के दायरे में आ जाती है। इसी आधार पर नौ जुलाई का आदेश रद्द कर दिया गया।
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न्यायमूर्ति श्रीप्रकाश सिंह की एकल पीठ ने यह निर्णय इंटर कॉलेज के प्रबंधक पवन वर्मा व एक अन्य की याचिका स्वीकार करते हुए दिया। याचिका में नौ जुलाई 2025 को प्रभारी डीआईओएस द्वितीय द्वारा पारित उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें कार्यवाहक प्रधानाचार्य डॉ. सुमन शुक्ला के निलंबन को नामंजूर कर दिया गया था।
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मामले के अनुसार, डॉ. सुमन शुक्ला ने एक मार्च 2024 को कार्यवाहक प्रधानाचार्य का प्रभार संभाला था। कुछ शिकायतों की जांच के बाद कॉलेज की प्रबंध समिति ने उन्हें निलंबित कर आदेश डीआईओएस को अनुमोदन के लिए भेजा था, जिसे डीआईओएस ने बिना पर्याप्त सुनवाई के नामंजूर कर दिया। समिति की ओर से दलील दी गई कि उन्हें अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया।
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उधर, डॉ. सुमन शुक्ला की ओर से याचिका का विरोध किया गया। कोर्ट ने पाया कि आदेश प्रभारी डीआईओएस मनीषा द्विवेदी ने पारित किया, परंतु संबंधित पक्षों को विधिसम्मत सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया। अदालत ने टिप्पणी की कि सुनवाई से पहले आदेश पारित करने की जल्दबाजी समझ से परे है, जिससे प्रक्रिया संदेह के दायरे में आ जाती है। इसी आधार पर नौ जुलाई का आदेश रद्द कर दिया गया।