Ayodhya: एक क्लिक में मिलेगा राम मंदिर का पूरा इतिहास, अहम दस्तावेज हो रहे डिजिटल
राम मंदिर से जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेजों का डिजटलीकरण किया जा रहा है। इनमें वो दस्तावेज भी होंगे जो सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर के पक्ष में आए ऐतिहासिक फैसले की नींव बने थे।
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राम मंदिर से जुड़े ऐतिहासिक और कानूनी दस्तावेजों को संरक्षित करने के लिए डिजिटलीकरण किया जा रहा है। राम जन्मभूमि आंदोलन और मंदिर निर्माण से संबंधित महत्वपूर्ण अभिलेखों को डिजिटल करने का कार्य तेजी से चल रहा है, जिसमें अब तक करीब 75 फीसदी काम पूरा हो चुका है। इससे अब राम मंदिर का इतिहास एक क्लिक में उपलब्ध होने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
डिजिटलीकरण के दायरे में वे अहम दस्तावेज भी शामिल हैं, जो सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर के पक्ष में आए ऐतिहासिक फैसले की नींव बने थे। इनमें अदालतों में प्रस्तुत साक्ष्य, पुरातात्विक रिपोर्ट, ऐतिहासिक अभिलेख, नक्शे, दस्तावेजी प्रमाण और विभिन्न आयोगों की रिपोर्टें शामिल हैं।
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इन सभी दस्तावेजों को चरणबद्ध तरीके से एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया जा रहा है, ताकि शोधार्थियों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों को प्रमाणिक जानकारी सहज रूप से मिल सके। सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत किए गए सभी प्रपत्रों को अपलोड किया ज चुका है। कुल 17 बक्सा दस्तावेज थे, सभी डिजिटल हो चुके हैं। वहीं हाईकोर्ट व लोअर कोर्ट के दस्तावेजों को अपलोड करने का काम तेजी से चल रहा है।
बताया गया कि दोनों कोर्ट के कुल 153 बक्सा दस्तावेज मिले थे, जिनमें से 130 बक्सा दस्तावेजों को अपलोड किया जा चुका है। राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्र का कहना है कि इस परियोजना का उद्देश्य न केवल इन अमूल्य दस्तावेजों को भविष्य के लिए सुरक्षित रखना, बल्कि जानकारी की पारदर्शी और व्यवस्थित उपलब्धता भी सुनिश्चित करना है। शेष दस्तावेजों को अपलोड करने का कार्य भी शीघ्र पूरा कर लिया जाएगा, जिसके बाद राम मंदिर से संबंधित पूरा दस्तावेजी इतिहास डिजिटल रूप में संरक्षित होगा।
सीबीआई कोर्ट के प्रपत्रों के नए बॉक्स पहुंचे
बताया गया कि राम मंदिर मामले से जुड़े सीबीआई कोर्ट के महत्वपूर्ण दस्तावेजों के 23 नए बॉक्स हाल ही में संग्रहण केंद्र तक पहुंचाए गए हैं। इन बॉक्सों में रखे दस्तावेजों की छंटाई, वर्गीकरण और स्कैनिंग का कार्य शुरू कर दिया गया है। इन अभिलेखों को भी डिजिटलीकरण परियोजना में शामिल किया गया है, ताकि न्यायिक रिकॉर्ड पूरी तरह सुरक्षित और सुलभ हो सके।
ग्रंथों व किताबों का भी होगा डिजिटलीकरण
डिजिटलीकरण की प्रक्रिया केवल फाइलों और प्रपत्रों तक सीमित नहीं है। चाल आलमारियों में सुरक्षित ऐतिहासिक किताबों, संदर्भ ग्रंथों और दुर्लभ प्रकाशनों को भी कंम्प्यूटर में अपलोड किया जाना है। इनमें राम जन्मभूमि आंदोलन, अयोध्या के इतिहास और भारतीय सांस्कृतिक परंपरा से जुड़ी दुर्लभ कृतियां शामिल हैं। इनमें से वे ग्रंथ व किताब भी शामिल हैं जिनकाे कोर्ट में प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया गया था। विशेषज्ञों की देखरेख में इन पुस्तकों को स्कैन कर डिजिटल संग्रह का हिस्सा बनाया जाएगा।