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Lucknow News: मेडल नहीं, छात्रवृत्ति के रूप में होगा दान की रकम का इस्तेमाल
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मेडल नहीं, छात्रवृत्ति के रूप में होगा दान की रकम का इस्तेमाल
लखनऊ। किंग जाॅर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में दान में मिली रकम का इस्तेमाल अब आर्थिक रूप से अक्षम विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति देने में किया जाएगा। कार्य परिषद में मुहर लगने के बाद अब इसे व्यवहार में लागू किया जा रहा है। केजीएमयू प्रवक्ता प्रो. केके सिंह के मुताबिक इससे आर्थिक रूप से अक्षम विद्यार्थियों को पढ़ाई में सहयोग हो सकेगा।
केजीएमयू के दीक्षांत समारोह में इस समय 100 से ज्यादा पदक प्रदान किए जाते हैं। इनमें से ज्यादातर पदक किसी न किसी रूप में केजीएमयू को दान में मिली रकम से दिए जाते हैं। एकमुश्त मिलने वाली इस राशि के ब्याज से ये पदक साल दर साल दिए जाते रहते हैं। केजीएमयू प्रशासन ने अब इस व्यवस्था में बदलाव कर दिया है। अब दान में मिली धनराशि का इस्तेमाल मेडल के बजाय छात्रवृत्ति देने में किया जाएगा। यह छात्रवृत्ति गरीब छात्रों को दी जाएगी। इससे जरूरतमंद अपनी पढ़ाई पूरी कर पाएंगे। इसके लिए आठ लाख रुपये की सालाना पारिवारिक आय वाले विद्यार्थी का चयन किया जाएगा। छात्रवृत्ति के ताैर पर उसकी ट्यूशन फीस माफ कर दी जाएगी।
छात्रवृत्ति के लिए अलग सेल
केजीएमयू में अब छात्रवृत्ति के लिए अलग सेल होगी। इसका बाकायदा कार्यालय स्थापित किया जाएगा। इसके माध्यम से विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति संबंधी सभी समस्याओं का समाधान किया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी किसी शिक्षक को दी जाएगी। उनके अधीन पूरा कार्यालय काम करेगा।
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केजीएमयू के दीक्षांत समारोह में इस समय 100 से ज्यादा पदक प्रदान किए जाते हैं। इनमें से ज्यादातर पदक किसी न किसी रूप में केजीएमयू को दान में मिली रकम से दिए जाते हैं। एकमुश्त मिलने वाली इस राशि के ब्याज से ये पदक साल दर साल दिए जाते रहते हैं। केजीएमयू प्रशासन ने अब इस व्यवस्था में बदलाव कर दिया है। अब दान में मिली धनराशि का इस्तेमाल मेडल के बजाय छात्रवृत्ति देने में किया जाएगा। यह छात्रवृत्ति गरीब छात्रों को दी जाएगी। इससे जरूरतमंद अपनी पढ़ाई पूरी कर पाएंगे। इसके लिए आठ लाख रुपये की सालाना पारिवारिक आय वाले विद्यार्थी का चयन किया जाएगा। छात्रवृत्ति के ताैर पर उसकी ट्यूशन फीस माफ कर दी जाएगी।
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छात्रवृत्ति के लिए अलग सेल
केजीएमयू में अब छात्रवृत्ति के लिए अलग सेल होगी। इसका बाकायदा कार्यालय स्थापित किया जाएगा। इसके माध्यम से विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति संबंधी सभी समस्याओं का समाधान किया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी किसी शिक्षक को दी जाएगी। उनके अधीन पूरा कार्यालय काम करेगा।
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