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Lucknow News: टाउनशिप की जमीन ली, 63 करोड़ का कर्ज लेकर भागी कंपनी
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लखनऊ। आवास विकास परिषद से 364 फ्लैट बनाने के लिए जमीन और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया से 63 करोड़ का कर्ज लेने वाली मुंबई की कंपनी डिजर्व इलाइट के फर्जीवाड़े की पोल सीबीआई जांच में खुल गई है।
जांच में सामने आया कि कंपनी ने साजिश रचकर कर्ज की रकम हड़पी और भाग निकली। अब सीबीआई जल्द कंपनी के निदेशक चार सगे भाइयों संतोष कुमार शारदा, मनीष कुमार शारदा, उत्कर्ष संतोष शारदा, दीपक लक्ष्मण शारदा और कर्ज देने वाले बैंक अधिकारियों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल करने की तैयारी में है।
सीबीआई ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के रीजनल हेड संतोष कुमार शुक्ला की शिकायत पर पिछले वर्ष सितंबर में मुंबई की रीयल एस्टेट कंपनी डिजर्व बिल्डर्स एंड डवलपर्स लिमिटेड के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की थी।
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बैंक ने शिकायत की थी कि डिजर्व बिल्डर्स एंड डवलपर्स लखनऊ को वृंदावन योजना में 12 हजार वर्ग मीटर का प्लॉट आवास विकास परिषद ने आवंटित किया था। कंपनी करीब 251 करोड़ की लागत से 354 फ्लैट के सात टॉवर बनाने का भरोसा दिया था।
इसके लिए यूनियन बैंक ऑफ इंडिया से 105 करोड़ रुपये का लोन लिया गया। साथ ही बैंक की सचिवालय शाखा से क्रेडिट लिमिट भी ली गई। कंपनी ने वर्ष 2019 से लोन की किश्त चुकाना बंद कर दिया। जब बैंक अधिकारियों ने मौके पर जाकर देखा तो वहां खाली प्लॉट देखकर होश उड़ गए। इसके बाद बैंक ने सीबीआई में शिकायत दर्ज कराई थी।
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जांच में सामने आया कि कंपनी ने साजिश रचकर कर्ज की रकम हड़पी और भाग निकली। अब सीबीआई जल्द कंपनी के निदेशक चार सगे भाइयों संतोष कुमार शारदा, मनीष कुमार शारदा, उत्कर्ष संतोष शारदा, दीपक लक्ष्मण शारदा और कर्ज देने वाले बैंक अधिकारियों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल करने की तैयारी में है।
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सीबीआई ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के रीजनल हेड संतोष कुमार शुक्ला की शिकायत पर पिछले वर्ष सितंबर में मुंबई की रीयल एस्टेट कंपनी डिजर्व बिल्डर्स एंड डवलपर्स लिमिटेड के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की थी।
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बैंक ने शिकायत की थी कि डिजर्व बिल्डर्स एंड डवलपर्स लखनऊ को वृंदावन योजना में 12 हजार वर्ग मीटर का प्लॉट आवास विकास परिषद ने आवंटित किया था। कंपनी करीब 251 करोड़ की लागत से 354 फ्लैट के सात टॉवर बनाने का भरोसा दिया था।
इसके लिए यूनियन बैंक ऑफ इंडिया से 105 करोड़ रुपये का लोन लिया गया। साथ ही बैंक की सचिवालय शाखा से क्रेडिट लिमिट भी ली गई। कंपनी ने वर्ष 2019 से लोन की किश्त चुकाना बंद कर दिया। जब बैंक अधिकारियों ने मौके पर जाकर देखा तो वहां खाली प्लॉट देखकर होश उड़ गए। इसके बाद बैंक ने सीबीआई में शिकायत दर्ज कराई थी।