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टीईटी की अनिवार्यता: अनिवार्य होने के आदेश में संशोधन करे सरकार, 22 राज्यों के संगठनों ने भरी हुंकार
Mon, 24 Nov 2025 11:17 PM IST
रोहित मिश्र
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: रोहित मिश्र
Updated Mon, 24 Nov 2025 11:17 PM IST
सार
UP Primary Teacher: यूपी के प्राथमिक स्कूलों में 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए अनिवार्य टीईटी पर शिक्षक संगठनों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
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टीईटी को लेकर विरोध करते शिक्षक
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पहली से आठवीं कक्षा के वर्ष 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए अनिवार्य शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पास करने के मुद्दे पर 22 राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों के शिक्षकों ने सोमवार को दिल्ली में विरोध दर्ज करवाया। शिक्षक संगठनों ने केंद्र सरकार से शीतकालीन सत्र में अध्यादेश लाकर टीईटी अनिवार्य के आदेश में संशोधन करने की मांग की।
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जंतर-मंतर पर अखिल भारतीय शिक्षक संघर्ष मोर्चा की अध्यक्षता में 22 राज्यों के शिक्षक संगठनों के शिक्षकों ने हुंकार भरी और सरकार को मांग न मानने पर दिल्ली घेराव का अल्टीमेटम भी दे दिया है। कहा कि एनसीटीई के गलत फैसले से 10 लाख शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं। इसमें सबसे अधिक यूपी के 1.86 लाख शिक्षक भी शामिल हैं।
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मोर्चा के राष्ट्रीय सह संयोजक अनिल यादव ने कहा कि धरना प्रदर्शन में उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, बिहार, राजस्थान, झारखंड, दिल्ली, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश,पंजाब, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, समेत अन्य राज्यों के सेवारत शिक्षक टीटीई के मुद्दे पर एकजुट हुए हैं। साल दर साल सेवाएं देने के बाद अचानक एक फैसले से उनकी पढ़ाने की क्षमता पर सवाल उठ गए हैं। जबकि विभिन्न राज्यों के प्रदेश शिक्षा विभाग शिक्षकों को गुणवत्ता युक्त शिक्षा के लिए ट्रेनिंग देता रहा है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से शिक्षक सड़कों पर आने का विवश हो गए हैं। इस विरोध के बाद, शिक्षक अपने स्कूलों में जाकर काली पटटी बांधकर कक्षाएं लेंगे, लेकिन हमें शीतकालीन सत्र में आदेश में संशोधन का इंतजार रहेगा।
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बच्चों को पढ़ाएं या खुद की परीक्षा की तैयारी करें
शिक्षक संगठनों का कहना है, वर्ष 2011 से पहले भर्ती होने वाले शिक्षकों के लिए टीईटी की कोई अनिवार्य शर्त नहीं थी। यदि होती तो वे उस समय अनिवार्य पात्रता परीक्षा का पास करते। अब अचानक 2025 में शिक्षकों को टीईटी अनिवार्य का फैसला थोपा गया है। ऐसे में वे बच्चों को पढ़ाएं या फिर अपनी परीक्षा की तैयारी करें।