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गर्भावस्था की शुरुआती जांच में जानें बच्चा सामान्य या मंदबुद्धि
Mon, 25 Mar 2019 01:36 AM IST
manoj tiwari
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: manoj tiwari
Updated Mon, 25 Mar 2019 01:36 AM IST
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गर्भवती
- फोटो : SELF
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लखनऊ। गर्भावस्था के तीन माह के अंदर डबल मार्कर सहित अन्य जांच के जरिये यह पता लगाया जा सकता है कि बच्चा सामान्य है या मंदबुद्धि। इसमें डाउन सिंड्रोम की जानकारी मिल जाती है। यह कहना है एसजीपीजीआई की डॉ. इंदुलता का। वह रविवार को अटल बिहारी वाजपेयी साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में आयोजित ऑब्सटेट्रिक्स एवं गायनेकोलॉजी सोसायटी की कार्यशाला को संबोधित कर रही थीं।
डॉ. इंदुलता ने बताया कि अनुवांशिक कारणों, प्रदूषण जैसी वजहों से तमाम बच्चे मंदबुद्धि पैदा हो रहे हैं। इससे बचने के लिए गर्भाधान के तीन माह के अंदर डबल मार्कर टेस्ट कराया जाता है। यदि डाउन सिंड्रोम के संकेत मिलते हैं तो क्रॉनिक विलस सैंपलिंग (सीवीएस) जांच कराई जाती है। इसमें स्थिति के बारे में पुख्ता जानकारी मिल जाती है। फिर दंपती की काउंसलिंग करके गर्भपात कराया जाता है।
ब्लड प्रेशर का रखें ध्यान
गर्भावस्था में ब्लड प्रेशर अधिकतम 140 और न्यूनतम 90 से अधिक रहता है तो जांच करानी चाहिए। इस दौरान इस बात का भी ध्यान रखें कि सिर में लगातार दर्द होना, आंखों से सामने धुंधला दिखाई पड़ता, शरीर या पैर में अधिक सूजन होना भी खतरनाक है। ऐसी स्थिति में महिला रोग विशेषज्ञ के संपर्क में रहना चाहिए। यह स्थिति जच्चा व बच्चा दोनों के लिए खतरनाक मानी जाती है।
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प्रो. सीमा मेहरोत्रा
हरी-पत्तेदार सब्जियां जरूर खाएं
गर्भावस्था में हरी-पत्तेदार सब्जियां जरूर खाएं। इसके अलावा सोयाबीन, अखरोट, फल में अमरूद, संतरा और आंवला खाना बेहतर रहता है। इससे एनीमिया की समस्या नहीं होती है। एनीमिया होने पर थकान, हाथपैर का ठंडा होने के साथ ही सांस लेने में भी दिक्कत होने लगती है। कई बार हार्ट अटैक तक की नौबत आ जाती है।
- प्रो. सुजाता देव
गर्भावस्था में उल्टी को नजरअंदाज न करें
गर्भावस्था में लगातार उल्टी होती रहे तो उसे नजरअंदाज न करें। इससे किडनी फेल्योर की आशंका बढ़ जाती है। गर्भधारण के बाद लगातार उल्टी होती रहती है तो उसे गर्भधारण से जोड़कर न देखें बल्कि चिकित्सक से इलाज कराएं। लगातार उल्टी पित्ताशय की थैली में स्टोन और हाइपरटेंशन की वजह भी हो सकती है।
डॉ. विनीता अवस्थी
शारीरिक श्रम भी जरूरी
कुल महिलाएं गर्भावस्था में शारीरिक श्रम पूरी तरह बंद कर देती हैं। बाजारू चीजें ज्यादा खाती हैं। इससे जच्चा और पेट में पल रहे बच्चे को भी खतरा रहता है। चिकित्सक से सलाह लेकर योग और शारीरिक श्रम करते रहना चाहिए। ज्यादा तला भुना चीजों का सेवन एकदम न करें। सलाद दोनों वक्त खाएं।
- डॉ. नीलम विनय
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डॉ. इंदुलता ने बताया कि अनुवांशिक कारणों, प्रदूषण जैसी वजहों से तमाम बच्चे मंदबुद्धि पैदा हो रहे हैं। इससे बचने के लिए गर्भाधान के तीन माह के अंदर डबल मार्कर टेस्ट कराया जाता है। यदि डाउन सिंड्रोम के संकेत मिलते हैं तो क्रॉनिक विलस सैंपलिंग (सीवीएस) जांच कराई जाती है। इसमें स्थिति के बारे में पुख्ता जानकारी मिल जाती है। फिर दंपती की काउंसलिंग करके गर्भपात कराया जाता है।
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ब्लड प्रेशर का रखें ध्यान
गर्भावस्था में ब्लड प्रेशर अधिकतम 140 और न्यूनतम 90 से अधिक रहता है तो जांच करानी चाहिए। इस दौरान इस बात का भी ध्यान रखें कि सिर में लगातार दर्द होना, आंखों से सामने धुंधला दिखाई पड़ता, शरीर या पैर में अधिक सूजन होना भी खतरनाक है। ऐसी स्थिति में महिला रोग विशेषज्ञ के संपर्क में रहना चाहिए। यह स्थिति जच्चा व बच्चा दोनों के लिए खतरनाक मानी जाती है।
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प्रो. सीमा मेहरोत्रा
हरी-पत्तेदार सब्जियां जरूर खाएं
गर्भावस्था में हरी-पत्तेदार सब्जियां जरूर खाएं। इसके अलावा सोयाबीन, अखरोट, फल में अमरूद, संतरा और आंवला खाना बेहतर रहता है। इससे एनीमिया की समस्या नहीं होती है। एनीमिया होने पर थकान, हाथपैर का ठंडा होने के साथ ही सांस लेने में भी दिक्कत होने लगती है। कई बार हार्ट अटैक तक की नौबत आ जाती है।
- प्रो. सुजाता देव
गर्भावस्था में उल्टी को नजरअंदाज न करें
गर्भावस्था में लगातार उल्टी होती रहे तो उसे नजरअंदाज न करें। इससे किडनी फेल्योर की आशंका बढ़ जाती है। गर्भधारण के बाद लगातार उल्टी होती रहती है तो उसे गर्भधारण से जोड़कर न देखें बल्कि चिकित्सक से इलाज कराएं। लगातार उल्टी पित्ताशय की थैली में स्टोन और हाइपरटेंशन की वजह भी हो सकती है।
डॉ. विनीता अवस्थी
शारीरिक श्रम भी जरूरी
कुल महिलाएं गर्भावस्था में शारीरिक श्रम पूरी तरह बंद कर देती हैं। बाजारू चीजें ज्यादा खाती हैं। इससे जच्चा और पेट में पल रहे बच्चे को भी खतरा रहता है। चिकित्सक से सलाह लेकर योग और शारीरिक श्रम करते रहना चाहिए। ज्यादा तला भुना चीजों का सेवन एकदम न करें। सलाद दोनों वक्त खाएं।
- डॉ. नीलम विनय