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लखनऊ में आतंकी : बिना रजिस्ट्रेशन नंबर के ई-रिक्शा से धमाके की थी तैयारी
Wed, 14 Jul 2021 07:54 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Wed, 14 Jul 2021 07:54 PM IST
सार
एटीएस अधिकारियों के मुताबिक राजधानी को दहलाने के लिए गिरफ्त में आये पांच संदिग्ध आतंकियों ने इसके लिए करीब 4-5 साल पहले बिना पंजीकरण के चलने वाले ई-रिक्शा की तलाश शुरू की थी।
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अलकायदा के आतंकी की सूचना के बाद एटीएस (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अलकायदा से जुड़े संदिग्ध आतंकियों ने राजधानी को दहलाने के लिए खासी तैयारी कर रखी थी। इसके लिए ई-रिक्शा का प्रयोग किया जाना था। वह भी ऐसा ई-रिक्शा जिसका नगर निगम या आरटीओ में पंजीकरण न हुआ हो। इस तरह के ई-रिक्शे की तलाश के लिए लखनऊ का लीडर मिनहाज ने शकील और मसीरुद्दीन को लगा रखा था। इन दोनों ने 16 पुराने ऐसे लोगों को संपर्क किया था। जिनके पास बिना पंजीकरण के रिक्शा मौजूद था। यह योजना पुलिस व सुरक्षा एजेंसियों को गुमराह करने की थी।
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एटीएस अधिकारियों के मुताबिक राजधानी को दहलाने के लिए गिरफ्त में आये पांच संदिग्ध आतंकियों ने इसके लिए करीब 4-5 साल पहले बिना पंजीकरण के चलने वाले ई-रिक्शा की तलाश शुरू की थी। इस काम के लिए मिनहाज अहमद ने मड़ियांव के मसीरुद्दीन व जनता नगरी निवासी शकील से संपर्क किया था। दोनों ने उसके लिए लखनऊ में बिना पंजीकरण वाले ई-रिक्शा मालिकों की तलाश शुरू की थी।
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पूछताछ में दोनों ने एटीएस को बताया कि ऐसे 16 ई-रिक्शा मालिकों के बारे में उन्होंने जानकारी जुटा ली थी। कुछ से बातचीत भी कर रखी थी। मिनहाज को इस बारे में पूरी जानकारी थी। उसने ऐसे ई-रिक्शा को खरीदने के लिए कुछ दिन रुकने के लिए कहा था। खासकर इस बात की ताकीद की थी कि ई-रिक्शा ऐसे हो जो आसानी से बिना अतिरिक्त रुपये लगाए चलती हालत में हों।
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अवशेष मिलने पर भी नहीं लगा सकते थे पता
योजना ऐसी बनाई थी कि अगर धमाका होने के बाद भी कोई सबूत न मिले। धमाके के बाद पुलिस व सुरक्षा एजेंसियों को ई-रिक्शा केअवशेष मिलते तो भी असल मालिक तक नहीं पहुंच सकती थी। क्योंकि बिना रजिस्ट्रेशन के किसी का पता भी नहीं मिल सकता था। पुलिस व सुरक्षा एजेंसियां गुमराह होकर रह जाती।
मिनहाज कुछ मालिकों से सीधे संपर्क में था
एटीएस के अधिकारी के मुताबिक मिनहाज की दुकान पर ई-रिक्शा की बैटरी भी मिलती थी। ऐसे में वह कुछ ई-रिक्शा चालकों व मालिकों के सीधे संपर्क में था। उनसे खरीद फरोख्त की बातचीत भी कर रखी थी। हालांकि किसी इसके लिए कोई एडवांस रकम नहीं दी थी। सभी को वक्त आने पर खरीदने की बात करता था।