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ऑक्सीजन कांड में ब्लैकलिस्टेड कंपनी को मेडिकल गैस पाइप लाइन का टेंडर, शिकायत मिलने के बाद निरस्त
Sun, 26 Apr 2020 09:07 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 26 Apr 2020 09:07 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
गोरखपुर मेडिकल कॉलेज के ऑक्सीजन कांड मामले में जिस कंपनी को ब्लैक लिस्ट कर दिया गया था, उसी कंपनी को लखनऊ के शहीदपथ स्थित मातृ शिशु अस्पताल में मेडिकल गैस पाइप लाइन के विस्तार का टेंडर भी दे दिया गया।
नियमों को ताक पर रखकर यह कारनामा किया डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के अधिकारियों ने। शिकायतकर्ता ने मुख्य सचिव आरके तिवारी को पत्र लिखकर इसकी शिकायत की तो शनिवार देर रात टेंडर निरस्त कर दिया गया। अब नए सिरे से टेंडर होगा।
दरअसल, लोहिया इंस्टीट्यूट के मातृ शिशु अस्पताल को कोविड-19 अस्पताल बनाया जा रहा है। इसमें अधूरी मेडिकल गैस पाइप लाइन के विस्तार के लिए 16 अप्रैल को टेंडर निकाला गया था। टेंडर में रारू मेडिकल सिस्टम ओपीसी प्राइवेट लिमिटेड, सिग्मा मेडिटेक सर्विसेज प्रा. लि., मेसर्स पुष्पा सेल्स प्राइवेट लि. और उनीसी इंडिया प्राइवेट लिमिटेट ने भाग लिया था।
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शिकायतकर्ता ने कहा कि टेक्निकल बिड में ही रारू और सिग्मा को डिस्क्वालीफाई कर दिया गया। फाइनेंसियल बिड में मेसर्स पुष्पा को टेंडर दे दिया गया। जबकि इसी कंपनी को ऑक्सीजन कांड के बाद ब्लैक लिस्ट किया गया था।
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नियमों को ताक पर रखकर यह कारनामा किया डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के अधिकारियों ने। शिकायतकर्ता ने मुख्य सचिव आरके तिवारी को पत्र लिखकर इसकी शिकायत की तो शनिवार देर रात टेंडर निरस्त कर दिया गया। अब नए सिरे से टेंडर होगा।
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दरअसल, लोहिया इंस्टीट्यूट के मातृ शिशु अस्पताल को कोविड-19 अस्पताल बनाया जा रहा है। इसमें अधूरी मेडिकल गैस पाइप लाइन के विस्तार के लिए 16 अप्रैल को टेंडर निकाला गया था। टेंडर में रारू मेडिकल सिस्टम ओपीसी प्राइवेट लिमिटेड, सिग्मा मेडिटेक सर्विसेज प्रा. लि., मेसर्स पुष्पा सेल्स प्राइवेट लि. और उनीसी इंडिया प्राइवेट लिमिटेट ने भाग लिया था।
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शिकायतकर्ता ने कहा कि टेक्निकल बिड में ही रारू और सिग्मा को डिस्क्वालीफाई कर दिया गया। फाइनेंसियल बिड में मेसर्स पुष्पा को टेंडर दे दिया गया। जबकि इसी कंपनी को ऑक्सीजन कांड के बाद ब्लैक लिस्ट किया गया था।
नियम ताक पर
टेंडर की गाइड लाइन के अनुसार नियमत: न्यायालय में जिस कंपनी का कोई वाद लंबित हो, वह काली सूची हो या फिर एफआईआर हो तो वह किसी टेंडर में भाग नहीं ले सकती। लेकिन लोहिया इंस्टीट्यूट के अधिकारियों ने टेंडर में इस गाइड लाइन का पालन नहीं किया।
आरोप है कि टेंडर में ब्लैक लिस्ट कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए विशेष कंपनी की पाइप ही मांगी गई और वह पाइप सिर्फ पुष्पा सेल्स ही इस्तेमाल करती है। हालांकि गोरखपुर कांड के बाद शासन ने कई कंपनी के पाइप को अनुमति दे रखी है।
नए सिरे से होगा टेंडर
‘टेंडर में गड़बड़ी की शिकायत की जानकारी मिलते ही इसे निरस्त कर दिया गया है। टेंडर नए सिरे से जारी होगा।
प्रो.एके त्रिपाठी निदेशक, आरएमएलआईएमएस
आरोप है कि टेंडर में ब्लैक लिस्ट कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए विशेष कंपनी की पाइप ही मांगी गई और वह पाइप सिर्फ पुष्पा सेल्स ही इस्तेमाल करती है। हालांकि गोरखपुर कांड के बाद शासन ने कई कंपनी के पाइप को अनुमति दे रखी है।
नए सिरे से होगा टेंडर
‘टेंडर में गड़बड़ी की शिकायत की जानकारी मिलते ही इसे निरस्त कर दिया गया है। टेंडर नए सिरे से जारी होगा।
प्रो.एके त्रिपाठी निदेशक, आरएमएलआईएमएस