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उत्तर एवं उत्तर मध्य रेलवे की ट्रेनों की स्पीड बढ़ाने की तैयारी, होगी समय की बचत

Mon, 18 Nov 2019 03:15 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Mon, 18 Nov 2019 03:15 PM IST
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temporary caution will be removed, speed of trains will increase
प्रतीकात्मक तस्वीर
कॉशन के चलते ट्रेनों को रफ्तार नहीं मिल पा रही है। ऐसे में अस्थायी रूप से लगे कॉशन को कम करने व हटाने के उद्देश्य से मंथन हो रहा है। इन कॉशन के हट जाने से ट्रेनों को रफ्तार मिल सकेगी और यात्रियों को राहत मिलेगी।
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दरअसल, दिल्ली से हावड़ा व दिल्ली से मुम्बई, यह दो प्रमुख रूट हैं, जिन पर ट्रेनों की संख्या सर्वाधिक है। इन रूटों पर ट्रेनों का दबाव अधिक है। ऐसे में रेलवे बोर्ड की ओर से हाल ही में इन रूटों पर ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाकर 160 किमी. प्रति घंटा करने का खाका तैयार किया गया है और इसके लिए छह हजार करोड़ रुपये प्रति रूट पर खर्च किया जाएगा।
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इसके लिए रेलवे अधिकारियों को कई चरणों में काम करना पड़ेगा, जिसमें प्रमुख हैं ट्रैक का मेंटेनेंस, नई लाइनें व दोहरीकरण। इसमें पहले चरण में रेलवे लाइनों के मेंटेनेंस पर फोकस किया जा रहा है। बता दें कि कॉशन ट्रेनों की स्पीड को कम करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
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temporary caution will be removed, speed of trains will increase
प्रतीकात्मक तस्वीर
कुछ कॉशन स्थायी होते हैं, जैसा कि पुलों या मोड़ पर लगने वाले कॉशन, जहां ट्रेनों को एक तय स्पीड पर ही गुजारना होता है। जबकि कई कॉशन अस्थायी होते हैं और ये समय-समय पर बदलते रहते हैं। लखनऊ से मुरादाबाद रूट पर करीब 35 कॉशन हैं।

ऐसे ही लखनऊ से कानपुर, लखनऊ से गोरखपुर, वाराणसी आदि रूटों पर भी कॉशन लगाए जाते हैं। इलाहाबाद से कानपुर, आगरा, झांसी आदि रूटों पर भी कई कॉशन हैं। रेलवे अस्थायी कॉशनों के लिए परमानेंट इलाज पर मंथन कर रही है।

10 से 15 किमी. तक घटती है रफ्तार

temporary caution will be removed, speed of trains will increase
प्रतीकात्मक तस्वीर
उत्तर, पूर्वोत्तर व उत्तर मध्य रेलवे के रेलखंडों पर जब ट्रेनों का संचालन होता है तो लोको पायलटों को कॉशन की सूची सौंपी जाती है। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, कॉशन पर रफ्तार कम करनी होती है, जिसे रफ्तार अमूमन दस से पंद्रह किमी. प्रति घंटे की रखी जाती है। कुछ पुल ऐसे भी हैं, जिनकी जर्जरता को देखते हुए रफ्तार और भी कम कर दी जाती है।

तीन सौ से ज्यादा ट्रेनें होती हैं प्रभावित
अगर, उत्तर व पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ मंडल की बात करें तो कॉशन की वजह से तीन सौ से अधिक ट्रेनों की स्पीड पर असर पड़ता है। दरअसल, अकेले चारबाग रेलवे स्टेशन से दो सौ से ज्यादा ट्रेनें गुजरती हैं, जो अलग-अलग रूटों पर जाती हैं। ऐसे ही लखनऊ जंक्शन पर भी आने जाने वाली गाड़ियों को कॉशन से होकर गुजरना पड़ता है।
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