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Lucknow News: तापमान प्रबंधन से बचाई जा सकती है गंभीर मरीजों की जान
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लखनऊ। जापान के प्रो. शोजी याकोबोरी के मुताबिक, मस्तिष्क संबंधी गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीज में टारगेटेड तापमान प्रबंधन (टीटीएम) चिकित्सा पद्धति बेहद उपयोगी है। इसके इस्तेमाल से उसकी जान बचाई जा सकती है। वह शुक्रवार को केजीएमयू के क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग में हुई सीएमई में बोल रहे थे।
प्रो. शोजी याकोबोरी ने बताया कि टीटीएम ऐसी नियंत्रित चिकित्सा है, जिसमें मस्तिष्क की कार्यप्रणाली की रक्षा करने और तंत्रिका संबंधी परिणामों में सुधार के लिए रोगी के शरीर के तापमान को या तो कम कर दिया जाता है या एक विशिष्ट सीमा पर बनाए रखा जाता है। इससे मरीज का प्रबंधन करने में आसानी होती है।
विभागाध्यक्ष प्रो. अविनाश अग्रवाल ने कहा कि क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग में भर्ती हर मरीज के हिसाब से चिकित्सा की अलग पद्धति तय होनी चाहिए। विभाग में शुरू हुई इस पहल के बेहतर नतीजे नजर आ रहे हैं। इससे पहले कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने सीएमई का शुभारंभ किया। इस मौके पर एम्स नई दिल्ली के प्रो. आशीष बिंदा, प्रो. दीपक गुप्ता, केजीएमयू के सीएमएस प्रो. बीके ओझा, चिकित्सा अधीक्षक प्रो. सुरेश कुमार, प्रो. हैदर अब्बास मौजूद रहे।
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प्रो. शोजी याकोबोरी ने बताया कि टीटीएम ऐसी नियंत्रित चिकित्सा है, जिसमें मस्तिष्क की कार्यप्रणाली की रक्षा करने और तंत्रिका संबंधी परिणामों में सुधार के लिए रोगी के शरीर के तापमान को या तो कम कर दिया जाता है या एक विशिष्ट सीमा पर बनाए रखा जाता है। इससे मरीज का प्रबंधन करने में आसानी होती है।
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विभागाध्यक्ष प्रो. अविनाश अग्रवाल ने कहा कि क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग में भर्ती हर मरीज के हिसाब से चिकित्सा की अलग पद्धति तय होनी चाहिए। विभाग में शुरू हुई इस पहल के बेहतर नतीजे नजर आ रहे हैं। इससे पहले कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने सीएमई का शुभारंभ किया। इस मौके पर एम्स नई दिल्ली के प्रो. आशीष बिंदा, प्रो. दीपक गुप्ता, केजीएमयू के सीएमएस प्रो. बीके ओझा, चिकित्सा अधीक्षक प्रो. सुरेश कुमार, प्रो. हैदर अब्बास मौजूद रहे।
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