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छात्रा की आत्महत्या मामले में चार सदस्यीय टीम करेगी जांच, शकुंतला मिश्रा विवि में दो दिन अवकाश
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Fri, 20 Apr 2018 01:28 PM IST
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डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय के गेट पर प्रदर्शन करते स्टूडेंट्स।
- फोटो : amar ujala
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डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय में बीएड छात्रा द्वारा आत्महत्या किए जाने के बाद अधिकारी और कर्मचारियों पर लगे आरोपों की जांच के लिए विवि प्रशासन ने जांच कमेटी गठित कर दी है।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रवीर कुमार ने मामले की जांच के लिए प्रोफेसर शेफाली यादव की अध्यक्षता में चार सदस्यीय टीम बनाई है। इनमें प्रो. शेफाली के अलावा डॉ. अनामिका चौधरी, प्रो. राजीवनयन पांडेय और प्रो. विनोद कुमार सिंह शामिल हैं। जांच समिति को एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया गया है।
मालूम हो कि विश्वविद्यालय की बीएड छात्रा पारुल सिंह (23) ने बृहस्पतिवार दोपहर हॉस्टल में फांसी लगा ली थी। साथी छात्राओं का आरोप है कि जब उन्होंने पारुल को तड़पता देखा तो हॉस्टल की वार्डन सौम्या शंकर को सूचना दी, पर कोई मदद नहीं मिली। सहेली की जान बचाने के लिए छात्राओं ने कमरे का दरवाजा तोड़कर फंदा काटा और पारुल को स्कूटी से अस्पताल ले गईं। हालांकि उनकी कोशिश नाकामयाब रही और इलाज के दौरान पारुल ने दम तोड़ दिया।
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छात्रा की मौत पर छात्र-छात्राओं का आक्रोश फूट पड़ा और उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। गुरुवार से शुरू हुई नारोबाजी और प्रदर्शन शुक्रवार को भी जारी रही। यूनिवर्सिटी का गेट बंद कर सभी प्रदर्शन कर रहे हैं। स्टूडेंट्स पीड़ित परिवार को 25 लाख रुपये मुआवजे और जिम्मेदार लोगों पर एफआईआर दर्ज कराने की मांग पर अड़े हैं।
वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामला बढ़ता देखकर आनन-फानन जांच समिति बनाई और यूनिवर्सिटी में दो दिन का अवकाश घोषित कर दिया है।
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विश्वविद्यालय के कुलपति प्रवीर कुमार ने मामले की जांच के लिए प्रोफेसर शेफाली यादव की अध्यक्षता में चार सदस्यीय टीम बनाई है। इनमें प्रो. शेफाली के अलावा डॉ. अनामिका चौधरी, प्रो. राजीवनयन पांडेय और प्रो. विनोद कुमार सिंह शामिल हैं। जांच समिति को एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया गया है।
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मालूम हो कि विश्वविद्यालय की बीएड छात्रा पारुल सिंह (23) ने बृहस्पतिवार दोपहर हॉस्टल में फांसी लगा ली थी। साथी छात्राओं का आरोप है कि जब उन्होंने पारुल को तड़पता देखा तो हॉस्टल की वार्डन सौम्या शंकर को सूचना दी, पर कोई मदद नहीं मिली। सहेली की जान बचाने के लिए छात्राओं ने कमरे का दरवाजा तोड़कर फंदा काटा और पारुल को स्कूटी से अस्पताल ले गईं। हालांकि उनकी कोशिश नाकामयाब रही और इलाज के दौरान पारुल ने दम तोड़ दिया।
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छात्रा की मौत पर छात्र-छात्राओं का आक्रोश फूट पड़ा और उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। गुरुवार से शुरू हुई नारोबाजी और प्रदर्शन शुक्रवार को भी जारी रही। यूनिवर्सिटी का गेट बंद कर सभी प्रदर्शन कर रहे हैं। स्टूडेंट्स पीड़ित परिवार को 25 लाख रुपये मुआवजे और जिम्मेदार लोगों पर एफआईआर दर्ज कराने की मांग पर अड़े हैं।
वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामला बढ़ता देखकर आनन-फानन जांच समिति बनाई और यूनिवर्सिटी में दो दिन का अवकाश घोषित कर दिया है।