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कोरोना से आठ गुना महंगी स्वाइन फ्लू की जांच
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नहीं बनाए गए सरकारी अस्पताल में जांच केंद्र, शासन ने नहीं तय की है जांच दर
केस एक
सर्दी-जुखाम होने पर अलीगंज निवासी मरीज की डॉक्टर ने कोरोना जांच कराई तो निगेटिव आई। संदेह होने पर डॉक्टर ने निजी लैब से स्वाइन फ्लू की जांच कराई जो पॉजिटिव आई। मरीज को निजी लैब में जांच के लिए 5200 रुपये खर्च करने पड़े।
केस दो
फतेहपुर का रहने वाला मरीज निजी अस्पताल में सर्जरी के लिए भर्ती हुआ। सर्दी-जुखाम व बुखार के लक्षण दिखने पर कोरोना जांच कराई तो निगेटिव आई। डॉक्टर ने स्वाइन फ्लू की जांच कराई तो निजी लैब में करीब 5500 रुपये देने पड़े।
राजधानी की निजी लैबों में स्वाइन फ्लू की जांच (5500 रुपये) कोरोना की आरटीपीसीआर टेस्ट (700 रुपये) से आठ गुना महंगी है। निजी लैबें स्वाइन फ्लू की जांच के नाम पर मरीजों को लूट रही हैं। इसका पहला कारण है कि सरकारी अस्पतालों में स्वाइन फ्लू की जांच के लिए केंद्र नहीं बनाए गए हैं। दूसरा यह कि शासन से अभी तक रेट नहीं तय किए हैं। इसके अलावा निजी लैब ट्रूनेट जांच के नाम पर भी मोटी रकम वसूल रही हैं। अब विभाग ने दोनों जांचों के दाम घटाने की सिफारिश शासन से की है।
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स्वास्थ्य विभाग के अफसरों का कहना है कि कोरोना के चलते स्वाइन फ्लू का वायरस कमजोर पड़ गया है। पीक समय होने के बावजूद इक्का-दुक्का केस ही अभी तक सामने आए हैं। इसकी वजह यह है कि लोग मास्क व सैनिटाइजर के इस्तेमाल संग सामाजिक दूरी का पालन कर रहे हैं।
वहीं, कोरोना के चलते किसी भी सरकारी अस्पताल में स्वाइन फ्लू की जांच के लिए केंद्र नहीं बनाया गया है। बेड तक रिजर्व नहीं किए गए हैं। ऐसे में संदिग्ध रोगी को निजी सेंटर जाना पड़ रहा है, जहां उनसे मोटी रकम वसूली जा रही है।
ट्रूनेट जांच की दर भी नहीं हुई रिवाइज
शासन ने आरटीपीसीआर जांच की दर को दिसंबर में रिवाइज करके 700 रुपये कर दिया। जबकि ट्रूनेट जांच की दर को रिवाइस नहीं किया। ऐसे में निजी लैब पहले से तय रेट से भी अधिक शुल्क वसूल रही हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम की पड़ताल में इसकी पुष्टि भी हुई थी।
निजी लैब में स्वाइन फ्लू की जांच 5000 रुपये से अधिक होने की जानकारी नहीं है। शुल्क को रिवाइस करने के लिए शासन को पत्र भेजा जाएगा।
- डॉ. डीएस नेगी, स्वास्थ्य महानिदेशक
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केस एक
सर्दी-जुखाम होने पर अलीगंज निवासी मरीज की डॉक्टर ने कोरोना जांच कराई तो निगेटिव आई। संदेह होने पर डॉक्टर ने निजी लैब से स्वाइन फ्लू की जांच कराई जो पॉजिटिव आई। मरीज को निजी लैब में जांच के लिए 5200 रुपये खर्च करने पड़े।
केस दो
फतेहपुर का रहने वाला मरीज निजी अस्पताल में सर्जरी के लिए भर्ती हुआ। सर्दी-जुखाम व बुखार के लक्षण दिखने पर कोरोना जांच कराई तो निगेटिव आई। डॉक्टर ने स्वाइन फ्लू की जांच कराई तो निजी लैब में करीब 5500 रुपये देने पड़े।
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राजधानी की निजी लैबों में स्वाइन फ्लू की जांच (5500 रुपये) कोरोना की आरटीपीसीआर टेस्ट (700 रुपये) से आठ गुना महंगी है। निजी लैबें स्वाइन फ्लू की जांच के नाम पर मरीजों को लूट रही हैं। इसका पहला कारण है कि सरकारी अस्पतालों में स्वाइन फ्लू की जांच के लिए केंद्र नहीं बनाए गए हैं। दूसरा यह कि शासन से अभी तक रेट नहीं तय किए हैं। इसके अलावा निजी लैब ट्रूनेट जांच के नाम पर भी मोटी रकम वसूल रही हैं। अब विभाग ने दोनों जांचों के दाम घटाने की सिफारिश शासन से की है।
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स्वास्थ्य विभाग के अफसरों का कहना है कि कोरोना के चलते स्वाइन फ्लू का वायरस कमजोर पड़ गया है। पीक समय होने के बावजूद इक्का-दुक्का केस ही अभी तक सामने आए हैं। इसकी वजह यह है कि लोग मास्क व सैनिटाइजर के इस्तेमाल संग सामाजिक दूरी का पालन कर रहे हैं।
वहीं, कोरोना के चलते किसी भी सरकारी अस्पताल में स्वाइन फ्लू की जांच के लिए केंद्र नहीं बनाया गया है। बेड तक रिजर्व नहीं किए गए हैं। ऐसे में संदिग्ध रोगी को निजी सेंटर जाना पड़ रहा है, जहां उनसे मोटी रकम वसूली जा रही है।
ट्रूनेट जांच की दर भी नहीं हुई रिवाइज
शासन ने आरटीपीसीआर जांच की दर को दिसंबर में रिवाइज करके 700 रुपये कर दिया। जबकि ट्रूनेट जांच की दर को रिवाइस नहीं किया। ऐसे में निजी लैब पहले से तय रेट से भी अधिक शुल्क वसूल रही हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम की पड़ताल में इसकी पुष्टि भी हुई थी।
निजी लैब में स्वाइन फ्लू की जांच 5000 रुपये से अधिक होने की जानकारी नहीं है। शुल्क को रिवाइस करने के लिए शासन को पत्र भेजा जाएगा।
- डॉ. डीएस नेगी, स्वास्थ्य महानिदेशक