15 हजार से ज्यादा पढ़े-लिखे सफाई कर्मी अब नहीं लगाएंगे झाड़ू, होगा प्रमोशन
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खुद के आदेश का पालन करने में देरी होने पर मातहतों को दंडित करने की धमकी देने वाले शासन में बैठे नौकरशाहों ने सफाई कर्मचारियों को प्रोन्नति देने के सरकारी आदेश के पालन में 17 साल लगा दिए। वर्ष 2001 में ही तत्कालीन सरकार ने निकायों के पढ़े-लिखे सफाई कर्मियों को तृतीय श्रेणी (समूह ग) के लिपिक पद पर प्रोन्नति देने का निर्णय लिया था।
इसके लिए दिसंबर-2001 में शासनादेश भी जारी हो गया लेकिन सफाई कर्मचारियों को प्रमोशन का लाभ नहीं दिया गया। स्थानीय निकाय निदेशालय के अपर निदेशक विशाल भारद्वाज ने सभी निकायों को प्रावधान के मुताबिक पढ़े-लिखे सफाई कर्मचारियों को प्रमोशन देने का निर्देश जारी किया है।
ऐसे में माना जा रहा है कि योग्यता के मुताबिक काम नहीं मिलने का दंश झेल रहे 15 से हजार से अधिक इंटर-स्नातक पास सफाई कर्मचारियों की प्रमोशन की वर्षों पुरानी मांग अब पूरी हो जाएगी।
2014 में इस शासनादेश पर अमल को लेकर स्थानीय निकाय निदेशालय के स्तर पर कुछ प्रयास जरूर किए गए, लेकिन कुछ दिन बाद ही उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
उप्र सफाई मजदूर संयुक्त मोर्चा ने जब शासन स्तर पर दबाव बनाया तो अक्तूबर-2014 में पढे़-लिखे सफाई कर्मचारियों की वरिष्ठता सूची तैयार की र्गई, लेकिन इस सूची पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। उत्तर प्रदेशीय सफाई मजदूर संघ मुख्यमंत्री से लेकर विभागीय प्रमुख सचिव व सचिव के अलावा निदेशक स्थानीय निकाय तक फरियाद लगाई, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
हाईकोर्ट के निर्देश पर भी अमल नहीं
शासन स्तर पर नौकरशाही के काम करने की गति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सफाई कर्मचारियों की प्रमोशन की मांग से संबंधित पत्र को सीएम दफ्तर से स्थानीय निकाय निदेशालय पहुंचने में करीब 8 महीने लग गए।
सफाई कर्मचारियों ने पिछले साल 23 सितंबर को मुख्यमंत्री को पत्र देकर स्थिति से अवगत कराया था। वहीं स्थानीय निकाय निदेशालय ने गत 24 मई को सभी निकायों को पढ़े-लिखे सफाई कर्मचारियों को नियमानुसार प्रमोशन देने का निर्देश जारी किया है।
लिपिक के 20 प्रतिशत पदों पर प्रमोशन
दिसंबर-2001 के शासनादेश के मुताबिक हाईस्कूल या उसके समकक्ष योग्यता रखने वाले उन सफाई कर्मचारियों को प्रमोशन देने का प्रावधान है, जिन्होंने 5 साल की सेवा पूरी कर ली हो।
शासन ने ऐसे कर्मचारियों को समूह ‘ग’ लिपिक संवर्ग के 15 प्रतिशत पदों पर प्रमोशन देने की व्यवस्था की थी। इसी प्रकार इंटर या उससे अधिक शिक्षा ग्रहण वाले कर्मचारियों के लिए भी 5 प्रतिशत पदों पर प्रमोशन देने का कोटा तय किया गया है।
लखनऊ नगर निगम में तैनात सफाई कर्मचारी राजेश कुमार की रिट याचिका पर हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने दिसंबर-2001 में जारी शासनादेश के प्रावधान के मुताबिक दो महीने के भीतर प्रमोशन देकर याची को सूचित करने का आदेश दिया था। इसके बावजूद नगर विकास विभाग ने इस मामले में कोई कार्यवाही नहीं की।