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स्वामी प्रसाद: खुद की उपेक्षा के साथ फर्रुखाबाद के टिकट से थे नाखुश, इस सीट से लड़ाना चाहते हैं बेटी को

Tue, 13 Feb 2024 09:37 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Tue, 13 Feb 2024 09:37 PM IST
सार

स्वामी प्रसाद मौर्य लंबे समय से पार्टी में हो रही उनकी कथित उपेक्षा से नाखुश थे। साथ ही साथ वह फर्रुखाबाद के टिकट से खुश नहीं बताए जा रहे हैं। 
 

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Swami Prasad Maurya: Was not happy with Farrukhabad ticket with his own neglect
Swami Prasad Maurya - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

स्वामी प्रसाद मौर्य लंबे समय से सपा में खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। उनके हर बयान को समय-समय पर प्रो. रामगोपाल यादव और शिवपाल यादव निजी राय बताते रहे हैं। वहीं, विधानसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक मनोज पांडे तो उनका मानसिक संतुलन बिगड़ा हुआ बता चुके हैं। इससे ज्यादा पीड़ा उन्हें इस बात की है कि पार्टी के अंदर भी सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव उनके खिलाफ आ रहे बयानों पर कोई लगाम नहीं लगा रहे हैं। पार्टी नेतृत्व पर दलितों और पिछड़ों को उचित भागीदारी न दिए जाने का जो आरोप उन्होंने लगाया है, वो दरअसल राज्यसभा चुनाव से जुड़ा है। यहां तीन में दो टिकट सामान्य वर्ग को दे दिए गए हैं। इससे भी स्वामी प्रसाद क्षुब्ध बताए जा रहे हैं। टिकट वितरण में उनकी मानी जानी तो दूर, महासचिव होने के बावजूद कोई जानकारी तक नहीं दी गई। बताते हैं कि जया बच्चन को पांचवीं बार प्रत्याशी बनाए जाने के स्वामी प्रसाद खिलाफ हैं।

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अखिलेश से अलग राह पकड़ने की ओर बढ़ाए कदम
सूत्रों का कहना है कि स्वामी प्रसाद मौर्य ने अखिलेश यादव से अलग राह पकड़ने की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। महासचिव पद से उनका इस्तीफा दोतरफा लिटमस टेस्ट की तरह है। एक, सपा नेतृत्व उनके इस कदम से कितना दबाव में आता है। दूसरा, किसी अन्य दल की तरफ से कितना महत्व मिलता है। सूत्र बताते हैं कि सपा नेतृत्व के दबाव में आने पर आगामी लोकसभा टिकट वितरण में उनके कहने से कुछ टिकट दिए जा सकते हैं। स्वामी प्रसाद मौर्या की पुत्री संघमित्रा बदायूं से भाजपा सासंद हैं, जहां से सपा ने धर्मेंद्र यादव को टिकट दे दिया है। स्वामी प्रसाद अपनी पुत्री के लिए आंवला (बरेली) से टिकट चाहते हैं।
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फर्रुखाबाद के टिकट से नहीं हैं खुश
सूत्रों का कहना है कि स्वामी प्रसाद मौर्य नहीं चाहते थे कि फर्रुखाबाद से डॉ. नवल किशोर शाक्य को प्रत्याशी बनाया जाए। डॉ. शाक्य की शादी संघामित्रा से हुई थी, लेकिन बाद में तलाक हो गया था। स्वामी प्रसाद धार्मिक आडंबरों पर लगातार हमला बोल रहे हैं और प्रभु की प्राण प्रतिष्ठा को भी अवैज्ञानिक धारणा बता रहे हैं। ऐसे में सपा नेतृत्व के भगवान शालिग्राम की स्थापना से पहले पूजा-अर्चना का कार्यक्रम भी उन्हें रास नहीं आया है और इसी दिन उन्होंने महासचिव पद से इस्तीफे का एलान कर दिया।

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