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बेगुनाहों को जेल भेजने वाला बर्खास्त दरोगा पुलिस आवास से गिरफ्तार, दो साल से था फरार
Wed, 13 Mar 2019 01:25 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Wed, 13 Mar 2019 01:25 PM IST
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धीरेंद्र शुक्ला
- फोटो : amar ujala
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लखनऊ में सआदतगंज के तेल व्यवसायी श्रवण साहू को फर्जी मुकदमे में फंसाने के लिए चार बेगुनाह युवकों को शूटर बताकर जेल भेजने में बर्खास्त दरोगा धीरेंद्र शुक्ला अलीगंज थाना परिसर से मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया गया।
दिलचस्प बात ये है कि पुलिस जिसकी तलाश सरगर्मी से करने का दावा कर रही थी वह सरकारी आवास में परिवार के साथ रह रहा था। पुलिस रिकॉर्ड में दो साल से फरार शुक्ला पर 15 हजार का इनाम घोषित था। मंगलवार शाम जब पुलिस ने यहां दबिश दी तो उसने दीवार फांदकर भागने की कोशिश की।
बहरहाल उसे गिरफ्तार कर लिया गया। इसी मामले में बर्खास्त सिपाही धीरेंद्र यादव व अनिल सिंह अब भी फरार हैं। एसएसपी कलानिधि नैथानी ने फरार सिपाहियों की भी जल्द गिरफ्तारी के आदेश दिए हैं। एसएसपी कलानिधि नैथानी के आदेश पर अलीगंज के प्रभारी निरीक्षक फरीद अहमद ने मंगलवार शाम थाना परिसर में बर्खास्त उपनिरीक्षक धीरेंद्र शुक्ला के सरकारी आवास पर दबिश दी। वह पिछली दीवार कूदकर भाग निकला। पुलिस टीम ने घेराबंदी करके पकड़ा और ठाकुरगंज पुलिस के हवाले कर दिया।
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दिलचस्प बात ये है कि पुलिस जिसकी तलाश सरगर्मी से करने का दावा कर रही थी वह सरकारी आवास में परिवार के साथ रह रहा था। पुलिस रिकॉर्ड में दो साल से फरार शुक्ला पर 15 हजार का इनाम घोषित था। मंगलवार शाम जब पुलिस ने यहां दबिश दी तो उसने दीवार फांदकर भागने की कोशिश की।
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बहरहाल उसे गिरफ्तार कर लिया गया। इसी मामले में बर्खास्त सिपाही धीरेंद्र यादव व अनिल सिंह अब भी फरार हैं। एसएसपी कलानिधि नैथानी ने फरार सिपाहियों की भी जल्द गिरफ्तारी के आदेश दिए हैं। एसएसपी कलानिधि नैथानी के आदेश पर अलीगंज के प्रभारी निरीक्षक फरीद अहमद ने मंगलवार शाम थाना परिसर में बर्खास्त उपनिरीक्षक धीरेंद्र शुक्ला के सरकारी आवास पर दबिश दी। वह पिछली दीवार कूदकर भाग निकला। पुलिस टीम ने घेराबंदी करके पकड़ा और ठाकुरगंज पुलिस के हवाले कर दिया।
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कौन रहा था बचाने की कोशिश
अनिल सिंह और धीरेंद्र यादव ( अभी तक फरार)
- फोटो : amar ujala
बड़ा सवाल कौन कर रहा बचाने की कोशिश?
धीरेन्द्र शुक्ला को गिरफ्तार कर भले ही राजधानी पुलिस अपनी पीठ ठोक ले, लेकिन यह सवाल अभी भी अनुतरित है कि आरोपी थाना परिसर में ही था, पर उसे बाहर क्यों तलाशती रही पुलिस? आखिर कौन है जो उसे बचाने की कोशिश कर रहा।
धीरेन्द्र शुक्ला को गिरफ्तार कर भले ही राजधानी पुलिस अपनी पीठ ठोक ले, लेकिन यह सवाल अभी भी अनुतरित है कि आरोपी थाना परिसर में ही था, पर उसे बाहर क्यों तलाशती रही पुलिस? आखिर कौन है जो उसे बचाने की कोशिश कर रहा।
डेढ़ महीने पहले हुई थी इनाम देने की घोषणा
श्रवण साहू
- फोटो : amar ujala
बेटे की हत्या के मुकदमे की पैरवी कर रहे श्रवण साहू को फंसाने की साजिश का भांडा फूटने पर हिस्ट्रीशीटर अकील अंसारी ने एक मामले में आत्मसमर्पण किया और जेल से शूटर भेजकर एक फरवरी 2017 को श्रवण की हत्या करा दी।
हिस्ट्रीशीटर के इशारे पर फर्जी मुकदमे में जेल भेजे गए अफजल के पिता कुर्बान खां द्वारा 19 जनवरी 17 को ठाकुरगंज थाने में दर्ज कराए मुकदमे की विवेचना क्षेत्राधिकारी चौक दुर्गा प्रसाद तिवारी कर रहे थे, लेकिन दो साल बाद भी आरोपियों का कोई सुराग नहीं लगा। विवेचक की संस्तुति पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने डेढ़ महीने पहले तीनों बर्खास्त पुलिसकर्मियों पर इनाम की घोषणा की थी।
हिस्ट्रीशीटर के इशारे पर फर्जी मुकदमे में जेल भेजे गए अफजल के पिता कुर्बान खां द्वारा 19 जनवरी 17 को ठाकुरगंज थाने में दर्ज कराए मुकदमे की विवेचना क्षेत्राधिकारी चौक दुर्गा प्रसाद तिवारी कर रहे थे, लेकिन दो साल बाद भी आरोपियों का कोई सुराग नहीं लगा। विवेचक की संस्तुति पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने डेढ़ महीने पहले तीनों बर्खास्त पुलिसकर्मियों पर इनाम की घोषणा की थी।
होगी जांच, कैसे रह रहा था सरकारी आवास में
दो क्षेत्राधिकारियों की टीम धीरेंद्र शुक्ला को तलाश रही थी और वह अलीगंज थाना परिसर स्थित सरकारी आवास में परिवार के साथ रह रहा था। मुख्यद्वार से बेधड़क आना जाना होता था। दो साल तक उसके ठिकानों पर दबिश के कागजी घोड़े दौड़े। इसके बाद इनाम घोषित हो गया।
इनामी अपराधियों की धरपकड़ की समीक्षा कर रहे एसएसपी कलानिधि नैथानी को बर्खास्त दरोगा धीरेंद्र शुक्ला, आरक्षी धीरेंद्र यादव और अनिल सिंह का कोई सुराग न लगने की बात खटकी। उन्होंने खुद जानकारी जुटाई। अलीगंज थाना परिसर में धीरेंद्र शुक्ला के सरकारी आवास की बात पर हैरत हुई।
आननफानन उसे गिरफ्तार कराया और बर्खास्त दरोगा के सरकारी आवास को लेकर जांच शुरू की है। बेटे की हत्या के मुकदमे की पैरवी कर रहे श्रवण साहू को फंसाने की साजिश और उसके बाद हिस्ट्रीशीटर द्वारा जेल से शूटर भेजकर श्रवण की हत्या से महकमे की फजीहत से वाकिफ कलानिधि नैथानी ने नए साल में श्रवण साहू कांड से संबंधित मुकदमों की गहन समीक्षा की।
पता चला कि शूटर बताकर जेल भेजे गए चार युवकों की तरफ से सआदतगंज, चौक और हसनगंज थाने में प्राथमिकी दर्ज कराकर तत्कालीन एसएसपी मंजिल सैनी ने संबंधित क्षेत्राधिकारियों को विवेचना सौंपी थी। सआदतगंज थाने में दर्ज मुकदमे में सात साल से कम की सजा वाली धाराएं थीं।
इस पर क्षेत्राधिकारी बाजार खाला ने गिरफ्तारी के बगैर आरोप दाखिल कर दिया था। ठाकुरगंज थाने में दर्ज दो मुकदमों की विवेचना क्षेत्राधिकारी चौक और हसनगंज के मुकदमे की विवेचना क्षेत्राधिकारी महानगर द्वारा की जा रही थी। इनमें बर्खास्त दरोगा धीरेंद्र शुक्ला, आरक्षी अनिल सिंह और धीरेंद्र यादव के साथ अन्य आरोपियों की सरगर्मी से तलाश और संभावित ठिकानों में दबिश का जिक्र था।
इनामी अपराधियों की धरपकड़ की समीक्षा कर रहे एसएसपी कलानिधि नैथानी को बर्खास्त दरोगा धीरेंद्र शुक्ला, आरक्षी धीरेंद्र यादव और अनिल सिंह का कोई सुराग न लगने की बात खटकी। उन्होंने खुद जानकारी जुटाई। अलीगंज थाना परिसर में धीरेंद्र शुक्ला के सरकारी आवास की बात पर हैरत हुई।
आननफानन उसे गिरफ्तार कराया और बर्खास्त दरोगा के सरकारी आवास को लेकर जांच शुरू की है। बेटे की हत्या के मुकदमे की पैरवी कर रहे श्रवण साहू को फंसाने की साजिश और उसके बाद हिस्ट्रीशीटर द्वारा जेल से शूटर भेजकर श्रवण की हत्या से महकमे की फजीहत से वाकिफ कलानिधि नैथानी ने नए साल में श्रवण साहू कांड से संबंधित मुकदमों की गहन समीक्षा की।
पता चला कि शूटर बताकर जेल भेजे गए चार युवकों की तरफ से सआदतगंज, चौक और हसनगंज थाने में प्राथमिकी दर्ज कराकर तत्कालीन एसएसपी मंजिल सैनी ने संबंधित क्षेत्राधिकारियों को विवेचना सौंपी थी। सआदतगंज थाने में दर्ज मुकदमे में सात साल से कम की सजा वाली धाराएं थीं।
इस पर क्षेत्राधिकारी बाजार खाला ने गिरफ्तारी के बगैर आरोप दाखिल कर दिया था। ठाकुरगंज थाने में दर्ज दो मुकदमों की विवेचना क्षेत्राधिकारी चौक और हसनगंज के मुकदमे की विवेचना क्षेत्राधिकारी महानगर द्वारा की जा रही थी। इनमें बर्खास्त दरोगा धीरेंद्र शुक्ला, आरक्षी अनिल सिंह और धीरेंद्र यादव के साथ अन्य आरोपियों की सरगर्मी से तलाश और संभावित ठिकानों में दबिश का जिक्र था।