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सुप्रीम कोर्ट ने स्कूल को लगाई फटकार, फुटबॉल नहीं हैं बच्चे

Sat, 23 Jul 2016 10:32 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ-दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ-दिल्ली Updated Sat, 23 Jul 2016 10:32 AM IST
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supreme court slams cms lucknow for violating rte
डेमो प‌िक

सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद पिछले साल 13 गरीब बच्चों को दाखिला देने वाले सिटी मान्टेसरी स्कूल के इन बच्चों को उनके घर के पास दूसरे विद्यालय में शिफ्ट किए जाने की गुजारिश पर सर्वोच्च न्यायालय ने फिर कड़ी फटकार लगाई है। 

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बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा -बच्चे फुटबॉल नहीं, जिन्हें यहां से वहां फेंका जाए। गरीब बच्चों के दाखिले के एक साल बाद सीएमएस ने उनको उनके घर के नजदीक के स्कूल में शिफ्ट करने के लिए सुप्रीम कोर्ट याचिका दाखिल की थी। 
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न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति आरके अग्रवाल की पीठ के समक्ष शुक्रवार को सिटी मांटेसरी स्कूल की ओर से कहा गया कि उसने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के 13 बच्चों को अपने स्कूल में दाखिला दे दिया है। साथ ही यह दलील दी कि केवल उनके स्कूल में ही आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को दाखिला दिलाया गया है। 
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इन बच्चों के घर के पास भी स्कूल हैं, इसलिए उन्हें वहां शिफ्ट कर दिया जाए। स्कूल की इस दलील पर पीठ ने सख्त नाराजगी जताई।

पीठ ने इस संबंध में स्कूल और प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर जवाब देने को कहा है। हालांकि उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश वकील ने भी कहा कि बच्चों को दूसरे स्कूलों में नहीं शिफ्ट किया जाना चाहिए।

25 फीसदी सीटों पर गरीब बच्चों का दाखिला देना अनिवार्य

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डेमो प‌िक - फोटो : Getty

आरटीई के तहत अल्पसंख्यक संस्थानों को छोड़कर अन्य सभी निजी स्कूलों को 25 फीसदी सीटों पर आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को दाखिला देना अनिवार्य है। बच्चों की फीस की प्रतिपूर्ति प्रदेश सरकर को करनी होती है। 

इसके बावजूद ज्यादातर विद्यालय गरीब बच्चों को दाखिला देने में आनाकानी करते हैं। सीएमएस ने इंदिरानगर शाखा में निशुल्क दाखिला न देने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ी थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ही 13 बच्चों को दाखिला मिला था।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीएमएस ने आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को दाखिला भले ही दिया हो पर फीस प्रतिपूर्ति के लिए अभी तक आवेदन नहीं किया गया है। इसके बजाय स्कूल प्रशासन इन बच्चों को अन्य स्कूल में ट्रांसफर करने के लिए बीएसए को पत्र लिख रहा था। बीएसए के मना करने पर स्कूल की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई। 

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