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विनय पाठक प्रकरण : सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई से जांच न कराने की मांग वाली एसएलपी खारिज
Sun, 07 May 2023 02:12 PM IST
ishwar ashish
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Sun, 07 May 2023 02:12 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने विनय पाठक मामले में सीबीआई से जांच न कराने की मांग करने वाले एसएलपी खारिज कर दी है। याची ने सीबीआई की जगह एसटीएफ से जांच कराने की मांग की थी।
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कुलपति प्रो. विनय पाठक
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति के खिलाफ चल रहे मामले में विवेचना सीबीआई से न कराने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) खारिज हो गई है। न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की बेंच ने याची के द्वारा उनकी याचिका वापस लेने की मांग स्वीकार करते हुए एसएलपी को निरस्त कर दिया।
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गौरतलब है कि याची डेविड मारियो डेनिश ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर के उसके द्वारा इंदिरानगर थाने में दर्ज कराई गई रिपोर्ट पर सीबीआई से विवेचना की जगह एसटीएफ से विवेचना कराए जाने की मांग की गई थी। हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद गत 21 फरवरी को याचिका खारिज कर दी थी। याची ने इसी आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल की थी।
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यह है मामला
29 अक्तूबर 2022 को डेविड मारियो डेनिस ने इंदिरानगर थाने में डॉ. भीमराव आंबेडकर विवि आगरा के तत्कालीन कुलपति विनय पाठक और अजय मिश्रा पर केस दर्ज कराया था। इसमें कहा गया था कि उनकी कंपनी वर्ष 2019- 2020 तक आगरा विवि की परीक्षा से संबंधित कार्य कर रही थी।
प्रो. पाठक से लंबित बिलों के भुगतान के लिए 15 प्रतिशत कमीशन की मांग की थी। बिल भुगतान करने के बाद अजय मिश्रा से संपर्क करने को कहा था। डेविड का दावा है कि उसने कमीशन के तौर पर प्रो. पाठक को कुल एक करोड़ 41 लाख रुपये दिए। जब वादी ने काम जारी रखने का अनुबंध बढ़ाने का कमीशन नहीं दिया तो काम आरोपी अजय मिश्र की कंपनी को दिलवा दिया गया। पहले केस की जांच एसटीएफ कर रही थी। बाद में यह केस सीबीआई को ट्रांसफर हुआ था।