कोर्ट की सख्ती पर कोटे से प्रमोशन वालों का डिमोशन
सुप्रीम कोर्ट के सख्त तेवर देखते हुए यूपी सरकार ने कोटे से प्रमोशन पाने वालों का डिमोशन शुरू कर दिया है। राज्य सरकार ने बृहस्पतिवार को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन यह फैसला लिया। शासन ने सभी विभागों को 5 सितंबर तक डिमोशन की कार्रवाई पूरी कर रिपोर्ट देने को कहा है।
पदोन्नति में आरक्षण संबंधी अदालती आदेश पर अमल न करने पर शीर्ष अदालत ने बृहस्पतिवार को ही यूपी के मुख्य सचिव को लताड़ लगाई और तीन हफ्ते में जवाबी हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया। सरकार ने जवाब के लिए 15 सितंबर तक का वक्त दिया है।
मुख्य सचिव को प्रमोशन में आरक्षण और परिणामी ज्येष्ठता के आधार पर प्रोन्नति पाने वालों को पदावनत करने संबंधी आदेश पर अमल करके बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल करना था। इस बीच, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डिमोशन पर रोक लगा दी थी। बुधवार को हाईकोर्ट द्वारा रोक हटा लिए जाने के बाद सरकार ने यह फैसला लिया।
20 हजार कर्मचारियों पर असर
सरकार के इस फैसले से करीब 20 हजार अधिकारी, कर्मचारी डिमोट हो जाएंगे। इसका असर सिंचाई विभाग के अलावा पदोन्नति में आरक्षण और परिणामी ज्येष्ठता के आधार पर प्रमोट हुए अन्य विभागों के अफसरों व कर्मचारियों पर भी पड़ेगा।
अगर फैसला 1997 से लागू होता तो संख्या डेढ़ लाख से ऊपर पहुंच सकती थी, लेकिन बहुत से लोग रिटायर हो गए और 2007 से प्रमोशन नहीं हुए।
वेतन पर असर नहीं
जो भी अफसर या कर्मचारी डिमोट होगा, उनके वेतन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। ये सिर्फ मौजूदा पदों से इधर-उधर होंगे। मुख्य सचिव आलोक रंजन पहले ही इसे स्पष्ट कर चुके हैं।