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सुप्रीम कोर्ट के फैसले से 16,500 आशियाना खरीदारों की बढ़ी उम्मीद
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आम्रपाली बिल्डर के खिलाफ आए सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले ने लखनऊ में 16,500 से अधिक खरीदारों में अपना आशियाना मिलने की उम्मीद बढ़ा दी है। चार बड़े बिल्डर्स के प्रोजेक्टों में इन्होंने गाढ़ी कमाई लगाई है। हालांकि, चार साल से अधिक समय की देरी के बाद भी प्रोजेक्ट पूरे नहीं किए जा सके हैं। कई प्रोजेक्टों में तो काम ही बंद है। अब कोर्ट के सभी बिल्डरों के प्रोजेक्ट पूरा कराने या कार्रवाई के आदेश से राजधानी में ये प्रोजेक्ट पूरा करने को दबाव बनेगा।
लखनऊ में प्रमुख रूप से चार बिल्डरों में अंसल एपीआई, शाइन सिटी समूह, रोहतास समूह और आरसंस है। इन्होंने बुकिंग कर हजारों करोड़ रुपये जमा कर लिए। इसके बाद भूखंड, विला या फ्लैट देने की जगह खरीदारों को भटकाना शुरू कर दिया। अब बिल्डर्स इनसे मिलते तक नहीं। अंसल के अधिकतर प्रोजेक्टों में निर्माण की गति धीमी है तो रोहतास के प्रोजेक्टों पर काम बंद पड़ा है। आरसंस और शाइन सिटी के प्रोजेक्टों में तो रेरा की तकनीकी टीम को खुद काम बंद मिला।
रेरा की सख्ती के बाद भी राहत नहीं
अंसल एपीआई, शाइन सिटी समूह, रोहतास समूह और आरसंस पर रेरा सख्ती कर रहा है। अंसल को जहां प्रोजेक्टों के पंजीकरण निरस्त करने के लिए नोटिस तक मिल चुके हैं तो रोहतास की टाउनशिप और अपार्टमेंट के पंजीकरण निरस्त करने की कार्रवाई शुरू हो चुकी है। आरसंस और शाइन सिटी के प्रोजेक्टों के पंजीकरण ही रेरा में नहीं हैं। ऐसे में दोनों बिल्डर्स को इसे सुनिश्चित करने का मौका दिया है। हालांकि, इस कवायद के बाद भी खरीदारों को राहत नहीं मिल पाई है।
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यहां तो प्रोजेक्टों पर लग चुका ताला
राजधानी में श्रीइंफ्रा, प्रोपलरिटी, बयाबीवर जैसे बड़े बिल्डर्स पूरी तरह प्रोजेक्टों पर काम बंद कर भाग चुके हैं। इन्होंने करीब पांच साल पहले बुकिंग शुरू कीं। लोगों से पैसा लेने के बाद बिल्डर्स गायब हैं। इनके खिलाफ एफआईआर तक कराई गई हैं।
कहां, कितने खरीदार प्रभावित
बिल्डर फंसे खरीदार
अंसल एपीआई, हाईटेक टाउनशिप करीब 6500
रोहतास समूह, दो इंटीग्रेटेड टाउनशिप, चार बहुमंजिला प्रोजेक्ट करीब 2500
आरसंस, चार आवासीय प्रोजेक्ट करीब 1500
शाइन सिटी, चार प्रोजेक्ट करीब 6000
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर काम हो
रोहतास बायर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष अभिषेक तिवारी का कहना है कि निदेशकों पर गैंगस्टर एक्ट लगा। हालांकि, अभी तक मुख्य साजिशकर्ता व निदेशक परेश रस्तोगी व पीयूष रस्तोगी गिरफ्तार नहीं हुए। एसो. को सुप्रीम कोर्ट के फैसले से उम्मीद बंधी है। आदेश का अनुपालन जल्द हो, यह भी आवश्यक है। एसोसिएशन भी बिल्डर के खिलाफ नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में मुकदमा करने जा रही है। हम सीबीआई जांच की मांग भी कर रहे हैं। 1000 करोड़ रुपये से अधिक का गबन बिल्डर कंपनी ने किया है। निष्पक्ष जांच हो तो हकीकत सामने आ जाएगी।
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लखनऊ में प्रमुख रूप से चार बिल्डरों में अंसल एपीआई, शाइन सिटी समूह, रोहतास समूह और आरसंस है। इन्होंने बुकिंग कर हजारों करोड़ रुपये जमा कर लिए। इसके बाद भूखंड, विला या फ्लैट देने की जगह खरीदारों को भटकाना शुरू कर दिया। अब बिल्डर्स इनसे मिलते तक नहीं। अंसल के अधिकतर प्रोजेक्टों में निर्माण की गति धीमी है तो रोहतास के प्रोजेक्टों पर काम बंद पड़ा है। आरसंस और शाइन सिटी के प्रोजेक्टों में तो रेरा की तकनीकी टीम को खुद काम बंद मिला।
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रेरा की सख्ती के बाद भी राहत नहीं
अंसल एपीआई, शाइन सिटी समूह, रोहतास समूह और आरसंस पर रेरा सख्ती कर रहा है। अंसल को जहां प्रोजेक्टों के पंजीकरण निरस्त करने के लिए नोटिस तक मिल चुके हैं तो रोहतास की टाउनशिप और अपार्टमेंट के पंजीकरण निरस्त करने की कार्रवाई शुरू हो चुकी है। आरसंस और शाइन सिटी के प्रोजेक्टों के पंजीकरण ही रेरा में नहीं हैं। ऐसे में दोनों बिल्डर्स को इसे सुनिश्चित करने का मौका दिया है। हालांकि, इस कवायद के बाद भी खरीदारों को राहत नहीं मिल पाई है।
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यहां तो प्रोजेक्टों पर लग चुका ताला
राजधानी में श्रीइंफ्रा, प्रोपलरिटी, बयाबीवर जैसे बड़े बिल्डर्स पूरी तरह प्रोजेक्टों पर काम बंद कर भाग चुके हैं। इन्होंने करीब पांच साल पहले बुकिंग शुरू कीं। लोगों से पैसा लेने के बाद बिल्डर्स गायब हैं। इनके खिलाफ एफआईआर तक कराई गई हैं।
कहां, कितने खरीदार प्रभावित
बिल्डर फंसे खरीदार
अंसल एपीआई, हाईटेक टाउनशिप करीब 6500
रोहतास समूह, दो इंटीग्रेटेड टाउनशिप, चार बहुमंजिला प्रोजेक्ट करीब 2500
आरसंस, चार आवासीय प्रोजेक्ट करीब 1500
शाइन सिटी, चार प्रोजेक्ट करीब 6000
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर काम हो
रोहतास बायर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष अभिषेक तिवारी का कहना है कि निदेशकों पर गैंगस्टर एक्ट लगा। हालांकि, अभी तक मुख्य साजिशकर्ता व निदेशक परेश रस्तोगी व पीयूष रस्तोगी गिरफ्तार नहीं हुए। एसो. को सुप्रीम कोर्ट के फैसले से उम्मीद बंधी है। आदेश का अनुपालन जल्द हो, यह भी आवश्यक है। एसोसिएशन भी बिल्डर के खिलाफ नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में मुकदमा करने जा रही है। हम सीबीआई जांच की मांग भी कर रहे हैं। 1000 करोड़ रुपये से अधिक का गबन बिल्डर कंपनी ने किया है। निष्पक्ष जांच हो तो हकीकत सामने आ जाएगी।