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सुना है क्या: आज 'शरण की आस में बिलबिला रहे कोडीन भइया', बेस्ट ऑफ लक और गलती छिपाने के नायाब तरीके के किस्से

Sat, 27 Dec 2025 03:53 PM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Sat, 27 Dec 2025 03:53 PM IST
सार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासन में तमाम ऐसे किस्से हैं, जो हैं तो उनके अंदरखाने के... लेकिन, चाहे-अनचाहे बाहर आ ही जाते हैं। ऐसे किस्सों को आप अमर उजाला के "सुना है क्या" सीरीज में पढ़ सकते हैं। तो आइए पढ़ते हैं इस बार क्या है खास...

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suna hai kya Kodin Bhaiya desperately seeking refuge best of luck, stories of unique ways to cover up mistakes
सुना है क्या/suna hai kya - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में 'शरण की आस में बिलबिला रहे कोडीन भइया', के अलावा 'बैठक के लिए भी मिल रहा बेस्ट ऑफ लक' और 'गलती छिपाने का नायाब तरीका' के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी... 

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शरण की आस में बिलबिला रहे कोडीन भइया

कफ सिरप कोडीन भइया के लिए गले की फांस बन गया है। इसलिए वह मामला मैनेज करने की हरसंभव कोशिश में जुट गए हैं। कुछ दिन पहले ही वह एक एडिशनल एडवोकेट जनरल (एएजी) के पास पहुंचे। एएजी साहब निजी काम से अस्पताल गए थे। कोडीन भइया ने अस्पताल में ही एएजी साहब के सामने अपनी बेगुनाही का राग अलापना शुरू कर दिया। वह बस किसी तरह चाह रहे थे कि एएजी साहब उनकी बात ऊपर तक पहुंचा दें। हालांकि, हकीकत में उनकी दाल वहां भी नहीं गली। निराश होकर वापस लौटना पड़ा।

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बैठक के लिए भी मिल रहा बेस्ट ऑफ लक

प्रदेश के पढ़ाई-लिखाई वाले विभाग के हालात इस समय काफी बदले-बदले हैं। न सिर्फ यहां पर फाइलें और कामकाज तेजी से चल रहा है बल्कि बैठकों में कुछ भी बताने वाले अधिकारी पूरी तैयारी के साथ पहुंच रहे हैं। किसी को पता नहीं कि बड़े साहब कब और किससे योजनाओं के बारे में बारीक जानकारी पूछ लें। हालत यह है कि बड़े साहब की बैठक में जाने वाले अधिकारियों को अब उनके मातहत भी बेस्ट ऑफ लक कहकर विदा करते हैं क्योंकि पता नहीं कब किस अफसर की क्लास लग जाए।

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गलती छिपाने का नायाब तरीका

फल सब्जी वाले विभाग ने गलती छिपाने का नायाब तरीका ढूंढ लिया है। छोटी सी गलती हो तो बड़ी कार्रवाई कर देनी चाहिए। यह कार्रवाई सही है या गलत, इसकी परवाह नहीं। पिछले दिनों यही फार्मूला अपनाया गया। सरकारी फार्म में तैयार उत्पाद जहां भेजना था, वहां से कहीं और भेज दिया गया। भंडाफोड़ हुआ तो ताबड़तोड़ कार्रवाई हो गई। मनमानी रोकने वाले बच गए, दूसरे लोगों को जिम्मेदार ठहरा दिया गया। वे कोर्ट में खुद को बेगुनाह साबित करने में सफल रहे। अब अपनी गलती छुपाने के लिए उन्हें टहलाया जा रहा है।

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