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सुना है क्या: आज 'स्वर्ग से SIR की निगरानी' की कहानी, साथ में साहब का लंबा ज्ञान व जेब तक पहुंची आंच के किस्से
Mon, 12 Jan 2026 10:22 AM IST
भूपेन्द्र सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: भूपेन्द्र सिंह
Updated Mon, 12 Jan 2026 10:22 AM IST
सार
यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासन में तमाम ऐसे किस्से हैं, जो हैं तो उनके अंदरखाने के... लेकिन, चाहे-अनचाहे बाहर आ ही जाते हैं। ऐसे किस्सों को आप अमर उजाला के "सुना है क्या" सीरीज में पढ़ सकते हैं। तो आइए पढ़ते हैं इस बार क्या है खास...
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सुना है क्या/suna hai kya
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में 'बड़े साहब की जेब तक पहुंची आंच' की कहानी। इसके अलावा 'साहब का ज्ञान लंबा, चाय तक नसीब नहीं' और 'स्वर्ग से SIR की निगरानी' के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी...
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बड़े साहब की जेब तक पहुंची आंच
दिल्ली से जुड़े राजस्व वाले एक महकमे में हलचल मची है। ईमानदारी के ढोल पीटने में आगे यह विभाग अक्सर प्रदेश से जुड़े महकमे की बेईमानी का राग अलापता रहता है। अब जब खुद विभाग के अफसर रंगे हाथों दबोचे गए हैं तो राजधानी तक इसकी आंच पहुंच गई है। चर्चा है कि इस पूरे मामले में राजधानी के दो बड़े अधिकारियों की भी भूमिका संदिग्ध है। यहां तक धमकी दी गई है कि अगर फंसे हुए अफसरों को बचाया नहीं गया तो वे राजफाश कर देंगे।
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साहब का ज्ञान लंबा, चाय तक नसीब नहीं
प्रदेश में छात्रों के लिए तकनीकी पढ़ाई को बढ़ावा देने वाले विभाग के एक साहब चर्चा में हैं। हालत यह है कि विभाग का कामकाज भले ही नहीं दिख रहा है लेकिन साहब की बैठकें नियमित हैं। अब विभाग के अधिकारी इसलिए भी परेशान हैं कि साहब 10-15 मिनट की बैठक भी दो घंटे खींचकर पूरा ज्ञान देते हैं लेकिन चाय, पानी तक नहीं पूछते हैं। कई बार तो अधिकारी बैठक के बीच से उठकर चाय, नाश्ता करने चले जाते हैं। वापस लौटकर फिर बैठक में जुड़ जाते हैं। चर्चा तो यह भी है कि साहब का विभाग में मन नहीं लग रहा लेकिन उनको मुक्ति नहीं मिल रही है।
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