सुना है क्या: तुमसा न देखा कोई नासमझ की कहानी, साथ ही 'असहमति से बिगड़ा खेल व साहब सिर्फ नाम के हैं' के किस्से
यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासन में तमाम ऐसे किस्से हैं, जो हैं तो उनके अंदरखाने के... लेकिन, चाहे-अनचाहे बाहर आ ही जाते हैं। ऐसे किस्सों को आप अमर उजाला के "सुना है क्या" सीरीज में पढ़ सकते हैं। तो आइए पढ़ते हैं इस बार क्या है खास...
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विस्तार
यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में 'तुमसा न देखा कोई नासमझ' की कहानी। इसके अलावा 'नायाबों की असहमति से खेल बिगड़ा' और '...तो क्या साहब सिर्फ नाम के हैं' के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी...
तुमसा न देखा कोई नासमझ
पूरे देश की नौकरशाही में अंग्रेजी का शब्द ईडियट (नासमझ व्यक्ति) छाया हुआ है। भरी बैठक में वरिष्ठ नौकरशाह ने अपेक्षाकृत कम वरिष्ठ नौकरशाह के लिए गरिमा के खिलाफ शब्दों का इस्तेमाल किया तो सामने वाला नौकरशाह भी उतना जूनियर नहीं था कि चुप बैठा रहता। वरिष्ठ नौकरशाह से उसी समय कह दिया कि 25 साल की नौकरी में किसी ने उनसे ईडियट की तरह ऐसे बात नहीं की। ऊपर चाहे इस मामले को जैसे लिया जा रहा है लेकिन ईडियट बोलने वाले नौकरशाह को समकक्षों और जूनियर्स से खूब वाहवाही मिल रही है।
नायाबों की असहमति से खेल बिगड़ा
इन दिनों सूबे के भगवा दल में संगठन की कुर्सी बांटने को लेकर कोर टीम में शह और मात का खेल चल रहा है। दावेदार टकटकी लगाए हैं कि अब सूची आ रही है लेकिन सहमति नहीं बनने से मामला टलता जा रहा है। चर्चा है कि हाल में 250 चहेतों के नाम की सूची कोर कमेटी के प्रमुख सदस्य दो नायबों के सामने रखी गई थी, जिस पर दोनों ने सहमति नहीं दी। लिहाजा दोनों को संगठन की ओर से ऑफर दिया गया कि आप दोनों भी अपने कुछ चहेतों का नाम दे दीजिए तो उनको भी समायोजित करके सूची को फाइनल कर दिया जाए। कहा जा रहा है कि दोनों नायबों ने सूची में शामिल नाम देखकर अपयश का भागी बनने से इंकार कर दिया है। लिहाजा सूची अटक गई है।
...तो क्या साहब सिर्फ नाम के हैं
जांच एजेंसी ने संदिग्ध आतंकी मॉड्यूल का खुलासा किया। इसी के साथ पश्चिम के एक जिले की पुलिस के खेल और नाकामी का भी खुलासा हो गया। जिस शख्स को क्लीन चिट दी गई थी, वह मॉड्यूल का प्रमुख निकला। ये जानकार उस जिले के आला पुलिस अफसरों की सांस फूल गई। फिर क्या था, सबसे छोटी मछली पर कार्रवाई हो गई। एक की जांच भी शुरू हुई। चर्चा है कि जो वहां के मुखिया हैं उनकी नाक के नीचे इतना बड़ा कांड हो गया और उनको पता ही नहीं चत तो काहे के मुखिया। साहब सिर्फ अपनी मौज में हैं।